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मिडलाइफ के वर्षों (मोटे तौर पर 36-60 वर्ष) में आप अपने शरीर और दिमाग को कैसे ट्रीट करते हैं, उसका व्यापक असर इस बात पर पड़ सकता है कि आगामी दशकों में आपकी उम्र कैसे बढ़ेगी। संक्षेप में कहें तो मिडलाइफ हेल्थ आपके भविष्य की एक झलक है। मिडिल एज में आप जो बीज बोते हैं, जैसे एक्सरसाइज, हेल्दी खाना और अच्छा स्लीपिंग पैटर्न, वो आपके लंबे जीने में अहम भूमिका निभाते हैं। बुजुर्ग होने को लेकर आपकी धारणाएं महज साइकोलॉजिकल नहीं होती, वे शरीर में फिजिकली दिखती भी हैं। जी हां, इसके वैज्ञानिक प्रमाण बढ़ रहे हैं कि मिडलाइफ में हेल्थ मार्कर्स आगामी जीवन की सेहत का अनुमान लगाने के लिए सच में बहुत कारगर होते हैं, बजाय इसके कि इन्हीं मार्कर्स को तब मापा जाए, जब आप बुजुर्ग हो चुके हों। इसके अलावा, मिडिल एज में रहे हमारे हेल्थ-इंडिकेटर्स, लाइफस्टाइल और माइंडसेट एक अहम बुनियाद की तरह काम करते हैं, जो सीधे तौर पर हमारी आगे की जिंदगी की हेल्थ, कॉग्निशन और लॉन्जेविटी को प्रभावित करती है। आपके भविष्य की फिजिकल और कॉग्निटिव फंक्शनिंग का काफी हद तक अनुमान लगाने वाले प्रमुख मिडलाइफ इंडीकेटर्स में जो चीजें शामिल हैं, वे हैं- ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल लेवल, लंग फंक्शन और फिजिकल फिटनेस, ग्लूकोज लेवल और वजन तथा नींद की गुणवत्ता। यह बात हम भारतीयों के लिए अब ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों है? क्योंकि भारत की आबादी अभी भी अपेक्षाकृत युवा है और यहां औसत उम्र करीब 29.2 वर्ष है। देश की आबादी का विशाल हिस्सा- 65% से ज्यादा- 40 से कम उम्र का है। ऐसा कौन कहता है? डॉ. मार्गी लैचमैन ने अपनी हालिया किताब ‘प्राइमटाइम : अ न्यू विजन फॉर मिडलाइफ’ में मिडिल-एज पॉपुलेशन पर हुई 30 साल की रिसर्च के आधार पर बताया है कि मिडलाइफ आपकी बाकी जिंदगी के लिए सबसे महत्वपूर्ण मोड़ क्यों है। वह क्या कहती हैं? डॉ. लैचमैन की रिसर्च बताती है कि जो लोग अपनी मिडलाइफ में नियंत्रण की मजबूत भावना और एजिंग को लेकर सकारात्मक नजरिया बनाए रखते हैं, उम्र बढ़ने के साथ उनकी कॉग्निटिव फंक्शनिंग और फिजिकल हेल्थ बेहतर रहती है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को मेंटेन रखने से लेकर लंग फंक्शन बेहतर रखने, ग्लूकोज लेवल, स्लीप क्वालिटी और वजन पर नियंत्रण रखने तक फिजिकल फिटनेस की निगरानी बनाए रखना सबसे जरूरी है। यह रिसर्च सेहत में सुधार के लिए ‘मिडटर्म’ अपॉर्च्युनिटी की बात भी करती है। डॉ. लैचमैन कहती हैं कि ‘मिडलाइफ बदलाव करने का सबसे सही समय है। इससे न सिर्फ वर्तमान, बल्कि भविष्य में भी आपको फायदा होगा।’ इसे समझाने के लिए वे पढ़ाई का उदाहरण देती हैं। उनके मुताबिक मिडलाइफ कॉलेज के मिडटर्म की तरह है। यह ऐसा मोड़ है, जहां आप आकलन कर सकते हैं कि क्या चीज कारगर है और क्या नहीं। चूंकि आपके पास अब भी ‘आधा सेमेस्टर’ यानी जिंदगी के कई दशक हाथ में हैं, इसलिए मिडलाइफ में शुरू किए गए लाइफस्टाइल और बिहेवियरल इंटरवेंशन भविष्य में आपकी सेहत को बहुत बेहतर करने के लिए जरूरी आधार देते हैं। मिडलाइफ जीवन की ढलान या न टाले जा सकने वाले ‘क्राइसिस’ नहीं, बल्कि ‘प्राइम टाइम’ है- यानी भविष्य की रक्षा करने के लिए सोचे-समझे निर्णय करने का सबसे अच्छा समय। मिडलाइफ की छोटी-छोटी अच्छी आदतें कौन सी हैं? विशेषज्ञों ने बहुत-सी आदतें बताई हैं, उस लंबी सूची में से कुछ यहां पेश हैं। दोस्त के साथ रोजमर्रा के काम निपटाएं : अकसर लोग सामाजिक मेलजोल को वेलनेस इंटरवेंशन नहीं मानते। मिडलाइफ की हकीकत यह है कि किसी व्यस्त दोस्त के साथ समय मिलाकर कोई काम करना तो दूर, खुद के लिए समय निकालना भी मुश्किल होता है। वॉक या वर्कआउट के लिए किसी दोस्त को जॉइन करें या उसके साथ किराना खरीदने ही चले जाएं। फर्मेंटेड फूड खाएं : मत भूलिए कि आपके शरीर में खरबों सूक्ष्मजीव, यानी माइक्रोबायोम रहते हैं। इन माइक्रोबायोम की सेहत का संबंध आपकी हेल्दी एजिंग से है। यह इम्यून सिस्टम से गहराई से जुड़ा है और शरीर में इन्फ्लेमेशन को नियंत्रित करने में मदद करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि उन जीवों की देखभाल के लिए उन्हें फर्मेंटेड फूड खिलाएं। विशेषज्ञ कहते हैं कि सीढ़ियां चढ़ने से लेकर रोज के खाने में कुछ प्रोटीन शामिल करने तक, रोजाना रात को एक ही समय पर सोने से लेकर गंभीर बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री के बारे में अवेयर रहने और उनकी रोकथाम पर काम करने तक की आदतें अपनाएं, जो आपकी आगे की उम्र को बेहतर बनाएंगी। फंडा यह है कि मिडिल एज में आप अपनी देखभाल कैसे करते हैं, यह आपकी आगे की उम्र के लिए बहुत मायने रखता है। कुछ छोटी लेकिन अच्छी आदतें भी रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंचने पर बड़ा फर्क ला सकती हैं।
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एन. रघुरामन का कॉलम:मिडलाइफ में होने वाली चीजों का असर वहीं तक सीमित नहीं रहता
