पीएम मोदी के साथ सुखबीर बादल। फाइल फोटो
पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने गठबंधन की बात को सार्वजनिक नहीं किया है। अकाली दल के उम्मीदवारों को गठबंधन की घोषणा का इंतजार है।
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शहरी सीटों पर चुनाव लड़ने वाले शिअद नेता अभी साइलेंट हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि गठबंधन की स्थिति में शहरी सीटें भाजपा के पास जाएंगी। उधर, शिरोमणि अकाली दल ने इंटरनल सर्वे करवाया। जिसमें यह बात सामने आई कि पार्टी को भाजपा के साथ गठबंधन में ही चुनाव लड़ना चाहिए।
अकाली दल के एक सीनियर नेता ने बताया कि पार्टी गठबंधन को लेकर तीन सर्वे करवा चुकी है और तीनों में यही बात सामने आई कि 2027 के लिए गठबंधन बेहद जरूरी है। सीनियर नेता की मानें तो गठबंधन की घोषणा जल्द हो सकती है।

शिअद के इंटरनल सर्वे में ये बातें आई सामने…
- भाजपा के साथ गठबंधन जरूरी: शिरोमणि अकाली दल बादल ने भाजपा के साथ गठबंधन करवाने के संबंध में अलग-अलग फेज में सर्वे करवाया। सर्वे में यह बात सामने आई कि भाजपा से गठबंधन जरूरी है, बिना गठबंधन के अकाली दल सरकार नहीं बना सकता है।
- अकेले लड़े तो 30 से 35 सीटें: इंटरनल सर्वे में यह बात सामने आई कि अगर अकाली दल अकेले चुनाव लड़ता है, तो उन्हें 30 से 35 सीटें आने का अनुमान है। ऐसी स्थिति में वो किसी भी हाल में सरकार नहीं बना सकते हैं। भाजपा के साथ चुनाव लड़ने पर गठबंधन को 58 से 60 सीटें का अनुमान है जिससे वो आसानी से सरकार बना सकते हैं।
- ग्रामीण सीटों पर भाजपा का बढ़ता प्रभाव: शिअद के सर्वे में एक बात यह भी सामने आई कि भाजपा का ग्राफ शहरी सीटों के साथ साथ ग्रामीण सीटों पर भी बढ़ रहा है। ग्रामीण सीटों पर भी गठबंधन में चुनाव लड़ने पर फायदा मिल सकता है।
गठबंधन की घोषणा में देरी के 3 कारण…
- शिअद पुनरसुरजीत की एडजस्टमेंट: शिअद व भाजपा के बीच गठबंधन फाइनल हो चुका है। अब पुनरसुरजीत को एडजस्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। भाजपा पुनरसुरजीत को गठबंधन का हिस्सा बना रही है। हालांकि भाजपा अकाली दल पुनरसुरजीत को अपने हिस्से की 10 सीटें देने को तैयार भी हो गई है। पुनरसुरजीत की एडजस्टमेंट की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण गठबंधन की घोषणा में देरी हो रही है।
- सीटें तय करने में हो रही देरी: भाजपा ने अपने हिस्से की 60 सीटों की सूची शिरोमणि अकाली दल को बता दी है। अकाली दल उन 60 सीटों में से कुछ सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है क्योंकि वो कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर अकाली दल के बड़े नेता चुनाव लड़ते हैं।
- सभी सीटों पर वर्कर्स रहेंगे एक्टिव: चुनाव के लिए अभी चार महीने का वक्त शेष है। भाजपा व अकाली दल दोनों 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं ताकि दोनों पार्टियों के नेता सभी सीटों पर एक्टिव रहें और लोगों से जुड़ते रहें। दोनों दलों ने गठबंधन के हिसाब से अपनी चुनावी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। सुखबीर बादल ग्रामीण हलकों में लगतार रैलियां कर रहे हैं जबकि शहरी क्षेत्रों में भाजपा के वर्कर पूरी तरह से एक्टिव हैं।
भाजपा-शिअद गठबंधन को लेकर अहम बातें..
- 60-57 फॉर्मूला: भाजपा और अकाली दल के बीच समझौता 60-57 के फॉर्मूले पर तय हो गया है। जिसमें से 60 सीटों पर भाजपा और 57 सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ेगा। इस फॉर्मूले पर दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व सहमति जता चुका है।
- शिअद पुनरसुरजीत को भाजपा करेगी एडजस्ट: शिरोमणि अकाली दल पुनरसुरजीत के साथ भी भाजपा गठबंधन करने की तैयारी में है। पुनरसुरजीत 8-10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। शिअद के साथ यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि पुनरसुरजीत को जो सीटें मिलेंगी वो भाजपा के कोटे में से मिलेगी।
- सीएम फेस को लेकर सहमति: भाजपा और शिअद के बीच यह फैसला किया गया बिना सीएम फेस के चुनाव लड़ा जाएगा। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल सुखबीर बादल के नाम पर चुनाव लड़ेंगे। चुनाव के बाद जिस पार्टी के पास ज्यादा विधायक होंगे उसी पार्टी का सीएम बनाया जाएगा।
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