Headlines

India Rafale Fighter Jet Deal Update


3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना आगे बढ़ रही है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट इस वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। अभी कंपनियों की ओर से मिले प्रस्तावों का औपचारिक मूल्यांकन किया जा रहा है।

भारत इस डील में स्वदेशीकरण का स्तर बढ़ाना चाहता है। योजना के तहत बड़ी संख्या में राफेल विमान भारत में असेंबल किए जाएंगे। साथ ही उनमें भारत में तैयार हथियार और सिस्टम लगाए जाएंगे।

डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि फ्रांस की कंपनी पहले खरीदे गए राफेल मरीन विमानों में भी भारतीय हथियार लगाने पर सहमत हो चुकी है। नई खरीद में भारतीय तकनीक के इस्तेमाल को और बढ़ाने की योजना है।

राफेल खरीद का तरीका

यह खरीद ‘बाय एंड मेक’ मॉडल के तहत होगी। इसके तहत विमान बनाने वाली कंपनी के साथ भारत में असेंबली और उत्पादन से जुड़ा काम भी किया जाएगा। भारतीय सिस्टम और हथियारों को राफेल में जोड़ने पर भी काम होगा।

रक्षा मंत्रालय की ओर से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद खरीद प्रक्रिया के अगले चरण शुरू होंगे। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, इस साल के अंत तक इस पूरी प्रक्रिया में कोई निष्कर्ष निकल सकता है।

राफेल मरीन में भारतीय हथियार

भारत पहले ही राफेल मरीन विमानों की खरीद कर चुका है। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, फ्रांसीसी कंपनी इन विमानों में भी भारतीय हथियारों को शामिल करने पर सहमत है।

इससे भारत को राफेल के अलग-अलग वर्जन में अपने हथियार और सिस्टम जोड़ने का अनुभव मिलेगा। नई खरीद में इसी तरह के स्वदेशी सिस्टम का इस्तेमाल और बढ़ाने की योजना है।

तेजस Mk2 की पहली उड़ान अगले साल

डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि एलसीए Mk2 यानी तेजस Mk2 की पहली उड़ान अगले साल के मध्य में होने की योजना है। पहले प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे और फिर भारतीय वायुसेना उनका परीक्षण करेगी।

वायुसेना ने शुरुआती तौर पर करीब 120 तेजस Mk2 विमानों की जरूरत बताई थी। हालांकि, कितने विमान लिए जाएंगे, इसका अंतिम फैसला प्रोटोटाइप के परीक्षण और मूल्यांकन के बाद होगा।

HAL के साथ निजी कंपनियों की भागीदारी

तेजस Mk2 को विकसित करने में HAL मुख्य भूमिका में रहेगा। विमान को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा और जरूरत के हिसाब से इसमें नए बदलाव और अपग्रेड किए जाएंगे।

इस काम में निजी कंपनियों और MSME सेक्टर की भी भागीदारी होगी। निजी कंपनियां सब-असेंबली के साथ फ्यूजलेज जैसे बड़े हिस्से बनाने में मदद कर रही हैं। कुछ कंपोनेंट्स के लिए निजी क्षेत्र की प्रोडक्शन लाइन का इस्तेमाल भी शुरू हो गया है।

AMCA पर भारत का फोकस

भारत ने फिलहाल किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, भारत का अपना AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम आगे बढ़ रहा है।

AMCA के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए वेंडर्स से RFP मांगे गए हैं। वेंडर्स ने प्रोजेक्ट की जटिलता और इस क्षेत्र में पहली बार काम करने की वजह से अतिरिक्त समय मांगा है। सरकार उन्हें और समय देने जा रही है।

डिफेंस सेक्रेटरी ने कहा कि फिलहाल भारत का मुख्य फोकस AMCA प्रोग्राम पर है और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए इसी स्वदेशी परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *