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हिमाचल के प्रोग्रेसिव बागवान सुनील चौहान ने अपने सेब बगीचे में ‘मोनो रेल’ लगाई है। शिमला जिला में कोटखाई के ढांगवी गांव के सुनील ने बगीचे में इसके लिए 100 मीटर का ट्रैक तैयार किया। इस ट्रैक पर दो दिन पहले ‘मोनो रेल’ का सफल ट्रायल किया जा चुका है। सुनील ने मोनो रेल में 9 हॉर्स पावर का इंजन लगाया जो कि एक बार में 500 किलो सेब ढो सकेगा। खास बात यह है कि यह सिस्टम 45 डिग्री तक की ढलान वाले क्षेत्र में भी सेब ढुलाई कर सकता है। ‘दैनिक भासकर एप’ से बातचीत में सुनील ने बताया कि मोनो रेल लगने के बाद उनके बगीचे से स्टोर तक सेब पहुंचाने की टेंशन खत्म हो गई है। माना जा रहा है कि हिमाचल में सेब ढुलाई के लिए किसी बागवान द्वारा इस तरह की मोनो रेल लगाने का यह पहला प्रयोग है। देश में भी सेब या अन्य फसलों की ढुलाई के लिए इस तरह की व्यवस्था का यह पहला प्रयोग हो सकता है! वहीं हिमाचल का बागवानी महकमा भी एडीबी के सहयोग से सुंदरनगर के पलौहटा-2 में जरूर मोनो रेल प्रोजेक्ट स्थापित कर रहा है। चीन से मंगवाया इंजन और ट्रैक सुनील ने मोनो रेल के लिए चीन के ‘ग्वांगझोउ’ से इंजन और ट्रैक इम्पोर्ट किया। इंजन और ट्रैक इसी साल जून में उनके पास पहुंच गए थे, लेकिन उस समय सेब सीजन की व्यस्तता के कारण इसे बगीचे में इंस्टॉल नहीं कर पाए। दो दिन पहले 100 मीटर का ट्रैक तैयार कर मोनो रेल का ट्रायल किया गया। ट्रायल सफल रहा। अब अगले सीजन से इस ट्रैक के जरिए बगीचे से सेब स्टोर तक पहुंचाने की योजना है। 4.20 लाख रुपए में तैयार हुआ सिस्टम सुनील के अनुसार मोनो रेल लगाने व 100 मीटर ट्रैक बनाने में करीब 4.20 लाख रुपए की लागत आई है। सरकार की ओर से उन्हें 50 हजार रुपए की सब्सिडी भी मिली है।फिलहाल उन्होंने अभी एक बगीचे में ही मोनो रेल स्थापित की। सुनील के पास कुल तीन सेब के बगीचे हैं। अब उनकी योजना दूसरे बगीचे में भी मोनो रेल लगाने की है, ताकि पूरा सेब बिना लेबर के स्टोर तक पहुंचाया जा सके। अब दूसरे बागवान भी देखने पहुंच रहे मोनो रेल के सफल ट्रायल के बाद आसपास के बागवान भी इसे देखने सुनील चौहान के ढांगवी स्थित घर पर पहुंच रहे हैं। सुनील ने बताया कि अब दूसरे बागवान भी मोनो रेल लगाने की मांग कर रहे और इसे इम्पोर्ट करने की बात कह रहे हैं। वह इसमें दूसरे बागवानों का भी सहयोग करेंगे। HDP विधि से सेब उगा रहे सुनील सुनील चौहान पुरानी पद्धति से सेब की खेती छोड़कर सघन खेती (HDP) पर काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने पुराने बगीचे को भी टॉप ग्राफ्टिंग करके नई वेरायटी में कन्वर्ट कर दिया है। सुनील दो नए बगीचे एचडीपी तकनीक से लगा चुके हैं, जिसमे बहुत कम जमीन पर ज्यादा प्लांट लगाकर नई किस्मों का सेब बगीचा तैयार कर लिया है। सुनील चौहान हर साल 4000 से 4500 बॉक्स सेब उगा रहे हैं। सिर्फ सेब नहीं, दूसरी फसलों में भी हो सकता है इस्तेमाल बेशक, सुनील ने मोनो रेल सेब ढुलाई के लिए लगाई है, इसका इस्तेमाल दूसरी फसलों की ढुलाई के लिए भी किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि हिमाचल के ढलानदार पहाड़ों पर भी मोनो रेल काम कर रही है। इसके लिए जगह भी बहुत कम लगती है। यानी जिस तरह बगीचे में सड़क के लिए जगह लगती है, उसके मुकाबले एक चौथाई जगह पर इस ट्रैक को आसानी से बनाया जा सकता है।
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बागवान ने सेब ढुलाई के लिए बागीचे में 'मोनो-रेल' लगाई:लेबर क्राइसिस का टेक्नोलॉजी से समाधान, 45° ढलान पर 500 किलो भार उठाएगी, ट्रायल सक्सेफुल
