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दुर्गाबाड़ी मोहल्ले में बंगाली रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना:अध्यक्ष से लेकर कोषाध्यक्ष तक की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही; 95 साल से हो रहा आयोजन




गयाजी के दुर्गाबाड़ी मोहल्ले में दुर्गा पूजा इस बार कुछ अलग होगी। 95 साल पुरानी परंपरा के तहत बंगाली रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की जाएगी, लेकिन आयोजन की पूरी कमान महिलाओं के हाथ में होगी। अध्यक्ष से लेकर सचिव और कोषाध्यक्ष तक की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही हैं। पूजा की तैयारी से लेकर व्यवस्था तक का काम वे खुद कर रही हैं। पुरुष सदस्य सहयोग कर रहे हैं। दुर्गाबाड़ी में बंगाली समुदाय की ओर से करीब 95 वर्षों से मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। हर साल यहां बंगाली परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना होती है। गयाजी के अलावा दूसरे शहरों में रहने वाले पुराने सदस्य भी इस आयोजन में शामिल होने पहुंचते हैं। इस बार समिति ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सभी पदों की जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपने का फैसला लिया है। समिति की सहमति से यह पहल की गई है।
पहली बार सभी जिम्मेदारी संभाल रही महिलाएं समिति की सचिव सुस्मिता बोस ने बताया कि दुर्गाबाड़ी की दुर्गा पूजा करीब 95 साल पुरानी है। हर साल पूजा अच्छे तरीके से आयोजित होती है। शहर से बाहर रहने वाले लोग भी इस आयोजन में शामिल होने के लिए लौटते हैं। इस बार सबकी सहमति से महिलाओं को पूरी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया। यह उनके लिए एक नई पहल है। इसमें चुनौतियां भी हैं और बहुत कुछ सीखने का मौका भी मिल रहा है। पूजा को सफल बनाने के लिए सभी महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं। बंगाली समाज के साथ गया के सभी निवासियों और श्रद्धालुओं को पूजा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। घर के काम के बाद पूजा की तैयारी समिति की अध्यक्ष भट्टाचार्य ने बताया कि महिलाओं को जिम्मेदारी मिलने के बाद सभी में नया जोश और उत्साह है। जब से पुरुषों को पता चला कि इस बार महिलाएं ही पूजा का पूरा काम संभालेंगी, वे भी सहयोग कर रहे हैं। पुरुष सदस्य पहले से आयोजन का अनुभव रखते हैं। उनके अनुभव से भी महिलाएं सीख रही हैं। महिलाएं घर की जिम्मेदारियां निभाने के बाद भी पूजा की तैयारी के लिए समय निकाल रही हैं। सभी मिलकर आयोजन को सफल बनाने में जुटी हैं। पुरुषों का सहयोग, महिलाओं के लिए सीखने का मौका समिति की कोषाध्यक्ष स्मिता चक्रवर्ती ने बताया कि पहले पूजा के आयोजन में पुरुष और महिलाएं मिलकर काम करते थे। इस बार पहली बार महिलाएं मिलकर सभी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। पुरुष सदस्य पीछे से पूरा सहयोग कर रहे हैं। कामकाज संभालने के दौरान उन्हें पुराने सदस्यों के अनुभव से सीखने का मौका भी मिल रहा है। दुर्गाबाड़ी समिति की यह पहल धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ महिलाओं को नेतृत्व का अवसर भी दे रही है। 95 साल से चली आ रही पूजा में इस बार महिलाओं की भूमिका सबसे खास होगी।



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