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कसौली छावनी में 14 लाख के 60 CCTV कैमरे बंद:हेरिटेज मार्केट, ध्यानचंद चौक समेत भीड़भाड़ वाले कई इलाकों में लगाए गए थे




प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसौली छावनी में स्थानीय निवासियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। छावनी क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर 24 घंटे निगरानी रखने के उद्देश्य से करीब 14 लाख रुपये की लागत से 60 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। हालांकि, पिछले काफी समय से इनमें से कई कैमरों के बंद पड़े होने के कारण स्थानीय लोगों में भारी चिंता और रोष है। छावनी प्रशासन की ओर से क्षेत्र के अति-संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ये कैमरे स्थापित किए गए थे। इन कैमरों को लगाने का मुख्य मकसद असामाजिक और शरारती तत्वों पर लगाम कसना, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना था। कहां कहां लगे थे कैमरे छावनी बस स्टैंड हेरिटेज मार्केट ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च ध्यानचंद चौक पाइन मॉल रोड छावनी स्कूल सनसेट प्वॉइंट छावनी अस्पताल
पर्यटन सीजन में सुरक्षा पर गहराया संकट कसौली में साल भर देश और विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन सीजन के दौरान बाजारों, मॉल रोड और प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसी स्थिति में सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी अप्रिय घटना या विवाद की स्थिति बनती है, तो बंद कैमरों के कारण पुलिस और प्रशासन के पास जांच के लिए कोई फुटेज उपलब्ध नहीं हो पाएगी। इंटरनेट मॉनीटरिंग व्यवस्था पड़ी ठप प्रशासन द्वारा इन सभी 60 कैमरों को इंटरनेट से जोड़कर उनकी लाइव रिकॉर्डिंग और मॉनीटरिंग की विशेष व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य पूरे छावनी क्षेत्र की हलचल पर केंद्रीय स्तर से नजर रखना था। लेकिन कई कैमरों के लंबे समय से बंद रहने के कारण इस आधुनिक निगरानी प्रणाली का वास्तविक लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय निवासियों ने की तुरंत मरम्मत की मांग
स्थानीय निवासी राहुल, राजेश और मोहन सहित अन्य लोगों ने छावनी प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि बंद पड़े सभी कैमरों की तुरंत तकनीकी जांच करवाई जाए और उन्हें जल्द से जल्द चालू किया जाए। उन्होंने प्रशासन से कैमरों की नियमित मॉनीटरिंग और समय-समय पर मेंटेनेंस (रखरखाव) की स्थायी व्यवस्था बनाने की अपील की है, ताकि जनता के टैक्स के ₹14 लाख रुपये का वास्तविक लाभ क्षेत्र की सुरक्षा में मिल सके।



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