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जसोलधाम में भाद्रपद शुक्ल पक्ष के 15 दिनों में 4,20,941 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह संख्या पिछले साल से 34.11 प्रतिशत ज्यादा है। इस दौरान 44,398 वाहन पार्किंग में दर्ज हुए और 50,460 श्रद्धालुओं ने भोजन-प्रसादी ग्रहण की।
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पिछले साल की तुलना में ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे
श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में 12 से 26 सितंबर तक चले इस आयोजन में देश-प्रदेश से श्रद्धालु पहुंचे। पिछले साल की तुलना में इस बार 1,07,063 ज्यादा श्रद्धालु आए। दर्शनार्थियों की संख्या में 34.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
बढ़ी हुई भीड़ को देखते हुए संस्थान ने दर्शन, पार्किंग, भोजन, पानी और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए थे। पूरे शुक्ल पक्ष में हर दिन रात में जागरण और विशेष धार्मिक कार्यक्रम हुए। संस्थान अध्यक्ष रावल श्री किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में ये सभी आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से पूरे हुए।
राणीसा भटियाणीसा जन्मोत्सव एवं धर्मध्वजारोहण से बढ़ी उत्सव की भव्यता
भाद्रपद शुक्ल पक्ष के दौरान श्री राणीसा भटियाणीसा का जन्मोत्सव श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं रात्रि जागरण आयोजित हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जसोलधाम पहुंचकर माँ माजीसा के दर्शन किए और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की।
इसी अवधि में विधि-विधान एवं माँ माजीसा के जयकारों के बीच धर्मध्वजारोहण किया गया। धार्मिक आयोजनों के साथ पारंपरिक गैर नृत्य, ढोल-थाली एवं नगाड़ों की प्रस्तुतियां, घोड़ा नृत्य तथा पुष्कर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। विभिन्न अवसरों पर आतिशबाजी ने धार्मिक उत्सव की भव्यता को और बढ़ाया। धार्मिक आस्था एवं लोक संस्कृति के इस समागम ने पूरे आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
पार्किंग व्यवस्थाओं में 44,398 वाहन दर्ज
श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए संस्थान की पार्किंग एवं संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग में निःशुल्क पार्किंग व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। भाद्रपद शुक्ल पक्ष के 15 दिवसों में दोनों पार्किंग व्यवस्थाओं में कुल 44,398 वाहन दर्ज किए गए। पार्किंग क्षेत्रों में वाहनों को निर्धारित स्थानों पर खड़ा करवाने एवं श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन के लिए संबंधित टीमें तैनात रहीं।
इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में श्रद्धालु बसों, सार्वजनिक परिवहन एवं अन्य यात्री परिवहन साधनों से बस स्टैंड की ओर से जसोलधाम पहुंचे। पार्किंग क्षेत्र एवं बस स्टैंड—दोनों दिशाओं से श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुविधाएं एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया।
श्रद्धालुओं की बढ़ी संख्या को देखते हुए 23 से 25 सितम्बर तक संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग में निःशुल्क भोजन-प्रसादी की विशेष व्यवस्था भी संचालित की गई।
छोटे बच्चों के साथ आए श्रद्धालुओं एवं वृद्धजनों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था
इस वर्ष श्रद्धालु सुविधा की दृष्टि से एक विशेष नवाचार किया गया। छोटे बच्चों के साथ दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं तथा वृद्धावस्था के कारण लंबी कतार में अधिक समय तक खड़े रहने में असमर्थ श्रद्धालुओं को निर्धारित सीधी कतार के माध्यम से सहज दर्शन की सुविधा प्रदान की गई।
इस व्यवस्था के माध्यम से उन्हें लंबी जिग-जैग कतार में प्रतीक्षा करने से राहत मिली और छोटे बच्चों, वृद्धजनों एवं उनके साथ आए परिजनों को सुविधापूर्वक दर्शन का अवसर मिला। विशेष भीड़ वाले दिवसों में यह व्यवस्था अत्यंत उपयोगी रही।
दोनों ओर फुटवियर स्टैंड एवं दिशा-सूचक व्यवस्था
पार्किंग क्षेत्र एवं बस स्टैंड—दोनों दिशाओं से मंदिर की ओर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए फुटवियर स्टैंड उपलब्ध रहे। श्रद्धालु निर्धारित स्थानों पर अपने जूते-चप्पल रखकर दर्शन मार्ग की ओर आगे बढ़े।
