2027 के यूपी चुनाव के लिए अखिलेश यादव ‘PDA रथयात्रा’ शुरू कर चुके हैं। रायबरेली को एक दिन के ट्रायल रन के लिए चुना। चुनाव से पहले किन जिलों में रथयात्रा होगी, इसका शेड्यूल सपा ने अभी जारी नहीं किया है।
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सवाल उठा कि कांग्रेस के गढ़ को ही क्यों टारगेट किया? जवाब मिला- उनका फोकस पूरे अवध क्षेत्र पर है। दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने रायबरेली की 6 में से 4 सीटों पर जीत हासिल कर अवध क्षेत्र में अपना दबदबा बनाया था। लेकिन, 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के 3 कद्दावर विधायकों- मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह ने पार्टी से बगावत कर दी।
अखिलेश ने रायबरेली से अपनी रथयात्रा के जरिए भीड़ जुटाकर बागी नेताओं को संदेश दिया कि पाला बदलने से सपा का वोटबैंक और जनाधार खिसकने वाला नहीं है। हालांकि, रायबरेली में चुनावी सरगर्मी बढ़ाने के पीछे कुल 5 सियासी कारण माने जा रहे हैं। आइए, एक-एक करके समझते हैं…

अखिलेश यादव ने ‘X’ पर यह वीडियो शेयर किया है। लिखा- हमारे रंग बढ़ रहे हैं, इसीलिए भाजपा के रंग उड़ रहे हैं।
1. सीट शेयरिंग में खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस रायबरेली की एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। 6 में से 4 सीटें सपा के खाते में गईं, जबकि 2 सीटें भाजपा के पाले में गई थीं।
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं- गांधी परिवार के गढ़ में अपनी ताकत का प्रदर्शन करके सपा गठबंधन की मेज पर खुद का पलड़ा भारी रखना चाहती है। गठबंधन नियम के मुताबिक, सिटिंग विधायक वाली सीट पर दावा छोड़ना आसान नहीं होता।
ऐसे में चर्चा यह भी है कि रायबरेली की कुछ सीटों पर सिंबल कांग्रेस का हो और प्रत्याशी सपा का, ऐसा फॉर्मूला भी सामने आ सकता है। इसलिए अखिलेश सीट शेयरिंग में नेशनल पार्टी के सामने खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
2. अवध से पूरे यूपी में माहौल बनाया
पूर्वांचल के बाद अवध क्षेत्र में दलित, ओबीसी और मुस्लिम वोटरों का मजबूत प्रभाव है। यहां रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव और लखनऊ की विधानसभा सीटों पर पासी, लोधी, यादव और कुर्मी समाज का दबदबा माना जाता है।
अखिलेश यादव अवध क्षेत्र को अपने ‘PDA मॉडल’ का मुख्य टेस्ट सेंटर बना रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने अवध के कई जिलों में अच्छा प्रदर्शन किया था। अब 2027 के लिए पार्टी का पूरा फोकस इसी बेल्ट पर है। जिससे अवध से मिलने वाली बढ़त के जरिए पूरे प्रदेश में अपनी हवा बनाई जा सके।

रथयात्रा के बाद अखिलेश ने कहा- PDA के लोगों ने अपनी ताकत का अहसास कर लिया है। इस बार न झुकेंगे, न पीछे हटेंगे।
3. बागी विधायकों को हराने की प्लानिंग
रायबरेली के ऊंचाहार से 3 बार सपा के टिकट पर जीते और पार्टी के मुख्य सचेतक रहे मनोज पांडे, अमेठी जिले की गौरीगंज सीट से लगातार 3 बार सपा के विधायक रहे राकेश प्रताप सिंह और अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट से सपा के बाहुबली विधायक अभय सिंह भाजपा में जा चुके हैं। 24 सितंबर को अखिलेश ने बागी विधायकों को लेकर कहा- जो भागेगा, वह हारेगा।
राजनीतिक जानकार मानते हैं- सपा अवध क्षेत्र की इन सीटों को किसी भी हाल में नहीं खोना चाहती। अखिलेश इसलिए खुद जनता के बीच पहुंच रहे हैं। वह बागी नेताओं को संदेश देना चाहते हैं कि सपा अब भी अवध क्षेत्र में काफी मजबूत है।
4. सपा कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहने का संदेश
17 सितंबर को रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्रसभा और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ था। हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी ने पुलिस पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया था। इस पर यूपी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा था कि सपा के लोग अधिकारियों से अभद्रता करते हैं।
अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस घटना को ‘PDA पर प्रहार’ बताया। तभी से सपा-भाजपा नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। इस बीच PDA रथयात्रा के दौरान अखिलेश ने रायबरेली पहुंचकर उन कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।

5. पिछली यात्राओं की तरह भारी भीड़ जुटाई
अखिलेश यादव के पूरे राजनीतिक करियर में ये उनकी 5वीं बड़ी रथयात्रा है। सपा की सियासत में ‘रथयात्रा’ को हमेशा अखिलेश के लिए ‘लकी चार्म’ माना जाता रहा है। चाहे वह 2012 में पूर्ण बहुमत दिलाने वाली ‘समाजवादी क्रांति रथ यात्रा’ हो या फिर 2021 की ‘विजय रथ यात्रा’।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछले चुनाव में भी अखिलेश की यात्रा को रायबरेली और लखनऊ रूट पर जबरदस्त जनसमर्थन मिला था। रात 2 बजे तक भीड़ जुटने के कारण पार्टी का मनोबल काफी बढ़ा था। सपा नेतृत्व एक बार फिर उसी सकारात्मक माहौल के साथ अपने 2027 के अभियान की शुरुआत करना चाहता है।

कांग्रेस बोली- गठबंधन को नुकसान नहीं, हमारे गढ़ में अखिलेश का स्वागत
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं- पिछड़े, दलित, आदिवासी, महिला, नौजवान, किसान और अल्पसंख्यकों के लिए जो भी काम कर रहा है, कांग्रेस उसका स्वागत करती है। सपा-कांग्रेस दोनों का लक्ष्य भाजपा के शासन का अंत करना है। सुरेंद्र सिंह के मुताबिक, सीट शेयरिंग को लेकर अभी कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

सपा का हर विधानसभा में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य
सपा सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हर विधानसभा में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य दिया। इसके लिए बाकायदा ‘समाजवादी स्वाभिमान एप’ के जरिए बूथ स्तर पर लोगों को जोड़ा जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य उन वोटबैंक पर है, जिन्होंने 2022 या 2024 के चुनाव में अपना वोट नहीं डाला था।
इस एप के जरिए बूथ स्तर पर ऐसे परिवारों को चिह्नित कर, मतदान वाले दिन उन्हें वोट डलवाने तक की जिम्मेदारी अभी से दी जा रही है। मतदान वाले दिन पार्टी के कंट्रोल रूम से इसकी मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

सपा राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव ने कहा- अखिलेश का रथ बहुत जल्द गोरखपुर और वाराणसी भी जाएगा। भाजपा के हर किले को भेदकर आएगा।
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