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औरंगाबाद में आवास योजना की सूची पर सवाल:योग्य लाभुक बाहर तो अयोग्य के नाम शामिल होने का आरोप, फाइनल सूची जारी होते ही उठे सवाल




औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में आवास योजना की फाइनल सूची जारी होने के बाद बड़े पैमाने पर अनियमितता और अवैध उगाही के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सूची में कई ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं, जो योजना के पात्र नहीं हैं, जबकि जरूरतमंद और योग्य परिवार सूची से बाहर हैं। इसे लेकर प्रखंड क्षेत्र में नाराजगी बढ़ रही है। बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर बीडीओ के समक्ष शिकायत दर्ज करा रहे हैं। ग्राम पंचायत घेउरा के करकट्टा गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने आवेदन देकर वार्ड सदस्य प्रतिनिधि दिलीप कुमार सिंह पर आवास योजना में नाम जोड़ने का प्रलोभन देकर पैसे लेने का आरोप लगाया है। चमेली देवी, गुड्डन देवी, लालो देवी, प्रभा देवी, शकुंतला देवी, मीना देवी, नीलम कुमारी, रेणु देवी, फुलवंती देवी, उर्मिला देवी, संगीता देवी, रीमा देवी और संध्या देवी समेत कई महिलाओं का आरोप है कि नाम जोड़ने के लिए उनसे 2 हजार से 6 हजार रुपये तक लिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि पैसे देने के बावजूद फाइनल सूची में उनका नाम नहीं आया। पैसे वापस मांगने पर कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। हालांकि वार्ड सदस्य प्रतिनिधि के बेटे ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया है। पैसे देने के बाद भी नाम नहीं आया, कार्रवाई की मांग करकट्टा गांव की महिलाओं का कहना है कि उन्होंने आवास योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार पैसे दिए थे। उनका आरोप है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि राशि देने के बाद आवास योजना की सूची में नाम जुड़ जाएगा। लेकिन सूची जारी होने के बाद जब नाम नहीं मिला तो उन्होंने संबंधित व्यक्ति से रकम वापस करने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, रकम वापस मांगने पर उन्हें कथित तौर पर यह कहकर लौटा दिया गया कि जहां शिकायत करनी है कर दें, पैसे वापस नहीं किए जाएंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ को लिखित शिकायत दी। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद उन्हें अगली सूची में नाम जोड़ने का आश्वासन देकर वापस भेज दिया गया, लेकिन कथित तौर पर पैसे लेने के आरोपों की जांच या संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि अवैध वसूली के आरोपों की जांच नहीं हुई तो ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ेगा। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी से भी शिकायत करने की बात कही है। गरीबों का आरोप- हर बार सूची में नाम, लेकिन लाभ से वंचित ग्राम पंचायत परता के महावीर गंज के ग्रामीणों ने भी आवास योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिंकी देवी, रीता देवी, संगीता देवी, छोटू कुमार और डोमन कुमार का कहना है कि वे मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनका आरोप है कि कई वर्षों से उनका नाम आवास योजना की सूची में आता रहा है, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिल पाया। ग्रामीणों का कहना है कि सूची प्रकाशित होने के बाद बिचौलियों के माध्यम से पैसे की मांग की जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे मांगी गई रकम नहीं दे पाते। उनका आरोप है कि इसके बाद उनका नाम लाभुकों की सूची से हटा दिया जाता है। गरीब परिवारों में कथित बिचौलियों को लेकर डर का माहौल होने की बात भी सामने आई है। कुछ ग्रामीण मीडिया के सामने खुलकर नाम लेने से बचते हैं। उनका कहना है कि नाम उजागर करने पर विवाद या मारपीट का डर बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए योजना चला रही है, लेकिन यदि पात्र लाभुकों से पैसे मांगे जाते हैं तो योजना का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित होता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि ऐसा मामला केवल कुटुंबा प्रखंड के घेउरा और परता में ही नहीं है। कामोबेश पुरे जिले में ही आवास योजना की सूची तैयार करने में व्यापक गड़बड़ी की गई है।यही कारण है कि कई पंचायत में आम सभा के दौरान ग्रामीणों के द्वारा हंगामा किए जाने की सूचना मिल है। रिसियप पंचायत में भी आम सभा के दौरान ग्रामीणों ने आवास योजना में गड़बड़ी की शिकायत को लेकर हंगामा किया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। फाइनल सूची के बाद रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे मांगने का आरोप ग्रामीणों के अनुसार फाइनल सूची जारी होने के बाद अब रजिस्ट्रेशन के नाम पर भी कथित अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। महाराजगंज, वर्मा गेवरा और सूही पंचायत के कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिचौलियों द्वारा लाभुकों के घर पहुंचकर 2500 से 5000 रुपये तक की मांग की जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक कथित तौर पर उन्हें बताया जा रहा है कि फाइनल सूची में नाम आ चुका है, लेकिन राशि का भुगतान तभी होगा जब रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर पैसे दिए जाएंगे। पैसे नहीं देने पर सूची से नाम हटाने की बात कहे जाने का भी आरोप है। इन आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल आवास योजना की सूची की पारदर्शिता और पात्रता जांच को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि फाइनल सूची का दोबारा सत्यापन कराया जाए और पात्र परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर योजना का लाभ दिया जाए। साथ ही आवास योजना में पैसे मांगने या लेने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से आरोपों को निराधार बताया गया है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



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