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कैपिटल कॉम्प्लेक्स के बाद चंडीगढ़ हाईकोर्ट का हैरिटेज इंपैक्ट असेसमेंट बेल्जियम भेजा जा रहा




जब कोई भी इमारत बनाना शुरू करते हैं तो सबसे पहले भूमि पूजन होता है। उसका संदर्भ होता है कि मां धरती में खुदाई करने से पहले उसे पूजकर उसकी इजाज़त लेना। यह कहा पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने। वह मंगलवार को सेक्टर-12 के चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर में चल रहे ली कार्बूजिए फेस्ट में पहुंचे। यह फेस्ट चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स के यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल होने के 10 साल पूरे होने पर मनाया गया, जो 25 सितंबर से 6 अक्टूबर तक चला। 6 अक्टूबर ली कार्बूजिए के जन्मदिवस पर इसका समापन हुआ। इस मौके पर कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. संगीता बग्गा ने कहा – जो संस्कृति हमारे यहां है, उसी को अलग तरह से ली कार्बूजिए भी फॉलो करते हैं क्योंकि वह अपने डिजाइन में रूफ गार्डन जोड़ते हैं। नीचे धरती को खोदकर उसमें कंक्रीट डालते हैं तो उसे गार्डन से क्षति पूरी करते हैं। उन्होंने कार्बूजिए की उन 17 साइट्स पर बात की, जो यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल हैं। कार्बूजिए के पांच मुख्य तत्व जैसे रिबन विंडो, पिलोटिस/आरसीसी कॉलम, फ्री प्लान और टेरेस/रूफ गार्डन के बारे में बताया। कैपिटल कॉम्प्लेक्स के कंजर्वेशन और सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं? प्रो. संगीता बग्गा ने कहा – 2016 में जब कैपिटल कॉम्प्लेक्स को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का नॉमिनेशन मिला, तब सेक्रेटेरिएट की बालकनी में एयर कंडीशनिंग यूनिट और स्टील की अलमारियां फंसाई हुई थीं, जिन्हें रिफ्यूजी बालकनी के रूप में खाली करवाया गया था। आईआईटी रुड़की के साथ मिलकर कैपिटल कॉम्प्लेक्स की कंक्रीट कंजर्वेशन (आरसीसी स्ट्रक्चर्स और सरिए को जंग से बचाने के लिए) का काम सफलतापूर्वक हम पूरा कर चुके हैं। बिल्डिंग्स को आपदाओं (जैसे आग या भूकंप) से सुरक्षित बनाने के लिए इवैक्यूएशन प्लान, सुरक्षा योजना, और स्पेशली-एबल्ड और विजुअली इंपेयर्ड लोगों के लिए रैंप व ब्रेल जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। आग या आपात स्थिति से निपटने के लिए वहां के कर्मचारियों और निवासियों की मॉक ड्रिल और सैनिटाइजेशन ट्रेल्स भी करवाई जाती हैं।



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