जल जीवन मिशन (जेजेएम) में काम के बदले रिश्वत लेने वाले सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर (एसई) अनिल कच्छावा की बैंक डिटेल्स ने जांच में जुटे ACB अधिकारियों को भी चौंका दिया।
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इंजीनियर से जुड़े 30 से ज्यादा बैंक अकाउंट और एफडी की जांच की तो सैलरी से 253% ज्यादा संपत्ति मिली। काली कमाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंजीनियर ने 50 लाख का लोन महज 9 महीने में चुका दिया।
कच्छावा को डूंगरपुर में पोस्टिंग के दौरान ढाई करोड़ रुपए के काम के बदले बिल पास करने के एवज में 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

सैलरी और खर्च का अनुमानित कैलकुलेशन इंजीनियर की 37 साल की सर्विस के आधार पर है।
बिल अटकाकर मांगी 5 लाख की रिश्वत
जलदाय विभाग ने 2021-22 में संबंधित कम्पनी से जेजेएम के तहत काम करवाए थे। एसई अनिल कच्छावा ने 2024 तक बिल अटकाए रखा और 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी।
शिकायत मिलने के बाद दिसम्बर, 2024 में ACB ने एसई को पकड़ने का जाल बिछाया। इंजीनियर 3 लाख लेने पर सहमत हो गया।
2 लाख रुपए की पहली किस्त लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके बाद ACB ने उसके घर की तलाशी ली। 9.22 लाख रुपए कैश और कई दस्तावेज जब्त किए।
डॉक्यूमेंट्स की जांच हाल ही में पूरी हुई। इसके बाद इंजीनियर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक और FIR दर्ज कर ली है।

इंजीनियर के कोटा के घर में भी तलाशी के दौरान एसीबी को रिश्वत से जुड़े काफी सबूत मिले हैं।
37 साल की नौकरी में बनाई 5.84 करोड़ की संपत्ति
डूंगरपुर में तैनाती के समय किराए के मकान और कोटा स्थित घर की तलाशी में मिले दस्तावेजों की जांच में पता चला कि अनिल कच्छावा की जलदाय विभाग में पहली नियुक्ति अगस्त, 1989 में हुई थी।
कच्छावा का सामान्य परिवार था। पिता के पास भी संपत्ति के नाम पर कुछ खास नहीं था। कार्रवाई के दौरान कोटा स्थित मकान की तलाशी में ही 9.22 लाख रुपए बरामद हुए थे।
कैश के बारे में सवाल-जवाब के दौरान कच्छावा और उसकी पत्नी कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाए थे। इसके अलावा 1.19 करोड़ के दो प्लॉट के दस्तावेज भी ACB को मिले।
घर से मिले गहनों की कीमत करीब 4 लाख रुपए आंकी गई थी। कोटा के राजीव गांधी नगर में 1.12 करोड़ रुपए कीमत का 2840.64 वर्गफीट का प्लॉट, आरके पुरम में 6 लाख का प्लॉट।
बैंक अकाउंट, एफडी और तमाम प्रॉपर्टी जोड़ने पर सामने आया कि कच्छावा ने करीब 5.84 करोड़ की संपत्ति जुटा ली थी।
30 से ज्यादा बैंक खाते
ACB सूत्रों के अनुसार इंजीनियर कच्छावा के खुद, पत्नी सहित अन्य परिजनों के नाम करीब 2 करोड़ से ज्यादा की एफडी और 30 से ज्यादा बैंक खातों में लाखों रुपए की सेविंग हैं।


सालों में चुकाया जाने वाला लोन, 9 महीने में पूरा
आम तौर पर लोन लेकर आम आदमी सालों किस्त भरता है, लेकिन इंजीनियर ने 50 लाख रुपए का लोन केवल 9 महीने में चुका दिया।
ACB के अनुसार कोटा की बैंक ऑफ इंडिया से फरवरी, 2020 में 50 लाख का लोन लिया गया था। इसके बाद नवंबर 2020 में आरोपी ने पूरा लोन ब्याज सहित एक बार में चुका दिया।
उसने 51,40,204 रुपए बैंक में जमा करवाए गए। लोन के तहत 140204 रुपए ब्याज दिया गया।

इंजीनियर अनिल कच्छावा का कोटा स्थित घर। यहां एसीबी की टीम ने कई दिन सर्च किया।
पत्नी की कमाई और किराए को लेकर भी झूठ
ACB सूत्रों के अनुसार लाखों की एफडी और बैंक अकाउंट से जुड़े दस्तावेज सामने आए तो कच्छावा की पत्नी ने अधिकारियों से कहा कि उसने ब्यूटीपार्लर का कोर्स किया हुआ है।
उसी की कमाई है। हालांकि जांच में ब्यूटीपार्लर के कोर्स से संबंधित कोई डॉक्यूमेंट्स नहीं मिले। जांच में पता लगा कि इंजीनियर की पत्नी ने जो खुद की आय बताई, वह असल में अवैध कमाई से किया हुआ इंवेस्टमेंट था।
वहीं, कच्छावा ने ACB अधिकारियों से कहा कि उसकी मां की आमदनी और कोटा के घर के किराए से इंवेस्टमेंट किया था। ACB ने मां के खातों की भी जांच की।
उससे साफ हो गया कि मां की इतनी इनकम नहीं है। वहीं कोटा का मकान इतना बड़ा नहीं है कि खुद के परिवार के रहने के साथ उसे किराये पर दिया जा सके।
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