![]()
कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में तैनात रहे अस्थाई आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने नौकरी में बहाली की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। पिछले आठ दिन से धरने पर बैठे कोविड योद्धाओं ने मंगलवार को सांकेतिक रूप से अपनी डिग्रियां जलाकर विरोध जताया। इस दौरान नारेबाजी की गई और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि महामारी के दौरान सरकार ने उनसे सेवाएं लीं, लेकिन संकट कम होते ही बजट का हवाला देकर नौकरी से हटा दिया। अब वे स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति और दोबारा रोजगार देने की मांग कर रहे हैं। बोले- नौकरी नहीं मिल रही तो डिग्रियां रखकर क्या करेंगे कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि कोरोना काल में कर्मचारियों ने मुश्किल परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय उन्हें कोविड योद्धा कहा गया, लेकिन बाद में बजट का हवाला देकर नौकरी से बाहर कर दिया गया। डॉ. पटेल ने कहा, “अब हमारी डिग्रियां किसी काम की नहीं रह गई हैं। जब नौकरी ही नहीं मिल रही तो डिग्रियां रखकर क्या करेंगे?” उन्होंने आरोप लगाया कि आठ दिन से कर्मचारी धरने पर बैठे हैं, लेकिन शासन का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा है। कोरोना काल में 4 हजार कर्मचारी हुए थे नियुक्त डॉ. पटेल के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश में करीब 4 हजार आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक और पैरामेडिकल कर्मचारियों को अस्थाई तौर पर नियुक्त किया गया था। इनमें लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, साइंटिस्ट सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल थे। उनका दावा है कि अब इनमें से करीब 2 हजार से 2500 कर्मचारी ही बचे हैं। बाकी लोग पिछले तीन साल में कहीं न कहीं रोजगार से जुड़ गए हैं। संगठन का कहना है कि नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों के भविष्य को लेकर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। मेरिट के आधार पर हुई थीं नियुक्तियां संघ के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सकीय मानव संसाधन की कमी दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से अस्थाई नियुक्तियां की गई थीं। इसके लिए 23 मार्च 2020 को आदेश जारी हुआ था। जिला स्वास्थ्य समितियों के जरिए मेरिट के आधार पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति की मांग कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों पर कोरोना काल में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को संविदा नियुक्ति दी जाए। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी और मरीजों को भी लाभ होगा। डॉ. पटेल ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन राज्यों में कोरोना काल में काम करने वाले कर्मचारियों को दोबारा रोजगार दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में ऐसा हो सकता है तो मध्यप्रदेश में कर्मचारियों को अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा। बोले- गांवों में भेजिए, स्वास्थ्य सेवाओं में देंगे योगदान डॉ. पटेल ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकीय स्टाफ के कई पद रिक्त हैं, ऐसे में अनुभवी कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं। उन्होंने कहा, “सरकार कहती है कि डॉक्टर नहीं हैं, हम डॉक्टर हैं। हमें गांवों में भेजिए।” संघ ने अपने ज्ञापन में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्रों का भी हवाला दिया है। संगठन का कहना है कि इन पत्रों में मामले को राज्य सरकार से संबंधित बताया गया है। कोविड योद्धाओं ने सरकार से जल्द निर्णय लेकर बहाली और संविदा नियुक्ति का रास्ता निकालने की मांग की है।
Source link
कोविड में सेवा देने वाले आयुष डॉक्टरों ने जलाईं डिग्रियां:बोले-नौकरी नहीं तो इनका क्या करेंगे? मप्र सरकार भी रिक्त पदों पर दे संविदा नियुक्ति
