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स्विट्जरलैंड के जेनेवा में ब्रह्मांड की उत्पत्ति की खोज को लेकर चल रहे महाप्रयोग में सिमडेगा के वैज्ञानिक सिद्धार्थ प्रसाद भी शामिल हैं। पिछले दिनों सिमडेगा आए वैज्ञानिक सिद्धार्थ प्रसाद ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। महाप्रयोग के संबंध में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह माना जाता है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक महाविस्फोट से हुई है। जेनेवा में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के समय हुए महाविस्फोट जैसी स्थिति उत्पन्न की जाती है और इसके बाद परमाणुओं के कणों की जांच की जाती है, ताकि यह जानकारी मिल सके कि इन सूक्ष्म कणों से ब्रह्मांड की उत्पत्ति किस तरह हुई होगी। उन्होंने बताया कि इस महाप्रयोग में विश्व के 40 से 50 देशों के वैज्ञानिक शामिल हैं। वैज्ञानिक सिद्धार्थ प्रसाद ने कहा कि उनकी प्राथमिक शिक्षा सिमडेगा जिले में सरकारी विद्यालय में हुई। उन्होंने उच्च शिक्षा भी सरकारी तंत्र से ही प्राप्त की है और अब इस महाप्रयोग में शामिल हुए हैं। कहा कि सरकारी तंत्र से शिक्षा को और सुदृढ़ बनाया जाए। विद्यार्थियों को प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा सशक्त तरीके से दी जाए तो वे अपना रास्ता खुद बना लेंगे।विदेशों में लोगों की कार्यशैली के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोग और वैज्ञानिक भी काफी समर्पित तरीके से करते हैं। वे अपने ही काम पर सबसे अधिक ध्यान और समय देते हैं। कहा कि महाप्रयोग में भारत की स्थिति काफी सम्मानजनक रही है। इसमें भारत सरकार का भी पूरा सहयोग मिलता रहा है। महाप्रयोग में भारत की भूमिका सराहनीय रही है।विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित ब्रेक थ्रू सम्मान मिलने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को पाने के बाद भारत के वैज्ञानिकों का मनोबल और अधिक ऊंचा हुआ है। वैज्ञानिक सिद्धार्थ प्रसाद के भाई हॉकी झारखंड के महासचिव मनोज कोनबेगी ने कहा कि एक छोटे से गांव से निकलकर अपने वैज्ञानिक सोच की बदौलत सिद्धार्थ प्रसाद सरकारी तंत्र से ही शिक्षा प्राप्त करके इस ऊंचाई तक पहुंचे हैं।
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सरकारी संस्थानों से पढ़े विद्यार्थी खुद बना लेंगे रास्ता : वैज्ञानिक सिद्धार्थ
