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सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और एक युवक के बीच फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रही है। करीब-करीब पूरी बातचीत में चौबारा गांव में हुए विवाद के बाद समझौते और आरोपियों को जेल से बाहर लाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। बातचीत के दौरान मामला स्थानीय प्रशासन तक पहुंचता है और एक एसडीएम को लेकर भी सांसद की टिप्पणी सामने आती है। वायरल हो रही रिकॉर्डिंग में फोन करने वाला युवक खुद को ‘कारी साहब का बड़ा भाई’ बताता है। वो सांसद से बातचीत करते हुए इस बात पर नाराजगी जताता है कि समझौते के लिए वे मौके पर नहीं आए। बातचीत में चौबारा गांव में हुए झगड़े और उसके बाद एक पक्ष के लोगों के जेल जाने की बात कही जाती है। पहले जेल से बाहर लाने की बात रिकॉर्डिंग के अनुसार, युवक सांसद से मामले में समझौता कराने के लिए आगे आने की बात करता है। इसके जवाब में इमरान मसूद कहते हैं कि पहले लड़कों को जेल से बाहर आने दो, तब बात करेंगे। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच बातचीत का स्वर लगातार तीखा होता जाता है। फोन करने वाला युवक सांसद से ये सवाल भी करता है कि जब वे क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं तो इस मामले में गरीब परिवार की मदद क्यों नहीं हो रही है। बातचीत में वो खुद को सांसद का समर्थक और उन्हें अपना प्रतिनिधि बताते हुए गरीब लोगों की आवाज संसद में उठाने की बात कहता सुनाई देता है। गरीब आदमी को दबाने का आरोप रिकॉर्डिंग में दूसरा युवक सांसद पर गरीब व्यक्ति को दबाने का आरोप लगाता है। वो कहता है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते सांसद को दोनों पक्षों की बात सुननी चाहिए और मामले में न्यायपूर्ण तरीके से हस्तक्षेप करना चाहिए। इस पर इमरान मसूद ये कहते सुनाई देते हैं कि वो किसी की तरफदारी नहीं कर रहे हैं। बातचीत यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। एसडीएम को लेकर भी हुई चर्चा वायरल ऑडियो में बातचीत के दौरान प्रशासनिक अधिकारी का मुद्दा भी सामने आता है। इसमें इमरान मसूद के हवाले से कथित तौर पर कहा जा रहा है कि एसडीएम उनका फोन नहीं उठा रहा है और वह उसका ‘इलाज’ करेंगे। इस पर सामने वाला युवक सांसद को चेतावनी देता है कि यदि सरकार बदल गई तो कहीं उनका ही ‘इलाज’ न हो जाए। इसके जवाब में इमरान मसूद की ओर से सवाल किया जाता है कि उनका क्या इलाज होगा। इस हिस्से के सामने आने के बाद रिकॉर्डिंग को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। हालांकि, रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और इसकी आवाज की प्रमाणिकता को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। बातचीत में जाति और संख्या का भी जिक्र बहस आगे बढ़ने पर बातचीत जातीय समीकरण और लोगों की संख्या तक पहुंच जाती है। दोनों के बीच क्षेत्र में किस पक्ष की कितनी संख्या है और सामाजिक समीकरण क्या हैं, इस तरह के मुद्दों का भी संदर्भ आता है। यही वजह है कि वायरल ऑडियो को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा और बढ़ गई है। हालांकि, रिकॉर्डिंग के संदर्भ और उसमें कही गई बातों की वास्तविक पृष्ठभूमि की पुष्टि संबंधित पक्षों या प्रशासन की आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। पढ़िए…क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि मामला थाना फतेहपुर क्षेत्र के चौबारा गांव का है। यहां दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। झगड़े के बाद पुलिस कार्रवाई में एक पक्ष के कुछ लोगों को जेल भेजे जाने की बात सामने आई है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मामले को समझौते के जरिए खत्म कराने की चर्चा चल रही थी। इसी समझौते से जुड़ी बातचीत के दौरान सांसद इमरान मसूद और एक व्यक्ति के बीच फोन पर कथित रूप से बहस हुई। वायरल रिकॉर्डिंग को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। सांसद ने बातचीत पर टिप्पणी से किया इनकार मामले को लेकर सांसद इमरान मसूद से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में बातचीत करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं है। ऐसे में फिलहाल वायरल ऑडियो में किए जा रहे दावों और सांसद की प्रतिक्रिया के बीच स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रिकॉर्डिंग में कही गई बातों की पुष्टि भी नहीं हुई है। पुलिस या प्रशासन की ओर से भी इस रिकॉर्डिंग को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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सहारनपुर में सांसद इमरान मसूद की फोन रिकॉर्डिंग वायरल:चौबारा गांव के झगड़े में फैसले को लेकर बहस, बोले;एसडीएम का इलाज करुंगा, जो फोन नहीं उठाता
