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- Vijayshankar Mehta Column: Navratri Power & Pitru Shakti Significance
59 मिनट पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
आज हम रिश्तों की पूर्णता का दिवस मना रहे हैं, जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। हम जिनका अंश हैं, वंश हैं, उनको स्मरण करने का यह दिन है। और इसी के साथ हम प्रवेश कर जाएंगे नवरात्र में। पितृ हमारी शक्ति का स्रोत हैं और नवरात्र शक्ति के सदुपयोग के दिन हैं। संयोग से नवरात्रि के प्रथम दिन अग्रसेन जयंती है, जिन्होंने अपने पितरों के संबंध और अपनी शक्ति के सदुपयोग के नए मापदंड गढ़े।
महाराजा अग्रसेन अपने-आप में एक विश्वविद्यालय हैं, जिसमें परंपरा और आधुनिकता की शिक्षा एक साथ चलती है। नवरात्रि में हम सीखते हैं कि प्राणों का भरपूर उपयोग कैसे किया जाए। योग में व्यक्त है कि जब हमारी सांस अंदर आती है तो उसमें ईश्वर विराजता है और जब बाहर जाती है तो ईश्वर में हम विलीन हो जाते हैं।
विराजना और विलीन होना, ये दो शब्द समझें। प्राणों का सदुपयोग करिए। आती-जाती सांस के प्रति जागरूक हो जाएं तो हमारे शरीर के जो सात शक्ति केंद्र हैं, उनमें कंपन होगा और हमारे लिए यह नौ दिन सार्थक हो जाएंगे।

