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Mental Health Day 2026 Interesting Facts; Mind Vs Hormones Chemical Reaction


जरा सोचिए कि एक ही घर है… वही माता-पिता, वही खाना-पीना, वही रहन-सहन, वही स्कूल। फिर भी कोई एक बच्चा हर नई चीज पर सबसे पहले कूद पड़ता है और दूसरा किनारे खड़ा होकर देखता रहता है। एक बच्चा छोटी बात पर भड़क जाता है, दूसरा चुप रहकर अंदर ही अंदर सोचता रहता

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कोई बहादुर है या डरपोक, जोशीला है या सुस्त; ये सब हमारे शरीर के भीतर का केमिकल लोचा है। वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर इसी केमिकल लोचे की दिलचस्प कहानी…

हमारी ऑवरऑल पर्सनालिटी मोटे-तौर पर तीन चीजों से तय होती है…

1. जीन: ये हमारे शरीर के ब्लूप्रिंट हैं। माता-पिता से मिलते हैं। यही हमारी शुरुआती क्षमताएं और झुकाव तय करते हैं। हालांकि किंग्स कॉलेज लंदन के बिहेवियरल जेनेटिसिस्ट प्रो. रॉबर्ट प्लोमिन के मुताबिक, जीन ये तय नहीं करते हैं कि हम क्या बनेंगे। ये सिर्फ शुरुआती झुकाव देता है।

2. बचपन का माहौलः जीन से मिले झुकाव को आकार माहौल से मिलता है। ब्रिटिश साइकोएनालिस्ट जॉन बॉल्बी की ‘अटैचमेंट थ्योरी’ के मुताबिक, जीवन के शुरुआती सालों में माता-पिता से मिलने वाला प्यार तय करता है कि बच्चा बड़ा होकर दूसरों पर भरोसा करेगा या हमेशा असुरक्षित महसूस करेगा।

तनाव और झगड़ों के बीच पले बच्चों के दिमाग का एमिग्डाला, यानी खतरा भांपने और इमोशन ट्रिगर करने वाला हिस्सा ओवर-एक्टिव हो जाता है। ऐसे बच्चे बड़े होकर छोटी-छोटी बातों पर तुरंत रिएक्ट करते हैं या चिड़चिड़े हो जाते हैं।

3. केमिकल रिएक्शन: दिमाग और शरीर में पल-पल होने वाले केमिकल रिएक्शन तय करते हैं कि हम किसी समय कैसा महसूस कर रहे हैं। इसके 2 अहम हिस्से हैं…

  • न्यूरोट्रांसमीटर्स: ये हमारे न्यूरॉन्स, यानी दिमाग के सेल्स के बीच चलने वाले सुपरफास्ट प्राइवेट मैसेज हैं। ये मिलीसेकंड्स में मूड, फोकस और तुरंत मिलने वाली खुशी को कंट्रोल करते हैं।
  • हॉर्मोन्स: ये हमारे दिमाग और शरीर की ग्रंथियों से निकलते हैं और खून के रास्ते पूरे शरीर में घूमते हैं। ये किसी कूरियर की तरह थोड़े धीमे चलते हैं, लेकिन लंबे समय तक असरदार रहते हैं।

इंसानी शरीर में अब तक 50 तरह के हॉर्मोन्स पहचाने जा चुके हैं। ये अलग-अलग ग्रंथियों जैसे- पिट्यूटरी, थायराइड, एड्रेनल, पैन्क्रियाज वगैरह में बनाए जाते हैं। रोजमर्रा के मूड और बर्ताव में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले 5 केमिकल्स की कहानी…

1. कुछ करने पर मजा आया, इसके पीछे डोपामिन है

  • कुछ करने में मजा आना, जोश और मोटिवेशन मिलना, ये सब डोपामिन कराता है। जैसे- मिठाई खाकर आपका मन कह दे- मजा आया।
  • इसे शरीर का रिवॉर्ड सिस्टम भी कहते हैं। डोपामिन दिमाग में बनता है। ये न्यूरोट्रांसमीटर और हॉर्मोन दोनों है।
  • डोपामिन घंटों पढ़ने, लंबे समय तक याद रखने और अच्छे मूड के लिए भी मोटिवेट करता है। लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं। मसलन- ड्रग्स, सिगरेट, जंकफूड, शराब वगैरह की लत पड़ना।

2. अगर प्यार उमड़ रहा, तो ऑक्सीटोसिन वजह है

  • यह दिमाग के हाइपोथैलेमस हिस्से में बनता है और पिट्यूटरी ग्रंथि के पिछले हिस्से से रिलीज होता है। ये इंसान के दिलो-दिमाग में प्यार की भावना जगाता है। इसलिए इसे ‘लव हॉर्मोन’ भी कहते हैं।
  • जब आप अपनों को गले लगाते हैं, बच्चे को दुलारते हैं, दोस्तों से बात करते हैं या किसी तरह का स्किन-टू-स्किन कॉन्टेक्ट करते हैं, तो यह रिलीज होकर प्यार, सुरक्षा और जुड़ाव महसूस कराता है।
  • इसके अलावा ये महिलाओं और पुरुषों के प्रजनन तंत्र के लिए जरूरी है। महिलाओं में प्रसव और स्तनपान के भी काम आता है।

3. मूड अच्छा करता है सेरोटोनिन

  • शरीर का 90% सेरोटोनिन आंतों में होता है और खाना पचाने में मदद करता है। बाकी 10% सेरोटोनिन दिमाग में बनता है और मूड अच्छा करता है।
  • जब यह शरीर में ठीक स्तर पर होता है, तो आप शांत, खुश और संतुष्ट महसूस करते हैं। साथ ही ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। लेकिन इसकी कमी से डिप्रेशन होता है। इंसान दुखी रहने लगता है।

4. डर और घबराहट के पीछे एड्रेनालिन

  • खतरे या अचानक चुनौती के समय दिमाग को सिग्नल जाता है और किडनी के ऊपर बनी एड्रेनल ग्रंथि से एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन हॉर्मोन निकलने लगते हैं।
  • इससे दिल की धड़कन और सांस तेज हो जाती है। शरीर को ‘लड़ो या भागो’ के लिए तैयार करता है। खतरा टलते ही हॉर्मोन का स्राव घटता है। इससे डर और खतरे की भावना शांत होने लगती है।

5. तनाव और चिंता झेलने में मदद करता है कोर्टिसोल

  • यह सुबह आपको जगाने से लेकर दिनभर के तनाव को झेलने में मदद करता है। रात होते-होते कम होने लगता है।
  • लेकिन अगर लंबे समय तक ये बढ़ा रहे, तो यह इंसान को थका हुआ, चिड़चिड़ा और उदास बना देता है। वजन बढ़ा देता है। नींद भी नहीं आती है।

1979 में अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट डॉ. थॉमस बुचार्ड ने अपनी टीम के साथ ‘मिनेसोटा ट्विन फैमिली स्टडी’ की। इसमें जुड़वा बच्चों का मनोवैज्ञानिक और शारीरिक अध्ययन किया गया। पता चला कि अलग-अलग परिवार और माहौल में पले-बढ़े होने के बावजूद, जुड़वां बच्चों के स्वभाव और व्यक्तित्व के लिए 40% जीन्स और 60% माहौल जिम्मेदार हैं। हालांकि जीन और माहौल से तैयार पर्सनालिटी को पल-पल चलाने वाले केमिकल ही होते हैं। इसीलिए तो कहते हैं, ‘सब केमिकल लोचा’ है।

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