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बठिंडा में ट्रांसपोर्ट कंपनी के पूर्व मैनेजर विश्वनाथ (47) के अपहरण और हत्या की जांच में उसके अपने मोबाइल की रिकॉर्डिंग अहम कड़ी बनी है। परिवार के मुताबिक, 20 अगस्त की रात घर से निकलते वक्त विश्वनाथ को शायद अनहोनी का अंदेशा हो गया था, इसलिए उसने मोबाइल का कैमरा ऑन कर फोन शर्ट की जेब में रख लिया। अंधेरा होने के कारण वीडियो में चेहरे साफ नहीं आए, लेकिन बाइक को टक्कर मारने, उसके गिरने और बाद में उसे जबरन कार में ले जाने से जुड़ी आवाजें रिकॉर्ड हो गईं। 31 अगस्त को उसका शव मिलने के बाद इसी रिकॉर्डिंग ने पुलिस की अपहरण की जांच में मदद की। उधर, पुलिस का कहना है कि इसी रिकॉर्डिंग से केस में कड़ियां जोड़ी गईं और हम एक आरोपी तक पहुंचे और जल्द बाकी भी गिरफ्तार किए जाएंगे। पहले जानिए पूरा मामला क्या है… 4 अगस्त को नौकरी छोड़ी, कंपनी मालिक से विवाद का दावा दरअसल, बठिंडा के बाबा फरीद नगर में परिवार के साथ रहने वाला विश्वनाथ न्यू गुरु काशी ट्रांसपोर्ट कंपनी में मैनेजर था। परिवार का आरोप है कि कंपनी के मालिक लखविंदर सिंह उस पर बही-खातों में गलत या फर्जी एंट्री करने का दबाव बना रहे थे। विश्वनाथ ने इसका विरोध किया और 4 अगस्त को नौकरी छोड़ दी। परिजनों के अनुसार, इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और रंजिश बढ़ गई थी। हालांकि, इस विवाद का हत्या से सीधा संबंध था या नहीं, यह अभी पुलिस जांच का हिस्सा है। 18 अगस्त को प्रिंस का फोन, अस्पताल बुलाने की बात परिवार के मुताबिक, 18 अगस्त को कंपनी के एक कर्मचारी प्रिंस कुमार ने विश्वनाथ को फोन किया। उसने बताया कि उसके पिता ग्रोथ सेंटर स्थित कैंसर अस्पताल में भर्ती हैं और विश्वनाथ से जरूरी बातचीत करनी है। पत्नी नेहा के अनुसार, विश्वनाथ मदद के लिए 10 हजार रुपए लेकर गया था, लेकिन कुछ समय बाद घर लौट आया। उसने बताया कि प्रिंस उससे मिला ही नहीं। 20 अगस्त को दोबारा फोन आया, घर से निकलने के बाद लापता 20 अगस्त को प्रिंस ने फिर विश्वनाथ को फोन किया। इसके बाद विश्वनाथ घर से यह कहकर निकला कि उसे प्रिंस से जरूरी बात करनी है। परिवार के मुताबिक, इसी दौरान उसे किसी अनहोनी की आशंका थी, इसलिए उसने मोबाइल कैमरा चालू कर फोन शर्ट की जेब में रख लिया। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। रिकॉर्डिंग में टक्कर के बाद जबरन ले जाने की आवाजें परिवार के अनुसार, मोबाइल रिकॉर्डिंग में पहले बाइक को टक्कर लगने और विश्वनाथ के गिरने की आवाजें सुनाई देती हैं। इसके बाद उसे उठाने और कार में डालकर ले जाने जैसी गतिविधियों की आवाजें रिकॉर्ड हुईं। रात के अंधेरे के कारण रिकॉर्डिंग में किसी आरोपी का चेहरा साफ नहीं है। परिजनों का दावा है कि विश्वनाथ बाइक समेत झाड़ियों में गिरा था और इसके बाद उसे वहां से उठाकर ले जाया गया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस ने नहीं की। 23 अगस्त को अज्ञात पर केस, 31 को ड्रेन में मिला शव विश्वनाथ के घर नहीं लौटने पर परिवार ने तलाश शुरू की। पत्नी नेहा के मुताबिक, 23 अगस्त को पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति या लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। परिवार का कहना है कि उन्होंने पहले ही कुछ संदिग्ध लोगों के बारे में पुलिस को जानकारी दी थी। 