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15 मिनट पहले
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हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स में पढ़ रहे देश के हर 10 में से लगभग 1 यानी 9% स्टूडेंट्स को आत्महत्या का विचार आता है। ये जानकारी मिली है सुप्रीम कोर्ट की टास्क फोर्स सर्वे रिपोर्ट में।
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों में मानसिक सेहत से जुड़ी चिंताओं की जांच करने के लिए इस टास्क फोर्स का गठन किया था। देशव्यापी सर्वे के अनुसार, पिछले एक साल में 9%स्टूडेंट्स ने सुसाइड का ख्याल बार-बार आने की बात कही। इनमें से लगभग 15% ने बताया कि वे बीते 6 महीनों के दौरान लंबे समय तक डिप्रेशन, एंग्जायटी या उदासी से गुजरे हैं।
ये टास्क फोर्स 31 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट को अपनी फाइनल रिपोर्ट दे सकती है।
2.43 लाख से ज्यादा छात्रों के बीच हुआ सर्वे
इस सर्वे में 2.43 लाख से ज्यादा छात्रों ने जवाब दिया। सर्वे से पता चला कि लगभग 34% छात्रों को अपने ही कैंपस में कई बार आउटसाइडर फील हुआ। इनमें लगभग 67% स्टूडेंट्स SC, ST और OBC कैटेगरी के हैं।
9% छात्रों को कई बार आया सुसाइड का ख्याल
इस रिजल्ट से इंस्टीट्यूट से संबंधित आंकड़े भी सामने आए, जहां 56% छात्रों ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि उनका प्रशासन गंभीर मामलों को सही तरीके से संभाल लेगा। वहीं लगभग 32% छात्रों ने कहा कि उनके कॉलेज में काउंसलिंग नहीं होती है।

टास्क फोर्स ने 19 संस्थानों में 30 मीटिंग की
पढ़ाई का दबाव, नौकरी को लेकर अनिश्चितता और करियर चुनने से जुड़ी चिंताएं छात्रों के बीच आम समस्याएं बनकर सामने आईं। हालांकि, टास्क फोर्स के अनुसार इस सर्वे के रिजल्ट को शुरुआती माना जाना चाहिए, क्योंकि इससे सभी छात्रों की मानसिक स्थित को बयां नहीं किया जा सकता।
टास्क फोर्स ने अपने असेसमेंट के तहत कई कॉलेजों का दौरा भी किया है। साथ ही छात्रों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत भी की। अब तक NTF ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम और पश्चिम बंगाल में 19 संस्थानों में 30 मीटिंग की हैं। जिन संस्थानों का दौरा किया गया, वे अलग-अलग विषयों और उच्च शिक्षा संस्थानों को रिप्रजेंट करते थे।
मेडिकल स्टूडेंट्स क्लीनिकल ओवरलोड से परेशान
रिपोर्ट के अनुसार, स्टूडेंट्स ने अटेंडेंस के सख्त नियम, शेड्यूल्स की डिमांड और पढ़ाई के दबाव के साथ ही क्लीनिकल ओवरलोड को अपने तनाव की वजह बताया।
मेडिकल छात्रों ने कॉल करके ड्यूटीज पर बुलाने और शिफ्ट के टाइम से ज्यादा काम करवाने की बात कही। वहीं इंजीनियरिंग संस्थाओं ने ग्रेडिंग सिस्टम और प्लेसमेंट क्राइटेरिया से संबंधित दिक्कतें बताईं।

PhD छात्रों ने सुपरवाइजर के लापरवाह होने की बात कही
डेंटल, नर्सिंग और मेंटल हेल्थ एजुकेशन इंस्टीट्यूट के छात्रों ने बताया कि उन्हें पर्याप्त प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं मिली, जिससे वे खुद को प्रोफेशनल प्रैक्टिस के लिए पूरी तरह तैयार नहीं मानते। पीएचडी छात्रों ने सुपरवाइजर के लापरवाह, बहुत ज्यादा कंट्रोल करने वाले या शोषण को लेकर नाराजगी जताई।
टास्क फोर्स की अंतरिम रिपोर्ट में NEET UG, JEE रैंक में जातिगत भेदभाव के साथ-साथ धर्म और जाति के नाम पर एडमिशन, ग्रेडिंग, लैंग्वेज और फैकल्टी सपोर्ट के दौरान किए जाने वाले अपमान और भेदभाव की बात भी सामने आई।
ये सर्वे छात्रों पर उस समय किया गया जब हाल ही में IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे के छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इस समय छात्रों की मेंटल हेल्थ और सपोर्ट सिस्टम एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के लिए देशभर में चर्चा का विषय है।

सुप्रीम कोर्ट ने किया टास्क फोर्स का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की मेंटल हेल्थ और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र आत्महत्याओं की रोकथाम के लिए 24 मार्च 2025 को नेशनल टास्क फोर्स का (NTF) का गठन किया था। इसका काम उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र आत्महत्याओं के कारणों की पहचान और उसे रोकने के लिए अपने सुझाव देना है। इस टास्क फोर्स के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस रविंद्र भट्ट हैं।
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