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पंजाब में लगातार बढ़ रहे कैंसर के खतरनाक मामलों को देखते हुए राज्य सरकार एक्शन मोड में आ गई है। सरकार ने इस बीमारी को ‘महामारी रोग अधिनियम, 1897’ ‘नॉटिफिएबल डिजीज’ घोषित किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब पंजाब के किसी भी मेडिकल संस्थान में कैंसर डिटेक्ट होने पर सरकार से छिपाया नहीं जा सकेगा, बल्कि मरीज की सूचना स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंधी नोटिफिकेशन जारी कर दी है। अब तीन प्वाइंटों में जानिए इस सारे मामले को 1. जानकारी छिपाने पर जेल भी हो सकती : सरकार द्वारा जारी नियमों का उल्लंघन करने या किसी भी कैंसर केस की रिपोर्ट दबाने पर महामारी रोग अधिनियम, 1897 की धारा-3 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई (जिसमें जुर्माना और जेल का प्रावधान है) की जाएगी। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 2. हर छोटे-बड़े क्लिनिक और इंश्योरेंस कंपनी भी शामिल: यह नियम सिर्फ बड़े सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों (जैसे PGI, AIIMS, ईएसआई, रेलवे या होमी भाभा कैंसर सेंटर) पर ही नहीं, बल्कि गली-मोहल्लों के प्राइवेट क्लिनिक्स, नर्सिंग होम, आयुष (AYUSH) अस्पतालों, सभी पैथोलॉजी-रेडियोलॉजी लैब्स, मरीजों का रिकॉर्ड रखने वाले एनजीओ (NGOs) और यहां तक कि कैंसर क्लेम पास करने वाली इंश्योरेंस कंपनियों पर भी अनिवार्य रूप से लागू होगा। 3. हर महीने सिविल सर्जन को रिपोर्ट : राज्य के सभी चिकित्सा संस्थानों को एक समर्पित ‘कैंसर रजिस्टर’ बनाना होगा और हर महीने अपने जिले के सिविल सर्जन को इसकी रिपोर्ट भेजनी होगी। हालांकि, मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है; सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीज की पहचान और मेडिकल डेटा को 100% गोपनीय रखा जाएगा। इसका उपयोग केवल रिसर्च, आईसीएमआर (ICMR) को रिपोर्ट भेजने और कैंसर से लड़ने की नीतियां बनाने के लिए होगा।
अब सरकार की तरफ से ऐसे यह कानून लागू किया जाएगा
1. बनेगा डिजिटल पोर्टल (खुद को रजिस्टर करना अनिवार्य): स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, पंजाब इसके लिए एक समर्पित और अत्याधुनिक ऑनलाइन पोर्टल विकसित कर रहा है। राज्य के सभी क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (चाहे वे अस्पताल हों, लैब्स हों या इमेजिंग सेंटर) को इस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा और कैंसर मरीजों के हर छोटे-बड़े केस की पूरी डिटेल (निर्धारित फॉर्मेट में) ऑनलाइन फीड करनी होगी। 2. डाटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय: मरीजों की प्राइवेसी को लेकर सरकार ने साफ किया है कि अधिसूचना के तहत जुटाई गई मरीजों की सभी जानकारियां, बीमारी का रिकॉर्ड और पहचान पूरी तरह से सुरक्षित रखी जाएगी। सभी रिपोर्टिंग संस्थानों के लिए डेटा प्रोटेक्शन और एथिकल स्टैंडर्ड का पालन करना जरूरी होगा। इस डेटा का इस्तेमाल सिर्फ पब्लिक हेल्थ सर्विलांस, रिसर्च और पॉलिसी बनाने के लिए होगा, जिसे एक टेक्निकल कमेटी द्वारा एनालिसिस करने के बाद ‘स्टेट कैंसर रजिस्ट्री’ के रूप में आईसीएमआर (ICMR) और भारत सरकार के साथ साझा किया जाएगा।
3. सिविल सर्जन करेंगे मॉनिटरिंग : हर जिले के सिविल सर्जन को इस पूरे सिस्टम की जमीनी मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाला हर कैंसर डायग्नोसिस सेंटर या अस्पताल पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो और हर महीने ऑनलाइन रिपोर्टिंग कर रहा हो। वहीं, राज्य स्तर पर ‘मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष’ योजना के जरिए इस ऐतिहासिक फैसले को लागू कराने और डेटा संकलन के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण निदेशालय, पंजाब मुख्य नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी 70 के करीब लोगों की मौत कैंसर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 10 मार्च 2026 को राज्यसभा में पेश की गई नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCPR – ICMR) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में कैंसर की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां वर्तमान में सालाना 43,196 नए मामले सामने आ रहे हैं और हर साल करीब 24,886 लोगों की मौत हो रही है। इस सरकारी आंकड़े के मुताबिक राज्य में रोजाना औसतन 68 से 70 मरीज दम तोड़ रहे हैं, जिसमें बठिंडा (मालवा क्षेत्र का कैंसर बेल्ट), अमृतसर, लुधियाना और संगरूर सबसे गंभीर रूप से प्रभावित जिले हैं। जमीन व पीने के पानी में भारी धातुओं के प्रदूषण और खेती में अत्यधिक कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल को इस बीमारी की मुख्य वजह माना गया है। इस संकट से निपटने के लिए पंजाब सरकार मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष के तहत मरीजों को ₹1.5 लाख तथा मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना के तहत ₹10 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज दे रही है, जिसकी सुविधा होमी भाभा कैंसर अस्पताल (मोहाली व संगरूर), एम्स (बठिंडा) और पीजीआई (चंडीगढ़) जैसे बड़े कैंसर अस्पतालों में उपलब्ध है।
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कैंसर मरीजों की जानकारी छिपाई तो जाना पड़ेगा जेल:बीमारी नॉटिफिएबल डिजीज घोषित, सेहत विभाग पोर्टल बनाएगा; अस्पतालों-लैबों पर नियम लागू
