Headlines

जवाई में लेपर्ड बफर जोन का विरोध:बोले- एक किमी दायरे में खेत, कुएं और मकान आए; अनिश्चितकालीन अनशन की चेतावनी




जवाई क्षेत्र के सैकड़ों किसान और रहवासी गुरुवार को अपनी मांगों को लेकर पाली पहुंचे। यहां कलेक्ट्रेट के सामने सांकेतिक धरना दिया और इसके बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने कहा कि जवाई बांध क्षेत्र में तेंदुए की गुफाओं से एक किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित करना व्यावहारिक नहीं है। इस फैसले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और पशुपालकों में आक्रोश है। उच्च न्यायालय के आदेश और वन विभाग की नई एसओपी (SOP) के विरोध में ग्राम पंचायत सेणा, बीसलपुर और दूदनी सहित जवाई क्षेत्र के निवासियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन अनशन और उग्र प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। 1 किमी की सीमा अव्यावहारिक, 80 मीटर करने की मांग किसान नेता जयेन्द्रसिंह गलथनी ने कहा कि गुफा से 1 किलोमीटर (1000 मीटर) की पाबंदी पूरी तरह अव्यावहारिक है। इससे किसानों के खेत, कुएं और रिहायशी मकान प्रतिबंधित क्षेत्र में आ गए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस सीमा को घटाकर 80 मीटर किया जाए। किसानों को अपनी निजी भूमि पर आधुनिक खेती, कुएं खोदने, पॉलीहाउस, डेयरी फार्म, गोट फार्मिंग और केटल शेड बनाने की पूर्ण छूट मिलनी चाहिए। स्थानीय लोगों पर रोक, बाहरी होटलों को लेकर सवाल ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जबकि कोठार में लिलोड़ा पहाड़ी के पास बहुमंजिला होटल का निर्माण तेंदुए की गुफा से शून्य मीटर की दूरी पर चल रहा है। ग्रामीणों ने इस अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त करने और बाहरी पूंजीपतियों के बड़े होटलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इसके विपरीत स्थानीय निवासियों को होम-स्टे और रूरल टूरिज्म की विशेष छूट देने की वकालत की गई है। 80% जमीन जवाई डूब क्षेत्र में जाने का दावा प्रभावित ग्राम पंचायतों सेणा, बीसलपुर और दूदनी की स्थिति का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने कहा कि इन गांवों की 80% भूमि पहले ही जवाई डूब क्षेत्र में जा चुकी है। बची हुई भूमि में से अधिकांश पहाड़ियां हैं। ग्रामीणों के अनुसार मात्र 5 वर्ग किलोमीटर के सीमित क्षेत्र में रहने वाली आबादी पर 1 किलोमीटर का प्रतिबंध लगाना उनके अस्तित्व को मिटाने जैसा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग ने बिना किसी ग्राम सभा या स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति के एकतरफा एसओपी तैयार की है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। 2013 के समझौते को लागू करने की मांग ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्ष 2013 में हुए कम्युनिटी रिजर्व समझौते के अनुरूप ही कार्य किया जाए। साथ ही बाहरी होटल व्यवसायियों द्वारा सरकारी और गोचर भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को तुरंत हटाकर जमीन मवेशियों के लिए मुक्त कराने की मांग की गई। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी आजीविका और अधिकारों की रक्षा नहीं की तो पूरा जवाई क्षेत्र सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। ये रहे मौजूद इस दौरान किसान संघर्ष समिति अध्यक्ष जयेन्द्रसिंह गलथनी, रघुवीरसिंह बिसलपुर, मनमोहन सिंह बिलसपुर, संग्राम सिंह वेलार, विक्रमसिंह बीजापुर, विक्रमसिंह जीवंदा, लालाराम देवासी, राजेंद्रसिंह राणावत सेणा, विकासपाल सिंह सेणा, भूपेन्द्रसिंह सेणा, डूंगरसिंह सेणा, हनवत सिंह जीवदा, अजयपालसिंह हेमावास, महावीरसिंह टेवाली सहित कई जने मौजूद रहे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *