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Sonam Wangchuk Hunger Strike Health Impacts; Ketosis Energy – Starvation Death


सोनम वांगचुक 19 दिन से भूख-हड़ताल कर रहे हैं। मांग है- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। सरकार ने अब तक उनसे कोई बात नहीं की है। दिल्ली हाई कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर कर कहा कि सोनम को फोर्स-फीडिंग करवाई जाए, वरना 2 दिन में जान

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सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के तीसरे फेज में हैं, चौथे फेज में कैसे जा सकती है जान और क्या जबरन खाना खिलाया जा सकता है; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: तो क्या अगले दो-तीन दिन में सोनम वांगचुक की जान को खतरा है?

जवाब: भुखमरी से जुड़ी कई रिसर्च में 3 जरूरी बातें हैं..

  • कोई दुबला-पतला व्यक्ति खाना न खाए, तो उसके शरीर के वजन का करीब 18% तक कम होने पर भूख से मरने की नौबत आ जाती है। ऐसा औसतन 30 से 50 दिनों के बाद होता है।
  • मोटे लोग अपना वजन करीब 20% तक कम होने तक जिंदा रह सकते हैं, यानी कुछ दिन और ज्यादा।
  • कुछ और फैक्टर्स भी हैं, जैसे- कोई स्वस्थ व्यक्ति है या पानी और नमक वगैरह ले रहा है, तो बिना खाने के भी कुछ ज्यादा दिन चला जा सकता है।

सोनम का वजन अनशन की शुरुआत में 65.9 किलो था, जो 16 जुलाई तक 9 किलो घटकर 56.9 हो गया है। यानी करीब 14% की गिरावट। उनका ब्लड प्रेशर नॉर्मल 120/80 यूनिट्स से घटकर 101/65 यूनिट्स आ गया है। वहीं ब्लड शुगर 89 यूनिट्स है।

19 दिन से अनशन के चलते सोनम वांगचुक का शरीर कमजोर हो गया है। उनके शरीर में दर्द रहता है। बाथरूम तक जाने के लिए भी उन्हें किसी का सहारा लगता है।

19 दिन से अनशन के चलते सोनम वांगचुक का शरीर कमजोर हो गया है। उनके शरीर में दर्द रहता है। बाथरूम तक जाने के लिए भी उन्हें किसी का सहारा लगता है।

उत्तर प्रदेश बेस्ड डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) अजय सिंह कहते हैं कि सोनम के हेल्थ पैरामीटर्स देखते हुए ऐसा कहना ठीक नहीं होगा कि उनको दो दिन में जान का खतरा है। वे पानी ले रहे हैं। हालांकि निगरानी की जरूरत है, क्योंकि उनकी उम्र 59 साल है। अचानक खाना नहीं दिया जाएगा, बल्कि फीडिंग ट्यूब से ग्लूकोज और बाकी मिनरल्स दिए जाएंगे, इससे कोई खतरा नहीं होता।

मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर में न्यूरोलॉजिस्ट और मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. टी.एन दुबे कहते हैं, ‘मेडिकल साइंस में इस बात कि साफ पुष्टि नहीं है कि इंसान कितने दिन तक भूख बर्दाश्त कर सकता है। भूख तब तक जानलेवा नहीं होगी, जब तक कीटोसिस न शुरू हो जाए। एक बार ये शुरू हो जाए, तो माना जाता है कि व्यक्ति कोमा में जा सकता है।’

सवाल-2: क्या सरकार जबरन सोनम का अनशन तुड़वा सकती है?

जवाब: भूख-हड़ताल भी अभिव्यक्ति, यानी अपनी बात कहने का तरीका है। आर्टिकल 19 के तहत ये एक मूल अधिकार है। यानी सरकार किसी को भूख-हड़ताल करने से रोक नहीं सकती।

वहीं आर्टिकल 21 से जीवन का अधिकार मिलता है और ये सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह किसी व्यक्ति के जीवन को बचाए रखे। इसीलिए भारत में आत्महत्या करना या इसके लिए किसी को उकसाना अपराध है।

इन दो कानूनों से जुड़ा एक रोचक मामला मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला का है, जो 2000 से 2016 तक 16 साल भूख हड़ताल पर रही थीं। उन्हें अनशन के तीसरे दिन ही आत्महत्या की कोशिश के आरोप में IPC की धारा 309 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और 16 साल तक सरकारी अस्पताल में रखकर जबरन फीडिंग ट्यूब से खाना दिया गया।

हालांकि 2021 में मद्रास हाई कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में कहा था कि भूख-हड़ताल के चलते किसी को आत्महत्या के प्रयास में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सोनम पर इरोम चानू की तरह आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। लेकिन सरकार आर्टिकल 21 का हवाला देकर उनका अनशन तुड़वा सकती है।

अनशन तुड़वाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कहा है, ‘डॉक्टरों से सोनम की नियमित जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। क्योंकि हर नागरिक की जान कीमती है।’

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59 साल के सोनम वांगचुक 17 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। सिर्फ नमक का पानी ले रहे हैं। 8.5 किलो वजन गिर चुका है। उनके पीछे बैनर कॉकरोच जनता पार्टी का है, जिसकी मांग है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- सरकार बात तक करने को तैयार नहीं, मरने के लिए छोड़ दिया है। पूरी खबर पढ़िए…



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