जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर और उनका महल।
हरियाणा की जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर और उनकी पुत्रवधू फ्रॉड के केस में फंस गई हैं। दोनों के खिलाफ जमीन के दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने का आरोप है। इस संबंध में केस भी दर्ज कर लिया गया है, जिसमें दोनों के साथ नगर परिषद के सचिव, पटवारी और ठेकेदार क
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दिल्ली हाईकोर्ट के वकील अभिमन्यु चौधरी ने यह केस दर्ज कराया है। दर्ज कराई गई एफआईआर में वकील ने बताया कि जींद के ओपोलो रोड पर करीब 10 एकड़ जमीन पर उनका कब्जा है। रानी इंद्रजीत कौर, उनकी पुत्रवधू हरसिमरन कौर ने नगर परिषद सचिव सुमित दहिया, पटवारी नरेश चहल, रामराय निवासी सुभाष ठेकेदार आदि के साथ मिलकर इस जमीन को हड़पने का प्रयास किया।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर तहसील में दो बार जमीन की रजिस्ट्री कराने की कोशिश भी की गई, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। वहीं, रानी इंद्रजीत कौर ने कहा कि जमीन हमारी है और यह तकनीकी गलती थी। जमीन हड़पने के लिए दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने के आरोप पूरी तरह गलत हैं।
बता दें कि जींद रियासत की स्थापना 1763 में महाराजा गजपत सिंह सिद्धू ने की थी। वे सिख इतिहास की ‘फूलकियां मिसल’ से संबंध रखते थे। यह हरियाणा के ‘माझा’ और ‘मालवा’ क्षेत्र के बीच की एक प्रमुख रियासत मानी जाती थी। रियासत की राजधानी मुख्य रूप से संगरूर (वर्तमान पंजाब) हुआ करती थी।

ओपोलो रोड पर अपने फार्म हाउस में एडवोकेट अभिमन्यु चौधरी।

गली में लगा फार्म हाउस का सूचना बोर्ड।
वकील की एफआईआर में क्या, सिलसिलेवार पढ़ें…
- 60 साल पुरानी पारिवारिक विरासत: जींद की रामबीर कॉलोनी निवासी वकील अभिमन्यु ने भू-अभिलेख रिकॉर्ड (डिजिटल डेटा) में गंभीर हेराफेरी का आरोप लगाया है। अभिमन्यु के अनुसार, उनके दादा बलदेव सिंह ने साल 1965 में 50 कनाल 2 मरला का एक बड़ा फार्म हाउस खरीदा था। अब यह संपत्ति उनकी तीसरी पीढ़ी के नाम आ चुकी है, जिसमें उनके अलावा उनकी मां (रिटायर्ड लेबर कमिश्नर) सुधा चौधरी और बड़े भाई अभिजीत सिंह हिस्सेदार हैं।
- नक्शे से गायब हुआ खसरा नंबर: वकील के मुताबिक, जब हरियाणा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी जमीन की 9 प्रॉपर्टी आईडी और डिजिटल रिकॉर्ड (नक्शा) चेक किया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोप है कि डिजिटल सिजरे (नक्शे) में उनकी जमीन के असली खसरा नंबर 65/58 की जगह जबरन खसरा नंबर 65/13 डाल दिया गया। इतना ही नहीं, उनकी 50 कनाल 2 मरला जमीन के रकबे को घटाकर कागजों में सिर्फ 18 कनाल 15 मरला ही कर दिया गया और जमीन की लोकेशन भी बदल दी गई।
- दूसरे खसरे का रकबा बढ़ाया: वकील के मुताबिक, यह भी सामने आया कि जहां एक तरफ उनके परिवार का खसरा नंबर 65/58 घटाया गया, वहीं दूसरे खसरा नंबर (64/26/3/2) का क्षेत्रफल 79 कनाल 19 मरला से बढ़ाकर सीधे 115 कनाल 13 मरला दर्ज कर दिया गया। वकील अभिमन्यु का आरोप है कि डिजिटल रिकॉर्ड और सिजरा के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

इस रानी के तालाब को जींद रियासत की पहचान कहा जाता है।
रानी बोली- तकनीकी गलती, आरोप झूठे
उधर, इस मामले में रानी इंद्रजीत कौर ने कहा कि एक साथ लगती दो प्रॉपर्टी हैं। खसरा नंबर 65 शिकायतकर्ता और 64 हमारा है। हमने कमेटी में खसरा नंबर 64 की आईडी के लिए आवेदन किया था। सेटेलाइट से फोटो लेते समय सिस्टम ने 65 की लोकेशन उठा ली। जिससे एनए के नाम दर्ज शिकायतकर्ता की प्रॉपर्टी की आईडी हमारे नाम चढ़ गई। डीसी ने उसे फिर से एनए कर दिया है।
उन्होंने जमीन की दोबारा पैमाइश होने तक जमीन का स्टेट्स यथावत रखने के आदेश दिए थे। शिकायकर्ता के दादा ने ही रामबीर कॉलोनी काटी थी। प्रॉपर्टी हड़पने के लिए दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोप पूरी तरह से झूठे हैं।

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