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राजसमंद जिले में इस साल मानसून की बेरुखी अब किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है। अक्टूबर तक जिले में औसतन महज 407 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले साल 948 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार बारिश करीब 57 प्रतिशत कम है। मानसून की वापसी का समय नजदीक आने के साथ अब अच्छी बारिश की उम्मीद भी कम होती जा रही है। कम बारिश का सीधा असर जिले के जलस्रोतों पर पड़ा है। रामदरबार बांध में पानी की आवक नहीं होने से गौमती नदी सूखी पड़ी है। वहीं कुंभलगढ़ क्षेत्र में भी बारिश कम होने से बनास नदी में पानी नहीं आया। इसके चलते बाघेरी का नाका और नंद समंद बांध भी पर्याप्त पानी की आवक का इंतजार कर रहे हैं। राजसमंद झील में भी नहीं पहुंचा पानी राजसमंद शहर की लाइफलाइन राजसमंद झील में पानी की आवक के दो प्रमुख स्रोत गौमती नदी और खारी फीडर हैं। गौमती नदी पहले से सूखी है, जबकि खारी फीडर से पानी तभी पहुंचता है जब नंद समंद बांध ओवरफ्लो होता है। इस बार बनास नदी में पानी नहीं आने से नंद समंद का जलस्तर भी नहीं बढ़ पाया। ऐसे में झील के पानी से सिंचाई व पेयजल व्यवस्था करना चुनौती पूर्ण रहेगा। जिले के 25 प्रमुख बांधों में इस बार पानी की आवक नहीं हुई। राजसमंद झील की कुल भराव क्षमता 3786 एमसीएफटी है, जबकि वर्तमान में 1986.50 एमसीएफटी पानी मौजूद है। झील का पूर्ण भराव गेज 30 फीट है, जबकि वर्तमान जलस्तर 19.05 फीट है। नंद समंद और बाघेरी नाका की स्थिति भी चिंताजनक नंद समंद बांध की कुल भराव क्षमता 786 एमसीएफटी है और वर्तमान में इसमें 153.40 एमसीएफटी पानी है। इसका वर्तमान गेज 13.30 फीट है, जबकि ओवरफ्लो गेज 32 फीट है। बाघेरी नाका बांध में भी जल स्तर कम बाघेरी नाका बांध से जिले के 264 गांवों में पेयजल आपूर्ति की जाती है, लेकिन इस बार पानी की आवक नही हुई है। बाघेरी नाका बांध परियोजना के एईएन कुलदीप बरोड़ के अनुसार बाघेरी नाका बांध से अब महज 1 महीने का पेयजल उपलब्ध है। बाघेरी नाका बांध की कुल क्षमता 311.68 एमसीएफटी है। वर्तमान में इसमें 106.28 एमसीएफटी पानी बचा है। बांध का पूर्ण भराव गेज 32.80 फीट है, जबकि वर्तमान गेज 14.80 फीट है। बाघेरी नाका बांध के पानी का पूरा उपयोग पेयजल के लिए ही होता है और इससे 264 से अधिक गांवों में पानी की सप्लाई की जाती है। खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें सूखने लगी बारिश की कमी का असर अब खेतों में भी दिखाई देने लगा है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। किसानों को उत्पादन प्रभावित होने और फसलें खराब होने की आशंका सताने लगी है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इस बार 88 हजार हेक्टेयर से ज्यादा में खरीफ फसल की बुवाई की गई थी। जिसमें मक्का की बुवाई 60 हजार से 65 हजार हेक्टेयर में की गई है। इसके अलावा 7 से 8 हजार में ज्वार, 700 से 800 हैक्टेर बाजरा, 1200 हैक्टेर में उड़द और 1200 हेक्टेयर के करीब मूंग, 3500 हेक्टेयर में कपास व शेष में चारा व सब्जियां उगाई गई है। इसमें 20 से 30 प्रतिशत फसल सूख चुकी है।
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राजसमंद में 57% कम बारिश, खरीफ की फसलें सूखने लगी:बाघेरी नाका बांध में सिर्फ 1 महीने का पानी बचा
