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नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में शनिवार को सुबह 7 बजे से विश्व फिजियोथेरेपी एसोसिएशन की एशिया-पैसिफिक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। इसमें दुनिया भर से 10 हजार से अधिक फिजियोथेरेपिस्ट और विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान आईजीआईएमएस पटना के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रत्नेश चौधरी ने फिजियोथेरेपी को स्वतंत्र सिस्टम ऑफ मेडिसिन का दर्जा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा है, इसलिए इसकी भूमिका और अधिकारों के लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। डॉ. चौधरी ने आम लोगों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के नियमों में बदलाव की भी मांग की। उन्होंने पूछा कि जब फिजियोथेरेपिस्ट खिलाड़ियों की फिटनेस जांच कर सकते हैं, तो आम नागरिकों के प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए उन्हें अधिकृत क्यों नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्वस्थ भारत के लिए सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं, आम नागरिकों की फिटनेस पर भी ध्यान देना होगा। इसमें फिजियोथेरेपिस्ट की विशेषज्ञता का व्यापक उपयोग हो सकता है। 50 देशों के विशेषज्ञों ने पेश किए 1853 से अधिक वैज्ञानिक पेपर कॉन्फ्रेंस में फिजियोथेरेपी और पुनर्वास चिकित्सा से जुड़े विभिन्न विषयों पर दुनिया भर के विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। आयोजकों के अनुसार, 50 से अधिक देशों के विशेषज्ञों ने 1853 से ज्यादा वैज्ञानिक पेपर प्रस्तुत किए। इनमें फिजियोथेरेपी की नई तकनीक, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी, रिहैबिलिटेशन, फिटनेस, योग और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विषय शामिल हैं। कॉन्फ्रेंस में 10 हजार से अधिक डेलीगेट्स की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर बताया गया। जो अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड हैं। आयोजकों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की मौजूदगी ने इसे विश्व स्तर पर फिजियोथेरेपी क्षेत्र के बड़े आयोजनों में शामिल कर दिया है और इसके लिए विश्व रिकॉर्ड बनने की बात कही गई। विश्व और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों से मिले डॉ. चौधरी कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. रत्नेश चौधरी ने वर्ल्ड फिजियोथेरेपी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. माइक लाउंड्री (कनाडा) से मुलाकात की। उन्होंने फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में भारत में हो रहे काम और पेशे से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने नेशनल हेल्थ एंड अलाइड हेल्थ काउंसिल की पहली राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. यगना शुक्ला सहित अन्य विशेषज्ञों से भी मुलाकात की। इस दौरान फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में पेशेवर विकास, स्वास्थ्य व्यवस्था में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बिहार से सैकड़ों डॉक्टर और विद्यार्थी पहुंचे अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में बिहार से भी बड़ी संख्या में फिजियोथेरेपिस्ट, डॉक्टर और विद्यार्थी शामिल हुए। बिहार से डॉ. अविनाश, डॉ. अखिलेश सहित सैकड़ों प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। प्रतिनिधियों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में हिस्सा लेकर देश-विदेश के विशेषज्ञों से फिजियोथेरेपी की आधुनिक तकनीकों और उपचार पद्धतियों की जानकारी ली। कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों का जोर इस बात पर रहा कि बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच फिजियोथेरेपी की भूमिका केवल बीमारी के बाद पुनर्वास तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। फिटनेस, बीमारी से बचाव, खेलों में प्रदर्शन और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में भी फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका को व्यापक बनाया जा सकता है।
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'फिजियोथेरेपी को सिस्टम ऑफ मेडिसिन का दर्जा मिले':विश्व कॉन्फ्रेंस में डॉ. रत्नेश ने उठाई मांग, लोगों के फिटनेस सर्टिफिकेट भी जारी करने की कही बात