विभिन्न दिशाओं से आने वाले श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन के लिए प्रमुख स्थानों पर दिशा-सूचक एवं सूचना संकेतक लगाए गए। इनके माध्यम से दर्शन मार्ग, प्रसाद क्षेत्र, भोजनशाला, पेयजल, पार्किंग, धर्मशाला, प्रवेश-निकास एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
प्रसाद क्षेत्र एवं टोकन प्रणाली की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसाद क्षेत्र को सुव्यवस्थित किया गया तथा प्रसाद रखने के लिए टोकन प्रणाली की व्यवस्था संचालित रही। श्रद्धालु निर्धारित स्थान पर प्रसाद जमा कर टोकन प्राप्त करते और दर्शन के बाद निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अपना प्रसाद प्राप्त करते रहे। इससे विशेष भीड़ वाले दिवसों में भी प्रसाद रखने एवं वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया क्रमबद्ध और सुचारु बनी रही।
जिग-जैग कतार, मिस्टिंग सिस्टम एवं छायादार व्यवस्था
दर्शनार्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए जिग-जैग कतार प्रणाली संचालित की गई। निर्धारित दर्शन मार्ग से श्रद्धालुओं को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया गया, जिससे विशेष भीड़ वाले दिवसों में भी दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रही।
कतार एवं प्रतीक्षा क्षेत्रों में मिस्टिंग सिस्टम तथा छायादार टेंट की व्यवस्था की गई, जिससे दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं को धूप एवं गर्मी से राहत मिली।
फुट ओवरब्रिज से सुरक्षित एवं सुगम पैदल आवागमन
श्रद्धालुओं के सुरक्षित एवं सुगम पैदल आवागमन में फुट ओवरब्रिज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दर्शन के बाद मंदिर के निकासी द्वार से पार्किंग एवं धर्मशाला परिसर की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं तथा पार्किंग एवं धर्मशाला क्षेत्र से बस स्टैंड की दिशा में जाने वाले श्रद्धालुओं ने फुट ओवरब्रिज का उपयोग किया।
इससे मंदिर के निकासी द्वार, पार्किंग, धर्मशाला परिसर एवं बस स्टैंड के बीच पैदल श्रद्धालुओं का आवागमन सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बना रहा। विशेष भीड़ वाले दिवसों में फुट ओवरब्रिज श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित रखने में उपयोगी रहा।
सीसीटीवी निगरानी एवं पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम
मंदिर परिसर, दर्शन मार्ग, कतार क्षेत्र, प्रवेश-निकास एवं प्रमुख आवागमन स्थलों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी रखी गई। भीड़ की स्थिति एवं श्रद्धालुओं के आवागमन पर सतत नजर रखते हुए आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्थाओं में समन्वय किया गया।
पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को दर्शन, सुरक्षा, मार्गदर्शन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित सूचनाएं समय-समय पर उपलब्ध कराई गईं।
पेयजल, व्हीलचेयर एवं गोल्फ कार्ट की सुविधा
प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध एवं शीतल पेयजल की व्यवस्था उपलब्ध रही। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजन एवं चलने में असुविधा वाले श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर तथा व्हीलचेयर अनुकूल आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
इसके साथ आवश्यकता वाले श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए गोल्फ कार्ट का संचालन किया गया, जिससे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों एवं विशेष आवश्यकता वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिली।
50,460 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया माँ का प्रसाद
भाद्रपद शुक्ल पक्ष के 15 दिवसों के दौरान संस्थान की भोजनशाला एवं निःशुल्क भोजन-प्रसादी व्यवस्था के माध्यम से कुल 50,460 श्रद्धालुओं ने माँ का प्रसाद ग्रहण किया। भोजन-प्रसादी की व्यवस्था प्रतिदिन सुव्यवस्थित रूप से संचालित रही।
श्रद्धालुओं की बढ़ी संख्या को देखते हुए 23 से 25 सितम्बर तक संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग में भी निःशुल्क भोजन-प्रसादी की विशेष व्यवस्था संचालित की गई, जिससे पार्किंग क्षेत्र में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को वहीं माँ का प्रसाद ग्रहण करने की सुविधा मिली।
दूर-दराज क्षेत्रों से जसोलधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए संस्थान द्वारा ठहरने की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। ठहराव स्थलों पर स्वच्छता, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
सामूहिक सेवा एवं समन्वय से सफल हुआ आयोजन — रावल किशन सिंह जसोल
संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि माँ माजीसा के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के फलस्वरूप इस वर्ष दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 15 दिवसों में 4.20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जसोलधाम पहुंचना माँ माजीसा के प्रति जन-जन की अगाध श्रद्धा एवं विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बीच धार्मिक आयोजनों एवं श्रद्धालु सुविधाओं का शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित संचालन सामूहिक सेवा एवं बेहतर समन्वय से संभव हुआ। मंदिर संस्थान, पुलिस एवं प्रशासन, ट्रस्ट सदस्यों, कर्मचारियों, सुरक्षा कार्मिकों, सेवाभावी कार्यकर्ताओं, भोजनशाला एवं प्रसाद सेवा से जुड़े सेवाभावियों, पार्किंग टीम, सफाईकर्मियों, स्वयंसेवकों तथा लाभार्थी परिवारों ने अपने-अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रावल किशन सिंह जसोल ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए देश-विदेश से जसोलधाम पधारे श्रद्धालुओं द्वारा व्यवस्थाओं में बनाए रखे गए अनुशासन एवं सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।
सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन में तकनीक और समन्वय रहा प्रभावी — कर्नल शंभू सिंह देवड़ा
संस्थान के ट्रस्टी एवं सुरक्षा समिति अध्यक्ष कर्नल शंभू सिंह देवड़ा ने कहा कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पूरे शुक्ल पक्ष में सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन को विशेष प्राथमिकता दी गई। पार्किंग एवं बस स्टैंड की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रवाह, प्रवेश-निकास, जिग-जैग कतार, दर्शन मार्ग तथा फुट ओवरब्रिज सहित प्रमुख क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था रखी गई।
उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से प्रमुख क्षेत्रों की सतत निगरानी तथा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से समयानुसार सूचनाओं के प्रसारण ने भीड़ प्रबंधन को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष भीड़ वाले दिवसों में श्रद्धालुओं के प्रवाह के अनुरूप सुरक्षा कार्मिकों की तैनाती एवं व्यवस्थाओं में आवश्यक परिवर्तन किए गए। संस्थान की सुरक्षा टीम एवं पुलिस के बीच समन्वय से दर्शन एवं सुरक्षा व्यवस्था सुचारु बनी रही।
पिछले साल की तुलना में ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे
श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में 12 से 26 सितंबर तक चले इस आयोजन में देश-प्रदेश से श्रद्धालु पहुंचे। पिछले साल की तुलना में इस बार 1,07,063 ज्यादा श्रद्धालु आए। दर्शनार्थियों की संख्या में 34.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
बढ़ी हुई भीड़ को देखते हुए संस्थान ने दर्शन, पार्किंग, भोजन, पानी और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए थे। पूरे शुक्ल पक्ष में हर दिन रात में जागरण और विशेष धार्मिक कार्यक्रम हुए। संस्थान अध्यक्ष रावल श्री किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में ये सभी आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से पूरे हुए।
राणीसा भटियाणीसा जन्मोत्सव एवं धर्मध्वजारोहण से बढ़ी उत्सव की भव्यता
भाद्रपद शुक्ल पक्ष के दौरान श्री राणीसा भटियाणीसा का जन्मोत्सव श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं रात्रि जागरण आयोजित हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जसोलधाम पहुंचकर माँ माजीसा के दर्शन किए और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की।
इसी अवधि में विधि-विधान एवं माँ माजीसा के जयकारों के बीच धर्मध्वजारोहण किया गया। धार्मिक आयोजनों के साथ पारंपरिक गैर नृत्य, ढोल-थाली एवं नगाड़ों की प्रस्तुतियां, घोड़ा नृत्य तथा पुष्कर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। विभिन्न अवसरों पर आतिशबाजी ने धार्मिक उत्सव की भव्यता को और बढ़ाया। धार्मिक आस्था एवं लोक संस्कृति के इस समागम ने पूरे आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
पार्किंग व्यवस्थाओं में 44,398 वाहन दर्ज
श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए संस्थान की पार्किंग एवं संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग में निःशुल्क पार्किंग व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। भाद्रपद शुक्ल पक्ष के 15 दिवसों में दोनों पार्किंग व्यवस्थाओं में कुल 44,398 वाहन दर्ज किए गए। पार्किंग क्षेत्रों में वाहनों को निर्धारित स्थानों पर खड़ा करवाने एवं श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन के लिए संबंधित टीमें तैनात रहीं।
इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में श्रद्धालु बसों, सार्वजनिक परिवहन एवं अन्य यात्री परिवहन साधनों से बस स्टैंड की ओर से जसोलधाम पहुंचे। पार्किंग क्षेत्र एवं बस स्टैंड—दोनों दिशाओं से श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुविधाएं एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया।
श्रद्धालुओं की बढ़ी संख्या को देखते हुए 23 से 25 सितम्बर तक संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग में निःशुल्क भोजन-प्रसादी की विशेष व्यवस्था भी संचालित की गई।
छोटे बच्चों के साथ आए श्रद्धालुओं एवं वृद्धजनों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था
इस वर्ष श्रद्धालु सुविधा की दृष्टि से एक विशेष नवाचार किया गया। छोटे बच्चों के साथ दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं तथा वृद्धावस्था के कारण लंबी कतार में अधिक समय तक खड़े रहने में असमर्थ श्रद्धालुओं को निर्धारित सीधी कतार के माध्यम से सहज दर्शन की सुविधा प्रदान की गई।
इस व्यवस्था के माध्यम से उन्हें लंबी जिग-जैग कतार में प्रतीक्षा करने से राहत मिली और छोटे बच्चों, वृद्धजनों एवं उनके साथ आए परिजनों को सुविधापूर्वक दर्शन का अवसर मिला। विशेष भीड़ वाले दिवसों में यह व्यवस्था अत्यंत उपयोगी रही।
दोनों ओर फुटवियर स्टैंड एवं दिशा-सूचक व्यवस्था
पार्किंग क्षेत्र एवं बस स्टैंड—दोनों दिशाओं से मंदिर की ओर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए फुटवियर स्टैंड उपलब्ध रहे। श्रद्धालु निर्धारित स्थानों पर अपने जूते-चप्पल रखकर दर्शन मार्ग की ओर आगे बढ़े।
विभिन्न दिशाओं से आने वाले श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन के लिए प्रमुख स्थानों पर दिशा-सूचक एवं सूचना संकेतक लगाए गए। इनके माध्यम से दर्शन मार्ग, प्रसाद क्षेत्र, भोजनशाला, पेयजल, पार्किंग, धर्मशाला, प्रवेश-निकास एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
प्रसाद क्षेत्र एवं टोकन प्रणाली की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसाद क्षेत्र को सुव्यवस्थित किया गया तथा प्रसाद रखने के लिए टोकन प्रणाली की व्यवस्था संचालित रही। श्रद्धालु निर्धारित स्थान पर प्रसाद जमा कर टोकन प्राप्त करते और दर्शन के बाद निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अपना प्रसाद प्राप्त करते रहे। इससे विशेष भीड़ वाले दिवसों में भी प्रसाद रखने एवं वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया क्रमबद्ध और सुचारु बनी रही।
जिग-जैग कतार, मिस्टिंग सिस्टम एवं छायादार व्यवस्था
दर्शनार्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए जिग-जैग कतार प्रणाली संचालित की गई। निर्धारित दर्शन मार्ग से श्रद्धालुओं को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया गया, जिससे विशेष भीड़ वाले दिवसों में भी दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रही।
कतार एवं प्रतीक्षा क्षेत्रों में मिस्टिंग सिस्टम तथा छायादार टेंट की व्यवस्था की गई, जिससे दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं को धूप एवं गर्मी से राहत मिली।
फुट ओवरब्रिज से सुरक्षित एवं सुगम पैदल आवागमन
श्रद्धालुओं के सुरक्षित एवं सुगम पैदल आवागमन में फुट ओवरब्रिज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दर्शन के बाद मंदिर के निकासी द्वार से पार्किंग एवं धर्मशाला परिसर की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं तथा पार्किंग एवं धर्मशाला क्षेत्र से बस स्टैंड की दिशा में जाने वाले श्रद्धालुओं ने फुट ओवरब्रिज का उपयोग किया।
इससे मंदिर के निकासी द्वार, पार्किंग, धर्मशाला परिसर एवं बस स्टैंड के बीच पैदल श्रद्धालुओं का आवागमन सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बना रहा। विशेष भीड़ वाले दिवसों में फुट ओवरब्रिज श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित रखने में उपयोगी रहा।
सीसीटीवी निगरानी एवं पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम
मंदिर परिसर, दर्शन मार्ग, कतार क्षेत्र, प्रवेश-निकास एवं प्रमुख आवागमन स्थलों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निरंतर निगरानी रखी गई। भीड़ की स्थिति एवं श्रद्धालुओं के आवागमन पर सतत नजर रखते हुए आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्थाओं में समन्वय किया गया।
पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को दर्शन, सुरक्षा, मार्गदर्शन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित सूचनाएं समय-समय पर उपलब्ध कराई गईं।
पेयजल, व्हीलचेयर एवं गोल्फ कार्ट की सुविधा
प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध एवं शीतल पेयजल की व्यवस्था उपलब्ध रही। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजन एवं चलने में असुविधा वाले श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर तथा व्हीलचेयर अनुकूल आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
इसके साथ आवश्यकता वाले श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए गोल्फ कार्ट का संचालन किया गया, जिससे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों एवं विशेष आवश्यकता वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिली।
50,460 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया माँ का प्रसाद
भाद्रपद शुक्ल पक्ष के 15 दिवसों के दौरान संस्थान की भोजनशाला एवं निःशुल्क भोजन-प्रसादी व्यवस्था के माध्यम से कुल 50,460 श्रद्धालुओं ने माँ का प्रसाद ग्रहण किया। भोजन-प्रसादी की व्यवस्था प्रतिदिन सुव्यवस्थित रूप से संचालित रही।
श्रद्धालुओं की बढ़ी संख्या को देखते हुए 23 से 25 सितम्बर तक संस्थान द्वारा विकसित रिवर फ्रंट पार्किंग में भी निःशुल्क भोजन-प्रसादी की विशेष व्यवस्था संचालित की गई, जिससे पार्किंग क्षेत्र में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को वहीं माँ का प्रसाद ग्रहण करने की सुविधा मिली।
दूर-दराज क्षेत्रों से जसोलधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए संस्थान द्वारा ठहरने की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। ठहराव स्थलों पर स्वच्छता, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
सामूहिक सेवा एवं समन्वय से सफल हुआ आयोजन-रावल किशन सिंह जसोल
संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि माँ माजीसा के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के फलस्वरूप इस वर्ष दर्शनार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। 15 दिवसों में 4.20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जसोलधाम पहुंचना माँ माजीसा के प्रति जन-जन की अगाध श्रद्धा एवं विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बीच धार्मिक आयोजनों एवं श्रद्धालु सुविधाओं का शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित संचालन सामूहिक सेवा एवं बेहतर समन्वय से संभव हुआ। मंदिर संस्थान, पुलिस एवं प्रशासन, ट्रस्ट सदस्यों, कर्मचारियों, सुरक्षा कार्मिकों, सेवाभावी कार्यकर्ताओं, भोजनशाला एवं प्रसाद सेवा से जुड़े सेवाभावियों, पार्किंग टीम, सफाईकर्मियों, स्वयंसेवकों तथा लाभार्थी परिवारों ने अपने-अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रावल किशन सिंह जसोल ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए देश-विदेश से जसोलधाम पधारे श्रद्धालुओं द्वारा व्यवस्थाओं में बनाए रखे गए अनुशासन एवं सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।
सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन में तकनीक और समन्वय रहा प्रभावी-कर्नल शंभू सिंह देवड़ा
संस्थान के ट्रस्टी एवं सुरक्षा समिति अध्यक्ष कर्नल शंभू सिंह देवड़ा ने कहा कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पूरे शुक्ल पक्ष में सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन को विशेष प्राथमिकता दी गई। पार्किंग एवं बस स्टैंड की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रवाह, प्रवेश-निकास, जिग-जैग कतार, दर्शन मार्ग तथा फुट ओवरब्रिज सहित प्रमुख क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था रखी गई।
उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से प्रमुख क्षेत्रों की सतत निगरानी तथा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से समयानुसार सूचनाओं के प्रसारण ने भीड़ प्रबंधन को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष भीड़ वाले दिवसों में श्रद्धालुओं के प्रवाह के अनुरूप सुरक्षा कार्मिकों की तैनाती एवं व्यवस्थाओं में आवश्यक परिवर्तन किए गए। संस्थान की सुरक्षा टीम एवं पुलिस के बीच समन्वय से दर्शन एवं सुरक्षा व्यवस्था सुचारु बनी रही।
