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चंडीगढ़ पुलिस जवान ने फतह की अबी गामिन चोटी:शिखर पर तिरंगा फहराया; बर्फीले तूफानों के बीच पहुंचे; यूटी से पहुंचने वाले पहले




चंडीगढ़ पुलिस के पर्वतारोही और एवरेस्ट समिटियर सचिन कुमार ने 7,355 मीटर ऊंची माउंट अबी गामिन पर तिरंगा फहराया। सचिन 17 सितंबर 2026 की सुबह कठिन मौसम और बर्फीली परिस्थितियों के बीच सफलतापूर्वक चोटी पर पहुंचे। उनके अनुसार, वह यूनियन टेरिटरी से अबी गामिन फतह करने वाले पहले पुलिस जवान हैं। सचिन माउंट कामेट (7,756 मीटर) और अबी गामिन के संयुक्त अभियान पर निकले थे। 14 सितंबर के बाद मौसम खराब होने से कामेट का रास्ता तय समय पर नहीं खुल सका। तेज हवाओं और भारी बर्फबारी के चलते टीम को कामेट का अभियान रोकना पड़ा। इसके बाद परिस्थितियों का आकलन कर टीम ने अबी गामिन की ओर रुख किया और 17 सितंबर की सुबह शिखर पर पहुंचने में सफलता हासिल की। ग्लेशियर, क्रेवास और बर्फीली ढलानों के बीच चढ़ाई
अबी गामिन गढ़वाल हिमालय में भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित चुनौतीपूर्ण पर्वत है। अभियान के दौरान टीम को ग्लेशियर, बर्फीली ढलानों, मोरेन और क्रेवास से होकर गुजरना पड़ा। अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और कम ऑक्सीजन ने भी चढ़ाई को मुश्किल बनाया। अभियान क्षेत्र में आईटीबीपी, इंडो-अर्जेंटीना आर्मी टीम और इंडियन आर्मी आर्टिलरी टीम भी मौजूद थीं। संवेदनशील सीमा क्षेत्र होने के कारण यहां अभियान की चुनौती और बढ़ गई थी। एवरेस्ट के बाद ल्होत्से और अबी गामिन
सचिन ने अभियान से पहले मोरनी हिल्स के तेजा ट्रैक पर नियमित ट्रेनिंग की थी। लंबी दूरी तक पैदल चलने, कठिन चढ़ाई और शरीर की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्होंने यहां अभ्यास किया। सचिन के अनुसार, मोरनी की पहाड़ियों में की गई तैयारी का फायदा हिमालय में चढ़ाई के दौरान मिला। कई चोटियों पर तिरंगा फहरा चुके हैं
सचिन कुमार इससे पहले 22 मई 2024 को माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) और 25 मई 2024 को माउंट ल्होत्से (8,516 मीटर) फतह कर चुके हैं। वह 20 से अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी और अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण अभियानों में हिस्सा ले चुके हैं। 6 हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाली कई चोटियों पर तिरंगा फहरा चुके हैं। वर्तमान में सचिन चंडीगढ़ पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं। पुलिस में 15 साल से अधिक की सेवा के साथ वह पर्वतारोहण में भी लगातार सक्रिय हैं। दिवंगत पर्वतारोहियों को समर्पित की सफलता
सचिन ने अबी गामिन की सफलता को पर्वतारोहण के दौरान जान गंवाने वाले पर्वतारोहियों की स्मृति को समर्पित किया। उन्होंने दिवंगत राकेश बिश्नोई, नितिश कुमार दहिया, Nims Dai टीम, अमरीश त्यागी और जयराज सिंह समेत अन्य पर्वतारोहियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण सिर्फ शिखर तक पहुंचने का प्रयास नहीं, बल्कि उन पर्वतारोहियों के साहस और याद को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है, जिन्होंने पहाड़ों पर अपने प्राण गंवाए। परिवार और साथियों का जताया आभार
सचिन ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, दोस्तों, टीम के सदस्यों और शुभचिंतकों के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि हजारों फीट की ऊंचाई पर जब पर्वतारोही मुश्किल परिस्थितियों से जूझता है, तब परिवार उसकी सुरक्षित वापसी के लिए इंतजार करता है। उनके मुताबिक, अबी गामिन की सफलता अकेले उनकी उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार और सहयोगियों के विश्वास का परिणाम है। अभियान के सफल समापन के बाद इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (IMF) के फ्लैग-इन कार्यक्रम के साथ अभियान का औपचारिक समापन किया जाएगा।



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