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मधेपुरा के एक निजी अस्पताल में महिला की बच्चेदानी का ऑपरेशन कर 5 किलो का ट्यूमर (गांठ) निकाला गया। कुमारखंड के हरिबोला गांव की कुमारी रूपा (40) पिछले 10 साल से पेट दर्द से परेशान थीं। इस दौरान पटना, पूर्णिया और दरभंगा समेत कई जगहों पर इलाज कराया गया। दो बार ऑपरेशन भी हो चुका था, लेकिन समस्या से राहत नहीं मिली। पटना में इलाज के दौरान डॉक्टर ने महिला को कैंसर होने की बात भी बताई गई थी। महिला के पति चेतन आनंद ने बताया कि उनकी पत्नी रूपा लंबे समय से पेट दर्द से परेशान थीं। कई जगह इलाज कराने के बाद भी समस्या बनी रही। इसके बाद उन्होंने मधेपुरा के श्यामा मेमोरियल हॉस्पिटल में डॉ. कुंदन सुमन से संपर्क किया। आवश्यक जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। बच्चेदानी में बना 45 गांठ का एक गोला डॉ. कुंदन सुमन ने बताया कि महिला की बच्चेदानी में काफी बड़ी गांठ थी। गांठ के कारण बच्चेदानी का आकार असामान्य रूप से बढ़ गया था, जो पेट के बड़े हिस्से को घेर लिया था। बच्चेदानी में करीब 40-45 गांठ का एक गोला बन गया था। मामला जटिल था, इसलिए ऑपरेशन के दौरान विशेष सावधानी बरती गई। करीब चार घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद बच्चेदानी को बाहर निकाला गया। डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन सफल रहा। मरीज की स्थिति अभी अच्छी है। ऑपरेशन के बाद वह तेजी से रिकवर कर रही है। पेट दर्द की समस्या में भी राहत मिली है। निकाले गए ट्यूमर का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद गांठ की प्रकृति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। कैंसर की आशंका होने पर ऑपरेशन जरूरी डॉ. सुमन ने बताया कि बच्चेदानी निकालने का निर्णय केवल उम्र के आधार पर नहीं लिया जाता। यदि बच्चेदानी में गंभीर बीमारी, बड़ा ट्यूमर या कैंसर की आशंका हो तो मरीज की स्थिति के अनुसार ऑपरेशन जरूरी हो सकता है। वहीं, सामान्य या छोटी-मोटी समस्याओं में पहले दवाओं और अन्य उपचार से समस्या दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना गंभीर मेडिकल कारण के कम उम्र में बच्चेदानी निकालने से बचना चाहिए। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. कुंदन सुमन के अलावा एनेस्थेटिक डॉ. अभय कुमार, ओटी असिस्टेंट सत्येंद्र कुमार, दिवाकर, अंशु, कालीचरण, संतोष आदि शामिल रहे।
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मधेपुरा में महिला के पेट से निकला 5KG का ट्यूमर:10 साल से झेल रही थी दर्द, छाती तक बढ़ गया था यूट्रस का आकार; 4 घंटे चला ऑपरेशन
