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एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 1 लाख रुपए के इनामी और टॉप-25 तस्करों में शामिल विशनाराम को मध्यप्रदेश के मंदसौर से धर दबोचा है। पुलिस से बचने के लिए आरोपी ने राजस्थान छोड़ दिया था, पहचान बदल ली थी और मंदसौर में कारपेंटर का काम करने लगा था। लेकिन उसने एक गलती की वजह से पकड़ा गया। बाड़मेर के कुड़ला गांव का रहने वाला विशनाराम 12वीं तक पढ़ा-लिखा है। शुरुआत में वह एक पाइप लाइन कंपनी में गाड़ी चलाता था, लेकिन कमाई कम थी। उसके दादा को डोडा पोस्त पीने की लत थी, जिस पर काफी पैसा खर्च होता था। दादा का महंगा नशा देखकर उसने सोचा कि क्यों न खुद ही इस धंधे में उतरकर मोटी कमाई की जाए। वह शुरुआत में अपने दादा के लिए डोडा लाने लगा और धीरे-धीरे मध्य प्रदेश व हरियाणा के बड़े तस्करों से जुड़ गया। रंजिश रखने वाले ने दी टिप, पार्टी करते पकड़ा विशनाराम से रंजिश रखने वाले एक परिचित ने एएनटीएफ को खबर दी कि वह एमपी में फर्नीचर का काम कर रहा है और उसने काम के लिए जोधपुर से कारीगर बुलाए हैं। एएनटीएफ की टीम ने उन कारीगरों की मूवमेंट को ट्रैक किया और सीधे उमरिया गांव पहुंच गई। जब टीम पहुंची तो विशनाराम अपने तस्कर दोस्त के चाचा के घर दोस्तों और कारीगरों के साथ पार्टी कर रहा था। पुलिस ने वहीं से दबोचा। तस्कर पर डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुकदमे, फरारी के लिए बदले ठिकाने पिछले 12 सालों से विशनाराम तस्करी की दुनिया में सक्रिय था। उसके खिलाफ राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा के अलग-अलग थानों में हत्या के प्रयास, मारपीट, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, चोरी और धोखाधड़ी जैसे 18 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज है। एएनटीएफ की सख्ती बढ़ी तो विशनाराम ने जोधपुर में किराए का मकान लेकर और रिश्तेदारों के ठिकाने बदलकर फरारी काटी। जब राजस्थान में पकड़े जाने का डर बढ़ा, तो वह मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के पिपलियामंडी थाना क्षेत्र उमरिया गांव भाग गया। वहां उसने अपनी पुरानी पहचान छुपाकर खुद को फर्नीचर व्यापारी के रूप में स्थापित कर लिया।
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कार्रवाई; 12 साल से तस्करी, अब गिरफ्तार:दादा के नशे की आपूर्ति करने को बना तस्कर, मंदसौर में कारपेंटर बनकर काट रहा था फरारी
