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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा आमजन की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रदेश के शहरी निकायों में गठित की गई 1646 वार्ड समितियों के अस्तित्व पर बड़ा कानूनी और संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील और नगर-निकाय कानूनों के जानकार हेमंत कुमार ने प्रदेश की सभी 87 नगर पालिकाओं/निकायों में गठित इन वार्ड कमेटियों को गैर-कानूनी और असंवैधानिक करार देते हुए हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त, सचिव और महानिदेशक को कानूनी नोटिस भेजा है। अब जानिए, विवाद के 3 बड़े कारण… केवल नगर निगमों को मिल सकती है राहत एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार, यदि राज्य सरकार विधानसभा में संशोधन लाकर 2008 के कानून की धारा 2(G) में ‘नगर निगमों’ को शामिल कर ले और 1994 के कानून की धारा 10 में संशोधन करके गठन का अधिकार निगम सदनों को दे दे, तो केवल 11 नगर निगमों की वार्ड कमेटियों को कानूनी वैधता मिल सकती है। लेकिन प्रदेश की 76 नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में बनी कमेटियों को राज्य सरकार संशोधन करके भी वैध नहीं ठहरा सकती, क्योंकि संविधान का 3 लाख की आबादी वाला नियम राज्य के किसी भी कानून से ऊपर है। यदि सरकार ने इन कमेटियों को रद्द नहीं किया, तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
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हरियाणा में बिना अधिकार गठित 1646 शहरी वार्ड कमेटियां:हाईकोर्ट एडवोकेट ने सरकार को भेजा कानूनी नोटिस, त्वरित समाधान के लिए बनाईं
