बोकारो में दुर्गापूजा को लेकर तैयारियां अब तेज हो गई हैं। शहर के प्रमुख पूजा स्थलों पर इस बार अलग-अलग राज्यों और प्रसिद्ध मंदिरों की झलक पंडालों में देखने को मिलेगी।
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कहीं महादेश्वर मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया जा रहा है, तो कहीं गुजरात के प्रसिद्ध लक्ष्मी नारायण मंदिर की प्रतिकृति लोगों को आकर्षित करेगी। पंडालों के साथ मीना बाजार भी लोगों के लिए खास आकर्षण रहेगा।

सेक्टर-9 वैशाली मोड़ स्थित महादेश्वर मंदिर पूजा समिति की ओर से इस बार आकर्षक पंडाल तैयार कराया जा रहा है।
सेक्टर-9 वैशाली मोड़ में महादेश्वर मंदिर की झलक सेक्टर-9 वैशाली मोड़ स्थित महादेश्वर मंदिर पूजा समिति की ओर से इस बार आकर्षक पंडाल तैयार कराया जा रहा है। पंडाल निर्माण पर करीब 10 से 12 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। कारीगर पंडाल को आकर्षक रूप देने में जुटे हैं।

सेक्टर-2 सी में गुजरात के प्रसिद्ध लक्ष्मी नारायण मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार हो रहा है।
सेक्टर-2 सी में दिखेगा गुजरात का लक्ष्मी नारायण मंदिर सेक्टर-2 सी में गुजरात के प्रसिद्ध लक्ष्मी नारायण मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार हो रहा है। यहां पंडाल निर्माण का बजट करीब 15 से 17 लाख रुपए रखा गया है। पंडाल की बनावट और सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।

सेक्टर-12 में ओडिशा के संबलपुर के प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया जा रहा है।
सेक्टर-12 में ओडिशा के संबलपुर मंदिर की झलक सेक्टर-12 में ओडिशा के संबलपुर के प्रसिद्ध मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया जा रहा है। यहां करीब 15 कारीगर रात-दिन काम में जुटे हैं। पंडाल निर्माण का बजट करीब 6 से 8 लाख रुपए है। थर्मोकोल, कपड़े और अन्य सजावटी सामग्री से बारीक कारीगरी की जा रही है।

दिन-रात काम कर रहे कारीगर अगले कुछ दिनों में पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
मीना बाजार का भी रहेगा इंतजार इन पूजा स्थलों पर पंडाल के साथ मीना बाजार भी सजाया जाएगा। छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से दुकानदार और कलाकार मीना बाजार लगाने पहुंचेंगे। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी और घूमने के लिए पहुंचते हैं।
पश्चिम बंगाल के कारीगरों की कारीगरी पंडाल निर्माण में अधिकतर कारीगर पश्चिम बंगाल से आए हैं। दिन-रात काम कर रहे कारीगर अगले कुछ दिनों में पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अगले सप्ताह से सजावट और अन्य तैयारियों में और तेजी आने की संभावना है। इस बार अलग-अलग मंदिरों की प्रतिकृतियों के जरिए बोकारो की दुर्गापूजा को नया रूप देने की तैयारी है।
