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बालाघाट जिले के बिरसा थाना क्षेत्र में एक ही एमबीबीएस डिग्री पर दो अलग-अलग लोग 15 साल से ज्यादा समय से सरकारी डॉक्टर की नौकरी कर रहे थे। राज्य स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद बिरसा पुलिस ने तत्कालीन बीएमओ डॉ. सुनील सिंह के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हथियाने के आरोप में केस किया है। दरअसल, इस फर्जीवाड़े का खुलासा सबसे पहले दैनिक भास्कर की पड़ताल में हुआ था। पड़ताल में सामने आया था कि एक ही नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, मेडिकल कॉलेज, डिग्री का साल और कोर्स की जानकारी का इस्तेमाल कर दो डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे थे। दोनों ने वर्षों तक सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए वेतन उठाया, अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया और अपनी निजी क्लिनिक भी चलाया। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग को इतने लंबे समय तक इस धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगी। पड़ताल के दौरान सामने आया कि देवास में पदस्थ असली डॉ. सुनील सिंह के नाम और दस्तावेजों का सहारा लेकर फर्जी डॉ. सुनील सिंह बालाघाट में बिरसा बीएमओ के पद तक पहुंच गया था। फर्जी डॉक्टर के दस्तावेजों में गृह जिला कभी मुरैना, कभी रीवा तो कभी बालाघाट दर्ज था। इसके अलावा उसके पास परमानेंट रजिस्ट्रेशन का कोई रिकॉर्ड नहीं था, सिर्फ प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के कागज जमा थे। मेडिकल काउंसिल की जांच में जब सच सामने आया, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। जांच के बाद पुलिस ने दर्ज की एफआईआर जांच समिति के प्रतिवेदन और पेश किए गए अभिलेखों के परीक्षण के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। जांच में पाया गया कि देवास में पदस्थ डॉक्टर के असली कागजात की नकल और फर्जी दस्तावेज तैयार कर आरोपी ने सरकारी नौकरी हासिल की थी। राज्य स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर बिरसा पुलिस ने आरोपी डॉ. सुनील सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामला कायम कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले पूर्व बीएमओ पर FIR:2012 में हुई थी संविदा नियुक्ति, गृह जिला कभी मुरैना, कभी रीवा-बालाघाट बताया
