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चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा में जमा कचरे के पहाड़ को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आज सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार से शहर की कचरा प्रोसेसिंग क्षमता, डड्डूमाजरा में बचे कचरे को साफ करने की समयसीमा और कचरे को दूसरी जगह डंप नहीं किए जाने के संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी थी। कोर्ट ने कमिश्नर को एक सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए थे। अब सुनवाई में निगम की ओर से पेश की जाने वाली जानकारी अहम रहेगी। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने पिछली सुनवाई पर स्पष्ट किया था कि डड्डूमाजरा से कचरा हटाकर उसे चंडीगढ़, पंजाब या हरियाणा में किसी दूसरी जगह डालना समाधान नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि वह नहीं चाहता कि कचरे को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह डंप कर दिया जाए। रोज 250 टन मिश्रित कचरा प्रोसेस करने का दावा
पिछली सुनवाई पर नगर निगम की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गौरव मोहंता ने बताया था कि डड्डूमाजरा में रोजाना करीब 250 टन मिश्रित कचरे को प्रोसेस किया जा रहा है। निगम के अनुसार, सूखा और गीला कचरा हटाया जा चुका है, जबकि करीब 7 हजार मीट्रिक टन मिश्रित कचरा अभी बचा है। इसे जल्द साफ करने की बात कही गई थी। निगम ने बताया था कि डड्डूमाजरा में अपग्रेड किए गए प्लांट की क्षमता करीब 450 टन प्रतिदिन है। रोजाना करीब 200 टन गीला और 100 टन सूखा कचरा पहुंच रहा है। निगम का दावा था कि मौजूदा प्लांट की क्षमता शहर से निकलने वाले कचरे के लिए पर्याप्त है। इसी वजह से अतिरिक्त प्लांट लगाने का प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया गया है। याचिकाकर्ता का दूसरी जगह कचरा डालने का आरोप
याचिकाकर्ता एडवोकेट अमित शर्मा ने निगम के दावों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि डड्डूमाजरा में कचरे के पहाड़ की ऊंचाई कम हुई है, लेकिन समस्या खत्म नहीं हुई। उनके अनुसार, कचरे को चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में दूसरी जगह ले जाकर डंप किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा। निगम की समयसीमा बार-बार बदली गई
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि कचरा प्रोसेसिंग प्लांट को लेकर निगम की समयसीमा बार-बार बदली गई। पहले 2022 तक समाधान का भरोसा दिया गया, फिर समयसीमा 2024 और बाद में 2026 तक बढ़ाई गई। उन्होंने निगम की ओर से अलग-अलग हलफनामों में प्रोसेसिंग क्षमता के आंकड़ों में अंतर होने का दावा भी किया था। प्लांट की रिपोर्ट पर 25 लाख खर्च करने का मुद्दा उठाया
याचिकाकर्ता ने कहा था कि प्लांट लगाने के लिए निगम ने करीब 25 लाख रुपए खर्च कर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई थी। बाद में प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों पर गलत जानकारी देने और कोर्ट को गुमराह करने के आरोप भी लगाए थे। साथ ही सवाल उठाया कि कचरा फैलने की समस्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। चार साल तक बंद रहा था प्लांट
नगर निगम की ओर से प्लांट का इतिहास बताते हुए कहा गया था कि पहले इसे जेपी एसोसिएट्स संचालित करती थी। विवाद के कारण प्लांट करीब 4 साल बंद रहा और निगम कब्जा नहीं ले सका। वर्ष 2020 में निगम ने प्लांट अपने कब्जे में लेकर उसे अपग्रेड किया। निगम के अनुसार, इसके बाद करीब 15 लाख मीट्रिक टन जमा कचरा हटाया या प्रोसेस किया जा चुका है। निगम ने दलील दी थी कि डड्डूमाजरा में कचरे का पहाड़ मुख्य रूप से प्लांट लंबे समय तक बंद रहने के कारण बना था। अब मौजूदा प्लांट की क्षमता रोजाना निकलने वाले कचरे से अधिक है।
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चंडीगढ़ में कचरे के पहाड़ पर हाईकोर्ट में सुनवाई:निगम कमिश्नर को देना होगा हिसाब, सप्ताह में हलफनामा दाखिल के निर्देश
