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हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन (HPMC) के एप्पल जूस कॉन्संट्रेट (AJC) की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने सवाल उठाए हैं। दुबई के एक एप्पल जूस कॉन्संट्रेट डिस्ट्रीव्यूटर ने विदेशी बाजार में निर्यात के लिए HPMC के कॉन्संट्रेट का सैंपल लिया था। डिस्ट्रीब्यूटर ने कॉन्संट्रेट का रंग ज्यादा गहरा और स्वाद में अधिक एसिडिक (जूस का स्वाद अपेक्षाकृत अधिक) होने पर आपत्ति जताई है। HPMC अधिकारियों ने विदेशी खरीदारों से मिले फीडबैक के बाद इन कमियों पर काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार ये कोई बड़ी समस्या नहीं हैं और इन्हें दूर किया जा सकता है। अगली खेप के एप्पल जूस कॉन्संट्रेट में इन पहलुओं में सुधार किया जाएगा। कुछ देशों में हल्के रंग और अधिक साफ (क्लियर) एप्पल जूस कॉन्संट्रेट की मांग है। हालांकि गुणवत्ता के लिहाज से HPMC का कॉन्संट्रेट बेहतर है, लेकिन गहरे रंग और एसिडिक को लेकर सवाल उठाए गए है। जापान में भी क्लैरिटी को लेकर उठे सवाल HPMC पिछले कुछ वर्षों से अपने एप्पल जूस कॉन्संट्रेट के लिए विदेशी बाजार तलाश रहा है। निगम के अनुसार जापान को भी AJC का सैंपल भेजा गया था, जहां खरीदारों ने कॉन्संट्रेट की क्लैरिटी को लेकर सवाल उठाए थे। इसके अलावा इटली में भी कुछ सैंपल भेजे गए हैं। वहां यह जांच की जा रही है कि HPMC का AJC श्नैप्स नामक अल्कोहलिक पेय बनाने के लिए उपयुक्त है या नहीं। इसकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है। अफ्रीकी देशों ने दिखाई रुचि वहीं HPMC को अफ्रीका के कुछ देशों से भी एप्पल कॉन्संट्रेट के लिए रुचि दिखाई है। निगम के अनुसार इन देशों के साथ बातचीत चल रही है और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। बेहतर गुणवत्ता के सेब से सुधर सकती है AJC की गुणवत्ता HPMC अधिकारियों का मानना है कि AJC की गुणवत्ता सुधारने के लिए कच्चे माल की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। वर्तमान में निगम मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत ग्रेड-सी सेब की खरीद करता है। इसके लिए किसानों को 12 रुपए प्रति किलो का निर्धारित मूल्य दिया जाता है। HPMC के मुताबिक कई बागवानों में यह गलत धारणा है कि प्रसंस्करण के लिए सड़ा हुआ सेब बेहतर रहता है, जबकि कॉन्संट्रेट की गुणवत्ता सुधारने के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की जरूरत होती है। तीन प्लांटों में 1500-2000 मीट्रिक टन उत्पादन HPMC प्रदेश में अपने तीन प्रोसेसिंग प्लांटों के माध्यम से हर साल करीब 1,500 से 2,000 मीट्रिक टन एप्पल जूस कॉन्संट्रेट तैयार करता है। इसका अधिकांश हिस्सा घरेलू बाजार में ही बिकता है। इसका इस्तेमाल एप्पल फ्लेवर वाले जूस, मिक्स्ड फ्रूट जूस और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स बनाने में किया जाता है। इसकी सबसे ज्यादा मांग दक्षिण भारत के राज्यों से आती है। इस वर्ष प्रदेश में सेब का उत्पादन कम रहने का असर AJC के उत्पादन पर भी पड़ा है। कुछ दिन पहले तक HPMC ने केवल करीब 10 हजार मीट्रिक टन ग्रेड-सी सेब की खरीद की थी, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब एक लाख मीट्रिक टन था। कम खरीद के चलते इस वर्ष पराला स्थित प्रोसेसिंग यूनिट में अब तक करीब 400 मीट्रिक टन AJC का उत्पादन हुआ है। HPMC की अन्य दो प्रोसेसिंग यूनिट इस वर्ष बंद रही हैं।
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HPMC के एप्पल-जूस-कॉन्संट्रेट पर दुबई के डिस्ट्रीब्यूटर ने उठाए सवाल:रंग ज्यादा गहरा और स्वाद एसिडिक बताया, अफ्रीकी देशों ने दिखाई रुचि
