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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गमाडा के 6,400 करोड़ रुपए की रकम को लेकर पंजाब सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या किसी विशेष उद्देश्य के लिए रखी जाने वाली इस रकम को राज्य की संचित निधि में शामिल कर सामान्य बजट घाटा पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। मामला जस्किरत सिंह व अन्य की जनहित याचिका से जुड़ा है। हाईकोर्ट में इस याचिका के साथ गमाडा के प्रस्तावित 15 हजार करोड़ रुपए के कर्ज का मुद्दा भी उठाया गया है। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को विशेष हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना कानून की धारा 10(3) के तहत गमाडा को कुल कितनी राशि जमा कराना जरूरी है और 6,400 करोड़ रुपए को सामान्य घाटा पूरा करने के लिए संचित निधि में शामिल किया जा सकता है या नहीं। अकाउंटेंट जनरल ने रकम की उपयोग पर उठाए सवाल याचिका में 3 जून को अकाउंटेंट जनरल की ओर से भेजे गए पत्र का हवाला दिया गया है। इसमें गमाडा की ओर से राज्य के खजाने में जमा कराए गए 6,400 करोड़ रुपए की लेखा व्यवस्था और रकम के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह रकम सामान्य राजस्व के तौर पर नहीं, बल्कि विशेष उद्देश्य के लिए रखी जानी थी। अकाउंटेंट जनरल के अनुसार, कानून के तहत बहु-फसली सिंचित जमीन के अधिग्रहण की स्थिति में खाद्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए बंजर जमीन को खेती योग्य बनाने या अधिग्रहित जमीन के मूल्य के बराबर रकम कृषि क्षेत्र में निवेश करने का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा पर 94,443 करोड़ खर्च किए पंजाब सरकार ने जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया है। सरकार की ओर से कहा गया कि 2013 में कानून लागू होने के बाद पंजाब ने खाद्य सुरक्षा बढ़ाने पर 94,443 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। सरकार के अनुसार, ऐसे में 6,400 करोड़ रुपए को संचित निधि में शामिल कर सामान्य बजट घाटा पूरा करने में इस्तेमाल करने में कोई अनियमितता नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल याचिका की स्वीकार्यता का सवाल खुला रखा है और सरकार से विशेष हलफनामा मांगा है। 15 हजार करोड़ कर्ज पर मांगा हिसाब याचिका में गमाडा के एयरोसिटी/एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित 15 हजार करोड़ रुपए के कर्ज पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, पहले करीब 2,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हुआ। अब परियोजना के लिए 15 हजार करोड़ रुपए जुटाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। कोर्ट के सामने यह सवाल भी उठाया गया कि 15 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की व्यवस्था करने के लिए एक निजी संस्था को करीब 191 करोड़ रुपए का भुगतान क्यों किया जाना प्रस्तावित है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में भी पंजाब सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। पंजाब के वित्तीय घाटे का भी याचिका में जिक्र याचिका में पंजाब के 2026-27 के बजट का हवाला देते हुए 21,955 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे और 39,971 करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने गमाडा की रकम को सामान्य सरकारी खर्च में इस्तेमाल करने पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पंजाब सरकार को यह स्पष्ट करने को कहा है कि 6,400 करोड़ रुपए की रकम किस प्रावधान के तहत जमा की गई और क्या इसे सामान्य बजट घाटा पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
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गमाडा के 6,400 करोड़ पर हाईकोर्ट सख्त:पंजाब से मांगा जवाब, 15 हजार करोड़ के कर्ज और 191 करोड़ फीस पर भी मांगा स्पष्टीकरण
