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तरनतारन के पट्टी ब्लॉक में आत्मा योजना के तहत किसानों को फसलों में लगने वाले कीड़े और बीमारियों की पहचान के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही किसानों को इसके बचाव के बारे में भी बताया गया। किसानों को कम खर्च में खेती करने और पर्यावरण को ध्यान में रखकर फसलों को उगाने को लेकर प्रोत्साहित किया गया। शुक्रवार को पन्नू वर्मी कम्पोस्ट फार्म, लौहका में वर्मी कम्पोस्ट फार्म स्कूल के चौथा और आखिरी सत्र किसानों को यह जानकारी दी गई। यह सत्र मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. तेजबीर सिंह के निर्देश पर डॉ. भूपिंदर सिंह, ब्लॉक कृषि अधिकारी की देखरेख में हुआ। वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की सेहत सुधारने में सक्षम इस मौके पर डॉ. भूपिंदर सिंह ने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट के फायदे, इसे बनाने का तरीका और सही इस्तेमाल के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की सेहत सुधारने और अच्छी खेती के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने किसानों को खेती की नई तकनीकों को अपनाने और जैविक चीजों का सही इस्तेमाल करने को कहा। डॉ. परमिंदर कौर, ए.डी.ओ. प्लांट प्रोटेक्शन ने फसलों में लगने वाले कीड़े और बीमारियों की पहचान, उनकी रोकथाम और पौधों को बचाने के तरीके बताए। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट यूनिट लगाने के लिए सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी भी दी। प्रगतिशील किसान तरसेम सिंह ने वर्मी कम्पोस्ट बनाने का अपना अनुभव किसानों के साथ बांटा। कम खर्च में अधिक उत्पादन के दिए मंत्र सत्र खत्म होने पर फार्म स्कूल में हिस्सा लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र, सब्जियों के बीज की किट और वर्मी कम्पोस्ट के पैकेट दिए गए। इस दौरान किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती का खर्च कम करने और पर्यावरण बचाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट समेत जैविक चीजों का सही इस्तेमाल करने और खेती की वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। गुरदेव सिंह मानकपुरा, गुरदेव सिंह कृषि सहायक प्रबंधक, कृषि उप निरीक्षक निशान सिंह और इलाके के किसानों ने इस सत्र को सफल बनाने में मदद की। किसानों को 29 सितंबर को भट्ठल फार्म, नौशहरा पन्नूआं में होने वाले जिला स्तरीय किसान ट्रेनिंग कैंप में ज्यादा संख्या में आने का न्योता भी दिया गया।
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तरनतारन- किसानों ने सीखे कम खर्च में बेहतर उत्पादन:वर्मी कम्पोस्ट और बीज किट बांटे गए; वैज्ञानिक कृषि तकनीकों पर जोर
