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निकायों में 16 साल बाद ऑडिट सिस्टम लागू, गड़बड़ी पर अफसरों की जेब से होगी वसूली



निकायों के एक-एक पैसे का हिसाब रखने के लिए कानून लागू करने में राज्य सरकार ने 16 साल का वक्त लगा दिया। 13वें वित्त आयोग ने अपनी (2010-2015) की रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की थी कि राज्य सरकार को सभी स्थानीय निकायों (शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों) के लिए मजबूत ऑडिट प्रणाली लागू करनी चाहिए। सरकार ने अब इसके लिए ऑडिट प्रणाली बनाई है। इसकी अधिसूचना जारी हो गई है। वहीं अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। इसमें एक हजार से पांच हजार रुपए जुर्माना व सरकारी खजाने को होने वाली वित्तीय हानि जिम्मेदार की जेब से वसूलने का प्रावधान किया गया है। वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद तीन माह में रिपोर्ट नहीं मिलती है तो निदेशक संबंधित निकाय का बजट रोकने के लिए सरकार से सिफारिश भी कर सकेंगे। लापरवाही पर जुर्माने के ये प्रावधान दस्तावेज न दिखाने पर जुर्माना:यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी ऑडिट के दौरान वाउचर या दस्तावेज प्रस्तुत करने में लापरवाही बरतता है, तो उस पर 1,000 से 5,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इससे पहले 15 दिन का स्पष्टीकरण नोटिस दिया जाएगा। अवैध भुगतान पर सरचार्ज: नियमों के विरुद्ध किए गए भुगतान को खारिज कर निदेशक उसे अधिकृत करने वाले अधिकारी या संस्था पर सरचार्ज आरोपित कर सकेंगे।{राजस्व बकाए की तरह वसूली: निदेशक द्वारा प्रमाणित राशि का भुगतान एक महीने के भीतर करना होगा। भुगतान समय पर नहीं किया तो उसे भूमि राजस्व के बकाये के रूप में वसूला जाएगा। फंड रोकने की सिफारिश: वित्तीय वर्ष बीतने के तीन महीने के भीतर खाते प्रस्तुत न करने पर निकाय का फंड रोकने की सिफारिश की जाएगी। {आपराधिक मामलों में कार्यवाही: धोखाधड़ी या लापरवाही के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। नए ऑडिट कानून की क्यों पड़ी जरूरत ? {13वें वित्त आयोग की सिफारिश: आयोग (2010-2015) ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि राज्य सरकार को निकायों के लिए मजबूत ऑडिट प्रणाली लागू करनी चाहिए। {सरकारी अनुदानों का प्रभावी खर्च सुनिश्चित करना: केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा स्थानीय व अन्य प्राधिकरणों को मिलने वाले अनुदानों का सही और प्रभावी उपयोग हो रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया था। किन पर लागू होगा नया ऑडिट कानून ? कानून के दायरे में सभी स्थानीय निकाय एवं संस्थान शामिल होंगे। इनमें नगर निगम, नगर परिषद, नगरपालिकाएं, जिला परिषद, पंचायत समितियां और ग्राम पंचायतें शामिल हैं। सभी राज्य विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी और महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज भी इसके दायरे में आएंगे। स्थानीय फंड से जुड़े सभी चैरिटेबल एंडोमेंट फंड और राहत फंड के साथ राज्य सरकार व सहायता प्राप्त इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों का भी ऑडिट होगा। सरकार की मंजूरी से निदेशक, लोकल ऑडिट विभाग अन्य प्राधिकरणों, संस्थाओं या फंड को भी सूची में शामिल कर सकेंगे।



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