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राजस्थान हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोप में पिछले 13 साल से सजा भुगत रहे पति को दोषमुक्त करते हुए उसकी आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया हैं। अदालत ने कहा कि अगर आरोपी किसी ओर मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए। यह आदेश जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने आरोपी रामभरोस साहनी की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। कोर्ट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी पूरी श्रृंखला स्थापित करने में विफल रहा, जिससे केवल और केवल आरोपी के ही दोषी होने का निष्कर्ष निकलता हो। अदालत ने यह भी माना कि घटना के बाद आरोपी का कुछ समय के लिए मौके से अनुपस्थित रहना, अन्य पुख्ता सबूतों के अभाव में अकेले दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकता। इन तमाम बिंदुओं के आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 26 अप्रैल 2017 के आजीवन कारावास के आदेश को रद्द कर दिया। जिसके बाद अब रामभरोस साहनी करीब 13 साल बाद जेल से बाहर आ सकेगा। किराए के कमरे में मिला था महिला का शव
यह पूरा मामला साल 2013 का है। 18 जून 2013 को जयपुर के नाहरगढ़ रोड थाना क्षेत्र में एक महिला का शव उसके किराए के कमरे में मिला था, जिसके गले पर चाकू से चोट के निशान थे। महिला के पति रामभरोस साहनी के मौके पर नहीं मिलने पर उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया। पुलिस आरोपी को 25 जून 2013 को गिरफ्तार करके हत्या के आरोप में चालान पेश किया। सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने 26 अप्रैल 2017 को आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं
आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और इस घटना का कोई भी प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। अभियोजन आरोपी और मृतका के बीच अंतिम बार साथ देखे जाने की परिस्थिति को भी विश्वसनीय तरीके से साबित करने में असफल रहा। इसके अलावा, कथित चाकू और खून से सने कपड़ों की बरामदगी को लेकर भी गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास सामने आया था।
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13साल बाद पत्नी की हत्या के आरोप से पति बरी:हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को किया रद्द, अब आएगा जेल से बाहर
