![]()
बिहार के विवि और अंगीभूत कॉलेजों के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा-शर्तों में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन से किसी भी विवाद पर शिक्षक और कर्मचारी सीधे अदालत नहीं जा सकेंगे। लोकभवन ने सेवा शर्तों में बदलाव के लिए 43 पन्नों का नया परिनियम प्रारूप तैयार कर सभी कुलपतियों को भेज दिया है। अगर कुलपति अपनी राय नहीं देते हैं, तो लोकभवन उनकी मौन सहमति मान लेगा। हालांकि, बिहार कृषि विवि, बिहार पशु विज्ञान विवि, नालंदा खुला विवि और आर्यभट्ट ज्ञान विवि को इससे अलग रखा गया है। विवादों के निपटारे के लिए विशेष ट्रिब्यूनल बनेगा। इसमें एक सदस्य सिंडिकेट का, एक कर्मचारी का और तीसरा कुलाधिपति का होगा। ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम होगा। इसे कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इससे मुकदमों का अंबार खत्म होगा। नए नियमों से प्रोफेसरों से शोध और पेटेंट का व्यक्तिगत अधिकार छिन जाएगा। अब शोध पर यूनिवर्सिटी का ही मालिकाना हक रहेगा। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है सवाल: कोर्ट जाने पर रोक क्यों लगाई जा रही है?
जवाब: वर्तमान में शिकायत कोषांग के बाद कर्मचारी सीधे हाईकोर्ट जाते थे, जिससे मुकदमों का अंबार लगा रहता था। नया ट्रिब्यूनल बनने से मुकदमों की इस बाढ़ पर रोक लगेगी।
सवाल: ट्रिब्यूनल का ढांचा कैसा होगा और फैसला कौन करेगा?
जवाब: ट्रिब्यूनल में कुल तीन सदस्य होंगे। इसमें सिंडिकेट और कर्मचारी का एक-एक प्रतिनिधि होगा, जबकि लोकभवन से मनोनीत अंपायर अंतिम फैसला करेगा।
सवाल: प्रोफेसरों के रिसर्च और पेटेंट पर क्या फर्क पड़ेगा?
जवाब: प्रोफेसर अपने रिसर्च या पेटेंट पर व्यक्तिगत मालिकाना हक नहीं जता पाएंगे। पेटेंट पर पूरा अधिकार यूनिवर्सिटी का होगा और व्यावसायिक बिक्री पर रोक रहेगी।
सवाल: अफसरों और कर्मचारियों की बहाली अब कैसे होगी?
जवाब: कुलपतियों का अपने स्तर पर अफसरों को बहाल करने का अधिकार खत्म हो गया है। ग्रुप-ए पद बीपीएससी से तथा ग्रुप-बी और सी के पद बीएसएससी से भरे जाएंगे।
सवाल: छुट्टियों के नियमों में कर्मचारियों को क्या राहत मिली है?
जवाब: पहली बार बिहार सरकार की नीति के तहत सरोगेसी लीव का प्रावधान जुड़ा है। साथ ही छूत की बीमारियों में 21 से 30 दिनों की वैतनिक क्वारंटाइन लीव मिलेगी। विवाद और मुकदमों पर ब्रेक, पर प्रोफेसरों के अधिकारों में कटौती
लोकभवन का यह नया ड्राफ्ट यूनिवर्सिटी प्रशासन में पारदर्शिता लाने और हाईकोर्ट का बोझ घटाने की दिशा में बड़ा कदम है। बीपीएससी और बीएसएससी के जरिए बहाली होने से नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा रुकेगा और योग्य अफसर मिलेंगे। हालांकि, कोर्ट जाने का रास्ता बंद होने से कर्मचारियों में असंतोष पनप सकता है। वहीं पेटेंट का अधिकार छिनने से प्रोफेसरों के नए रिसर्च और इनोवेशन के प्रति उत्साह में कमी आने की आशंका है।
Source link
लोकभवन ने भेजा 43 पन्नों का ड्राफ्ट स्टैच्यूट:विश्वविद्यालय शिक्षकों-कर्मियों का कोर्ट जाने का हक छिना, ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम
