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Raipur Jagannath Rath Yatra 2026


रायपुर10 मिनट पहले

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भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर आज प्रदेशभर में रायपुर शहर के प्रमुख जगन्नाथ मंदिरों से भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में रथयात्रा के लिए अलग-अलग समय और रूट तय किए गए हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आयोजकों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

इस यात्रा के पहले शहर के अलग-अलग मंदिरों में जगन्नाथ भगवान की यात्रा को लेकर तैयारियां की गई। मंदिरों को फूलों से सजाया गया है, इसके अलावा जिन मार्गो से रथ यात्रा निकलेगी। वहां साफ सफाई भी करवाई गई है।

रथयात्रा के दौरान शहर के इन मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और यातायात का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि यात्रा मार्गों को ध्यान में रखते हुए अपनी आवाजाही की योजना बनाएं और प्रशासन-यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें।

देखिए पहले ये तस्वीरें-

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पहले एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है।

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पहले एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है।

ओडिशा के कलाकारों ने तीनों रथों को तैयार कर लिया है।

ओडिशा के कलाकारों ने तीनों रथों को तैयार कर लिया है।

महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है।

महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है।

ओडिशा के कलाकारों ने संवारी रथ और मंदिर की भव्यता

रथयात्रा की तैयारियों के तहत इस बार भी ओडिशा से आए कलाकार गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक शैली की पेंटिंग और आकर्षक सजावट कर रहे हैं। मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और रथों को पुरी की तर्ज पर रंग-बिरंगे धार्मिक चित्रों और पारंपरिक अलंकरण से सजाया जा रहा है।

वहीं महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की पूजा-अर्चना और रथयात्रा के सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि रायपुर में भी श्रद्धालुओं को पुरी जैसी आध्यात्मिक अनुभूति मिल सके।

500 साल पुराना टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर

रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में शामिल है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर को पहले ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित होने के बाद धीरे-धीरे इसकी पहचान जगन्नाथ मंदिर के रूप में बनी।

मंदिर का निर्माण अग्रवाल परिवार ने कराया था। अंग्रेजों के शासनकाल में एक अग्रवाल साहूकार ने मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण कराया। इसी वजह से लंबे समय तक इसे साहूकार मंदिर कहा जाता रहा। समय के साथ यहां भगवान जगन्नाथ की आराधना शुरू हुई और मंदिर की पहचान बदल गई।

ओडिशा से आए कलाकार मंदिर में पारंपरिक शैली की पेंटिंग और आकर्षक सजावट कर रहे हैं।

ओडिशा से आए कलाकार मंदिर में पारंपरिक शैली की पेंटिंग और आकर्षक सजावट कर रहे हैं।

एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर

टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ के अलावा श्रीराम दरबार, दो शिव मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गरुड़ मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर भी स्थापित हैं। इसी कारण यह मंदिर सालभर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहता है।

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महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है।

महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है।

रायपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पहले एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है। ये दोनों झाड़ू पूरे साल तिजोरी में सुरक्षित रखी जाती हैं और केवल रथयात्रा के दिन ही बाहर निकाली जाती हैं।

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