31 अगस्त को जीवन सिंह वाला के पास लसाड़ा ड्रेन से एक शव मिलने की सूचना मिली। परिवार ने मौके पर पहुंचकर उसकी पहचान विश्वनाथ के रूप में की। परिजनों के मुताबिक, उसके हाथ-पैर रस्सियों से बंधे थे। इसके बाद गुमशुदगी का मामला हत्या की जांच में बदल गया। 1 सितंबर को छह लोगों पर हत्या-अपहरण का केस शव मिलने और जांच में सामने आए साक्ष्यों के बाद पुलिस ने 1 सितंबर को छह लोगों को नामजद किया। इनमें ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक लखविंदर सिंह के अलावा बलजिंदर सिंह, अरुण, दमनप्रीत सिंह, अंशदीप सिंह और प्रिंस कुमार शामिल हैं। पुलिस ने हत्या, अपहरण, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। इनमें प्रिंस कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी पांच नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पत्नी बोली-25 दिन में 20 से ज्यादा बार पुलिस के चक्कर लगाए नेहा का आरोप है कि एफआईआर के बाद भी बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। उनके मुताबिक, पिछले करीब 25 दिनों में वह 20 से ज्यादा बार थानों और पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा चुकी हैं। उन्होंने एसएचओ, डीएसपी, एसएसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों से मुलाकात कर गिरफ्तारी की मांग की। नेहा का कहना है कि हर बार पुलिस की टीमें गठित करने और छापेमारी का आश्वासन मिला, लेकिन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। अब जानिए वीडियो में क्या रिकॉर्ड हुआ… विश्वनाथ मोबाइल का कैमरा ऑन करके जाते हुए दिखाई दे रहा है। कुछ देर बाद पीछे से उसे मारने की आवाजें आती हैं। विश्वनाथ की आवाज सुनाई देती है- “मुझे क्यों मार रहे हो… मसला क्या है?” इसके जवाब में आरोपी कहते सुनाई देते हैं कि “बता देंगे।” इसके बाद उसे गाड़ी में डालने की बात कही जाती है। पूरी घटना के दौरान रात का अंधेरा होने से आरोपियों के चेहरे साफ नजर नहीं आते, लेकिन बातचीत और घटनाक्रम की आवाजें रिकॉर्ड हो गईं। पत्नी बोलीं-आरोपी खुलेआम काम कैसे कर रहे? पत्नी नेहा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नामजद आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है तो कुछ आरोपी अपने दफ्तर और दुकानें सामान्य रूप से कैसे चला रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार को अब आश्वासन नहीं, बल्कि आरोपियों की गिरफ्तारी और हत्या की पूरी सच्चाई सामने आने का इंतजार है। एसएसपी ऑफिस के बाहर आमरण अनशन की चेतावनी नेहा ने पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह पूरे परिवार के साथ एसएसपी कार्यालय के बाहर आमरण भूख हड़ताल शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि विश्वनाथ को इंसाफ मिलने तक परिवार का संघर्ष जारी रहेगा। पुलिस का दावा-आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश डीएसपी देहाती हरविंदर सरां ने बताया कि प्रिंस कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस उनके मोबाइल फोन की लोकेशन भी ट्रेस करने की कोशिश कर रही है। डीएसपी के मुताबिक, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।
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मोबाइल रिकॉर्डिंग से खुला किडनैपिंग-हत्याकांड का राज:बठिंडा में पूर्व मैनेजर को अनहोनी का शक था, कैमरा ऑन करके निकला; जबरन कार में बिठाते आवाजें रिकॉर्ड
