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एन. रघुरामन का कॉलम:अच्छे इनोवेटर्स आम चीजों पर ध्यान देकर इतिहास रचते हैं!




कई बार हमारे युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के पैरेंट्स को अपने साथियों से ऐसे शब्द सुनकर गर्व महसूस हुआ होगा कि ‘वाह, आपका बच्चा तो ब्रिलियंट होगा! उन इंटरव्यूज में सफल होना आसान नहीं!’ या फिर किटी पार्टी में महिलाएं कहती होंगी, ‘अरे, अब तो उनकी लाइफ पूरी तरह से सेट है! यह बहुत बड़ी उपलब्धि है!’ या फिर हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले परिचित लिफ्ट के भीतर टिप्पणी करते होंगे, ‘आपको उन पर कितना गर्व होता होगा! वे ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल पूरी दुनिया हर दिन करती है।’ इसके लिए हम सभी को उन महिला का आभारी होना चाहिए, जिन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित, आकर्षक वेतन वाले और सम्मानित पेशों में से एक बनाने में योगदान दिया। आइए, उनकी कहानी जानते हैं। 1965 में वे गणित में पीएचडी करने की तैयारी कर रही थीं। तभी उनके पति की नजर एमआईटी इंस्ट्रूमेंटेशन लेबोरेटरी के एक विज्ञापन पर पड़ी। संस्थान ऐसे लोगों की तलाश में था, जो मनुष्य को चांद पर भेजने के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर विकसित कर सकें। उन दिनों कोड लिखने को वास्तविक इंजीनियरिंग के बजाय अकसर मामूली काम समझा जाता था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई की योजना छोड़ दी और अपोलो परियोजना की पहली और एकमात्र महिला प्रोग्रामर बन गईं। इस अवधि में वे एक सिंगल-मदर के रूप में बेटी लॉरेन को अपने साथ काम पर ले जाया करती थीं। एक रात लॉरेन एस्ट्रोनॉट बनकर खेल रही थी। मार्गरेट ने उसे उस हार्डवेयर सिम्युलेटर पर खेलने दिया, जिस पर वे काम कर रही थीं। खेलते-खेलते लॉरेन ने गलती से कुछ बटन दबा दिए और नेविगेशन से जुड़ा सारा डेटा मिट गया। लेकिन मार्गरेट को इस पर गुस्सा नहीं आया। उन्हें एहसास हुआ कि कोई अंतरिक्ष यात्री भी अनजाने में ऐसी ही गलती कर सकता है। अब सीधे 20 जुलाई, 1969 पर आते हैं। अपोलो-11 मिशन पर गए तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर कदम रखने वाले पहले मनुष्य बनने से कुछ ही मिनट दूर थे। (इनमें 2 चांद की सतह पर उतरे, 1 लूनर ऑर्बिट में मौजूद थे), तभी उनके लूनर मॉड्यूल में अलार्म बजने लगे। इससे उस ऐतिहासिक क्षण के विफल हो जाने का खतरा पैदा हो गया, जबकि दुनिया भर में उसका सीधा प्रसारण चल रहा था। चांद की सतह पर उतरते समय लूनर मॉड्यूल ‘ईगल’ को अपनी ऊंचाई और गति की गणना करने के लिए केवल लैंडिंग रडार की जरूरत थी। उसे रैंदेवू रडार की जरूरत नहीं थी। इस रडार का इस्तेमाल ऊपर की कक्षा में चक्कर लगा रहे कमांड मॉड्यूल की स्थिति पर नजर रखने के लिए किया जाता था। प्रोग्रामिंग क्षेत्र की पुरोधा मार्गरेट हैमिल्टन इस संकट की आशंका को पहले ही भांप चुकी थीं। उन्हें इसका सबक अपनी बेटी की उस गलती से मिला था। यही कारण था कि हैमिल्टन के सॉफ्टवेयर ने इस गलती को दुरुस्त कर लैंडिंग को निर्बाध होने दिया। जब मिशन कमांडर नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद से वह प्रसिद्ध घोषणा की कि ‘द ईगल हैज़ लैंडेड’, तो कई हाथ तालियां बजाने के लिए जरूर उठे, लेकिन अनेक निगाहें मार्गरेट हैमिल्टन की ओर भी मुड़ गईं। 2016 में जब बराक ओबामा ने मार्गरेट को अमेरिका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम’ से सम्मानित किया, तो उन्होंने कहा- ‘20 जुलाई, 1969 को हमारे अंतरिक्ष यात्रियों के पास ज्यादा समय नहीं था। लेकिन शुक्र है कि उनके पास मार्गरेट हैमिल्टन थीं!’ उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के काम की ओर लोगों का ध्यान खींचा। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मैंने सॉफ्टवेयर को एक वैध इंजीनियरिंग क्षेत्र के रूप में मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष किया, ताकि सॉफ्टवेयर और उसे बनाने वालों को उनका उचित सम्मान मिल सके।’ उन्होंने यह भी माना था कि जब उन्होंने ‘सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग’ शब्द का इस्तेमाल शुरू किया, तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे। 30 सितम्बर, 2026 को 90 वर्ष की उम्र में मैसाचुसेट्स के कैम्ब्रिज स्थित एक अस्पताल में मार्गरेट का निधन हो गया। फंडा यह है कि रोजमर्रा की जिन चुनौतियों पर अकसर किसी का ध्यान तक नहीं जाता, स्चे इनोवेटर्स उन्हें ही मानव प्रगति के ऐतिहासिक पड़ावों में बदल देते हैं। न भूलें कि एक मां की पैनी नजर और अथक समर्पण आधुनिक तकनीक के भविष्य को भी आकार दे सकते हैं।



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