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Chhattisgarh High Court Dismisses Plea of 15 Doctors for Study Leave


बिलासपुर21 मिनट पहले

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शासन के आदेश का हवाला देकर डॉक्टरों ने लगाई थी याचिकाएं। - Dainik Bhaskar

शासन के आदेश का हवाला देकर डॉक्टरों ने लगाई थी याचिकाएं।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने स्टडी लीव बढ़ाने की मांग करने वाले 15 डॉक्टरों की याचिकाएं खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि 3 मार्च 2025 के बाद स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने किए जाने का फायदा उन डॉक्टरों को नहीं मिलेगा, जिन्होंने इससे पहले ही 24 महीने की स्टडी लीव मंजूर कराकर उसका लाभ ले लिया था।

दरअसल स्वास्थ्य-परिवार कल्याण विभाग में काम करने वाले डॉ. भूमिका देवांगन, डॉ. सरिता मौर्या, डॉ. सुनीति जेम्स समेत 15 डॉक्टरों ने पीजी मेडिकल की पढ़ाई के लिए विभाग से अनुमति और एनओसी ली थी। इसके बाद उन्हें 24 महीने की स्टडी लीव मिली थी।

बाद में 3 मार्च 2025 को राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम-2010 के नियम 44 में छूट देते हुए पीजी पाठ्यक्रम के लिए स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने कर दी। डॉक्टरों ने इसी आदेश का हवाला देते हुए अपनी 24 महीने की स्टडी लीव को बढ़ाकर 36 महीने करने की मांग की थी।

डॉक्टरों ने अपनी 24 महीने की स्टडी लीव को बढ़ाकर 36 महीने करने की मांग की थी। (फाइल)

डॉक्टरों ने अपनी 24 महीने की स्टडी लीव को बढ़ाकर 36 महीने करने की मांग की थी। (फाइल)

डॉक्टरों का आवेदन खारिज, हाईकोर्ट में दी चुनौती

राज्य शासन ने डॉक्टरों की स्टडी लीव बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। इसके बाद डॉक्टरों ने 3 मार्च 2025 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए शासन के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और याचिकाएं दायर कीं।

सरकार का आदेश बाद में आया, पुरानी स्टडी लीव पर लागू नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की स्टडी लीव 3 मार्च 2025 के सरकारी आदेश से काफी पहले मंजूर हो चुकी थी। वे 24 महीने की छुट्टी का लाभ भी ले चुके थे। ऐसे में बाद में जारी आदेश को पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने करने का मतलब यह नहीं है कि पहले से 24 महीने की स्टडी लीव ले चुके हर कर्मचारी की छुट्टी अपने आप 36 महीने हो जाएगी। इसके लिए सरकारी आदेश में साफ प्रावधान होना जरूरी था, जो इसमें नहीं है।

राज्य शासन ने डॉक्टरों की स्टडी लीव बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। (फाइल)

राज्य शासन ने डॉक्टरों की स्टडी लीव बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। (फाइल)

एक डॉक्टर का आदेश बाद में रद्द हो चुका था

याचिकाकर्ताओं ने डॉ. मीनाक्षी सूद के मामले का उदाहरण देते हुए उन्हें भी समान लाभ देने की मांग की थी। विभाग ने 13 जून 2025 को उनके पहले के आदेश में बदलाव कर तीन साल की पूरी अवधि को स्टडी लीव माना था।

हालांकि, वित्त विभाग की आपत्ति के बाद 31 जुलाई 2026 को यह आदेश रद्द कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि जो आदेश पहले ही रद्द हो चुका है, उसे आधार बनाकर दूसरे कर्मचारियों को समान लाभ देने की मांग नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में जारी आदेश को पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता। (फाइल)

हाईकोर्ट ने कहा कि बाद में जारी आदेश को पुराने मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता। (फाइल)

जानिए क्या है स्टडी लीव ?

स्टडी लीव यानी अध्ययन अवकाश सरकारी कर्मचारियों या नौकरी कर रहे डॉक्टरों को आगे की पढ़ाई या तय प्रशिक्षण के लिए दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में इसके लिए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 44 में प्रावधान है।

3 मार्च 2025 के सरकारी आदेश से नियम 44 में छूट देते हुए नौकरी कर रहे डॉक्टरों के लिए पीजी की पढ़ाई के लिए स्टडी लीव की अधिकतम अवधि 36 महीने कर दी गई। इसके साथ पढ़ाई पूरी करने के बाद 5 साल तक सेवा करने जैसी शर्तें भी रखी गई हैं।

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