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पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के 909 बैच के सेवानिवृत्त पंचायत सचिवों ने 25 वर्ष तक नौकरी करने के बावजूद पेंशन न मिलने और सीपीएफ (कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड) कटौती में अनियमितताओं को लेकर विभागीय रवैये पर कड़ा रोष जताया है। अपनी समस्याओं को लेकर जग्गा सिंह सिद्धू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मोहाली स्थित विभागीय मुख्यालय में ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक तथा उपनिदेशक हरमंदीप सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। सीपीएफ कटौती की अलग-अलग तारीखों पर उठाए सवाल प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जग्गा सिंह सिद्धू ने बताया कि 909 बैच के पंचायत सचिव ‘जिला परिषद एवं पंचायत समिति कर्मचारी पेंशन तथा सीपीएफ नियम, 2000’ के तहत पेंशन के हकदार हैं। नियमों के अनुसार 10 वर्ष की सीपीएफ कटौती अनिवार्य है, लेकिन बीडीपीओ (BDPO) कार्यालयों में सुपरिंटेंडेंटों और लेखाकारों ने सीपीएफ कटौती अलग-अलग तारीखों से शुरू की। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘पंजाब कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड नियम, 1978’ के तहत यह कटौती सेवा के पहले दिन से ही शुरू होनी चाहिए थी। 17 से 25 साल सेवा, फिर भी बुढ़ापे में गुजर-बसर की मजबूरी कर्मचारियों ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि लगभग 17 से 25 वर्षों तक सेवा देने के बाद वे सेवानिवृत्त हुए हैं। 18 से 20 वर्ष तक नौकरी करने के बावजूद कई कर्मचारियों को कोई पेंशन नहीं मिल रही है। 20 से 25 वर्ष की सेवा देने वाले कई कर्मचारियों को मात्र 10 से 12 वर्ष की सेवा मानकर ही पेंशन दी जा रही है। इस अव्यवस्था के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बुढ़ापे के इस पड़ाव में अपने परिवारों का भरण-पोषण करने में भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन मुलाकात के दौरान विभाग के निदेशक और उपनिदेशक हरमंदीप सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को ध्यानपूर्वक सुना और भरोसा दिलाया कि 909 बैच के सेवानिवृत्त पंचायत सचिवों की सीपीएफ और पेंशन संबंधी समस्याओं का जल्द से जल्द न्यायसंगत समाधान किया जाएगा। इस अवसर पर जयदेव सिंह आहलूवालिया (प्रधान), निर्मल सिंह खरड़, बलजिंदर सिंह बुढलाडा, कुलदीप सिंह बलाचौर, माखन सिंह मानसा, महेश इंद्रपाल, सुरजीत सिंह, जैल सिंह हरसा छीना, सुनील कुमार बठिंडा, संजीव कुमार वशिष्ट और रामपाल सिंह सहित कई अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारी उपस्थित रहे।
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पंजाब में 1990 बैच के पंचायत सचिवों को पेंशन नहीं:25 साल बाद भी नहीं मिला लाभ, सीपीएफ कटौती की तारीखों पर सवाल