श्रद्धालु केंद्रित व्यवस्थाओं एवं नवाचार पर रहा विशेष ध्यान-कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल
संस्थान के प्रवक्ता कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि गत वर्ष की तुलना में दर्शनार्थियों की संख्या में 34.11 प्रतिशत वृद्धि के बावजूद संस्थान का प्रमुख उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु को सहज, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित दर्शन सुविधा उपलब्ध कराना रहा।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं में विशेष नवाचार किया गया। छोटे बच्चों के साथ आए परिवारों एवं वृद्धजनों के लिए निर्धारित सीधी कतार के माध्यम से दर्शन की सुविधा इसी सोच का हिस्सा रही। पार्किंग एवं बस स्टैंड दोनों दिशाओं में फुटवियर स्टैंड, दिशा-सूचक एवं सूचना संकेतक, सुव्यवस्थित प्रसाद क्षेत्र एवं टोकन प्रणाली, जिग-जैग कतार, मिस्टिंग सिस्टम, छायादार व्यवस्था, फुट ओवरब्रिज, शुद्ध एवं शीतल पेयजल, व्हीलचेयर एवं गोल्फ कार्ट जैसी सुविधाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं के आगमन से लेकर दर्शन एवं निकास तक की व्यवस्था को सहज बनाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या के अनुरूप संस्थान द्वारा श्रद्धालु सुविधाओं को और अधिक बेहतर, सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा के साथ आवश्यकतानुसार उनमें सुधार एवं विस्तार किया जा रहा है, ताकि जसोलधाम आने वाले श्रद्धालुओं को सहज दर्शन के साथ बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि जागरण, श्री राणीसा भटियाणीसा जन्मोत्सव, धर्मध्वजारोहण, विशेष धार्मिक अनुष्ठान तथा विभिन्न अवसरों पर लाभार्थी परिवारों द्वारा भोजन-प्रसादी, छप्पन भोग एवं फल-प्रसाद की सेवाओं के साथ 15 दिवसीय धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच 4,20,941 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, पार्किंग व्यवस्थाओं में 44,398 वाहन दर्ज हुए तथा 50,460 श्रद्धालुओं ने माँ का प्रसाद ग्रहण किया। संस्थान की व्यापक श्रद्धालु सुविधाओं, सुरक्षा एवं सेवा से जुड़ी टीमों की तत्परता और श्रद्धालुओं के अनुशासन एवं सहयोग से संपूर्ण आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ
संस्थान के प्रवक्ता कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि गत वर्ष की तुलना में दर्शनार्थियों की संख्या में 34.11 प्रतिशत वृद्धि के बावजूद संस्थान का प्रमुख उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु को सहज, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित दर्शन सुविधा उपलब्ध कराना रहा।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं में विशेष नवाचार किया गया। छोटे बच्चों के साथ आए परिवारों एवं वृद्धजनों के लिए निर्धारित सीधी कतार के माध्यम से दर्शन की सुविधा इसी सोच का हिस्सा रही। पार्किंग एवं बस स्टैंड दोनों दिशाओं में फुटवियर स्टैंड, दिशा-सूचक एवं सूचना संकेतक, सुव्यवस्थित प्रसाद क्षेत्र एवं टोकन प्रणाली, जिग-जैग कतार, मिस्टिंग सिस्टम, छायादार व्यवस्था, फुट ओवरब्रिज, शुद्ध एवं शीतल पेयजल, व्हीलचेयर एवं गोल्फ कार्ट जैसी सुविधाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं के आगमन से लेकर दर्शन एवं निकास तक की व्यवस्था को सहज बनाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या के अनुरूप संस्थान द्वारा श्रद्धालु सुविधाओं को और अधिक बेहतर, सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा के साथ आवश्यकतानुसार उनमें सुधार एवं विस्तार किया जा रहा है, ताकि जसोलधाम आने वाले श्रद्धालुओं को सहज दर्शन के साथ बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
छप्पन भोग लगाया
भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से पूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि जागरण, श्री राणीसा भटियाणीसा जन्मोत्सव, धर्मध्वजारोहण, विशेष धार्मिक अनुष्ठान तथा विभिन्न अवसरों पर लाभार्थी परिवारों द्वारा भोजन-प्रसादी, छप्पन भोग एवं फल-प्रसाद की सेवाओं के साथ 15 दिवसीय धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच 4,20,941 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, पार्किंग व्यवस्थाओं में 44,398 वाहन दर्ज हुए तथा 50,460 श्रद्धालुओं ने माँ का प्रसाद ग्रहण किया। संस्थान की व्यापक श्रद्धालु सुविधाओं, सुरक्षा एवं सेवा से जुड़ी टीमों की तत्परता और श्रद्धालुओं के अनुशासन एवं सहयोग से संपूर्ण आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ
