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Antifungal Drug WHO Warning; Fungal Infection Prevention


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15 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने दुनिया को एक खामोश खतरे से आगाह किया है। यह खतरा किसी वायरस का नहीं, बल्कि फंगल इन्फेक्शन का है।

WHO के मुताबिक, दुनिया में हर साल 30 करोड़ से ज्यादा लोगों को फंगल इन्फेक्शन होता है। इसके इलाज के लिए एंटीफंगल दवाएं दी जाती हैं। चिंता की बात यह है कि ये दवाएं धीरे-धीरे अपना असर खो रही हैं।

दरअसल एंटीफंगल दवाओं का इस्तेमाल इंसानों के अलावा पशुओं और खेती में भी किया जाता है। इसकी वजह से कई फंगस इन दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो रहे हैं।

इसी खतरे को देखते हुए WHO ने फंगल इन्फेक्शन और एंटीफंगल रेजिस्टेंस से निपटने के लिए एक ग्लोबल स्ट्रेटजी जारी की है।

WHO ने चेतावनी दी है कि अगर एंटीफंगल दवाओं का बेवजह इस्तेमाल नहीं रुका, तो भविष्य में सामान्य फंगल इन्फेक्शन का इलाज मुश्किल हो सकता है। कई मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज एंटीफंगल रेजिस्टेंस की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • एंटीफंगल रेजिस्टेंस क्यों बढ़ रहा है?
  • इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट- डॉ. अंकित बंसल, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली

सवाल- फंगस क्या है?

जवाब- यह सूक्ष्मजीवों (माइक्रोऑर्गेनिज्म) का एक समूह है। इसमें यीस्ट, फफूंद (मोल्ड) और मशरूम शामिल हैं। फंगस हमारे आसपास लगभग हर जगह पाए जाते हैं। ज्यादातर फंगस नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कुछ फंगस इंसानों में इन्फेक्शन और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

सवाल- फंगल इन्फेक्शन क्या होता है?

जवाब- फंगस की वजह से होने वाले इन्फेक्शन को ‘फंगल इन्फेक्शन’ कहते हैं। यह स्किन, नाखून, मुंह, फेफड़ों या शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह गंभीर भी हो सकता है।

सवाल- फंगल इन्फेक्शन शरीर के किन अंगों में हो सकता है?

जवाब- यह स्किन, स्कैल्प, नाखून, मुंह और कुछ मामलों में शरीर के इंटरनल ऑर्गन्स में भी हो सकता है। डिटेल ग्राफिक में देखिए-

सवाल- एंटीफंगल रेजिस्टेंस क्या है?

जवाब- फंगल इन्फेक्शन होने पर एंटीफंगल दवाएं दी जाती हैं। लेकिन अगर ये एंटीफंगल दवाएं फंगस पर असर करना बंद कर दें या उनका असर कम हो जाए, तो इसे एंटीफंगल रेजिस्टेंस कहते हैं। इससे इन्फेक्शन का इलाज करना कठिन हो जाता है।

सवाल- WHO एंटीफंगल रेजिस्टेंस को इतना बड़ा खतरा क्यों मान रहा है?

जवाब- WHO का मानना है कि अगर समय रहते इस समस्या पर काबू नहीं पाया गया, तो भविष्य में सामान्य फंगल इन्फेक्शन का इलाज भी मुश्किल हो जाएगा। गंभीर मामलों में मामूली इन्फेक्शन भी जानलेवा साबित हो सकता है।

सवाल- WHO फंगल इन्फेक्शन और एंटीफंगल रेजिस्टेंस पर ग्लोबल स्ट्रेटेजी क्यों बना रहा है?

जवाब- पॉइंटर्स में देखिए-

  • इसका उद्देश्य दुनिया भर में फंगल इन्फेक्शन से निपटने के लिए एक कॉमन स्ट्रेटेजी तैयार करना है।
  • WHO चाहता है कि सभी देश समय पर जांच, बेहतर इलाज और मजबूत निगरानी की व्यवस्था करें।
  • यह स्ट्रेटेजी कहती है कि एंटीफंगल दवाओं का जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए। सिर्फ सचमुच जरूरत होने पर ही ये दवाएं दी जाएं। हर छोटी–मोटी और अपने आप ठीक हो जाने वाली समस्याओं के लिए इसका इस्तेमाल न हो।
  • इस स्ट्रेटेजी से दुनिया भर के देशों को फंगल इन्फेक्शन और एंटीफंगल रेजिस्टेंस से निपटने में मदद मिलेगी।

सवाल- एंटीफंगल रेजिस्टेंस क्यों पैदा होता है? दवाएं असर क्यों नहीं करतीं?

जवाब- इसके कारण को पॉइंटर्स में समझिए–

  • एकदम सरल भाषा में कहें तो इसका कारण है एंटीफंगल दवाओं का गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल।
  • डॉक्टर्स मामूली समस्या होने पर भी इन दवाओं के हैवी डोज लिख देते हैं।
  • कई बार लोग बिना प्रिस्क्रिप्शन के खुद से ही मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खा लेते हैं।
  • हमारे देश में इसे लेकर कोई कठोर कानून नहीं है कि बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा नहीं मिलेगी।
  • एक तीसरा कारण ये है कि लोग दवा का डोज पूरा नहीं करते। जैसे ही एक–दो डोज लेने के बाद आराम मिलता है, लोग दवा खाना बंद कर देते हैं।
  • इन सभी कारणों से शरीर के भीतर मौजूद फंगस दवाओं के प्रति इम्यून हो जाता है।
  • दवाओं के बार-बार या गलत इस्तेमाल से कुछ फंगस खुद में बदलाव (म्यूटेशन) कर लेते हैं। समय के साथ इस फंगस पर दवाओं का असर पड़ना बंद हो जाता है और दवा लेने के बावजूद इन्फेक्शन ठीक नहीं होता।

सवाल- क्या एंटीफंगल रेजिस्टेंस, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी ही समस्या है?

जवाब- हां, दोनों समस्याएं मिलती-जुलती हैं। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस में बैक्टीरिया पर दवाएं असर नहीं करतीं, जबकि एंटीफंगल रेजिस्टेंस में फंगस पर एंटीफंगल दवाओं का असर कम या खत्म हो जाता है। दोनों ही स्थितियों में संक्रमण का इलाज कठिन हो जाता है।

सवाल- भारत में सबसे ज्यादा कौन-से फंगल इन्फेक्शन देखे जाते हैं?

जवाब- भारत में स्किन और नाखून के फंगल इन्फेक्शन सबसे कॉमन हैं। हालांकि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इंटरनल ऑर्गन्स में भी गंभीर फंगल इन्फेक्शन हो सकते हैं। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों में फंगल इन्फेक्शन का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- फंगल इन्फेक्शन किसी को भी हो सकता है। लेकिन जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है या जिन्हें पहले से गंभीर बीमारियां होती हैं, उनमें रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या एक स्वस्थ व्यक्ति को भी गंभीर फंगल इन्फेक्शन हो सकता है?

जवाब- हां, स्वस्थ व्यक्ति भी गंभीर संक्रमण का शिकार हो सकता है, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह रिस्क ज्यादा होता है।

सवाल- कौन से फंगल इन्फेक्शन जानलेवा हो सकते हैं?

जवाब- फेफड़ों, ब्लडस्ट्रीम और ब्रेन तक फैलने वाले फंगल इन्फेक्शन जानलेवा हो सकते हैं। इनमें म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस), इनवेसिव एस्परजिलोसिस, इनवेसिव कैंडिडायसिस और क्रिप्टोकोकल इन्फेक्शन शामिल हैं।

सवाल- कौन से लक्षण गंभीर फंगल इन्फेक्शन का संकेत हो सकते हैं?

जवाब- अगर फंगल इन्फेक्शन शरीर के इंटरनल ऑर्गन्स तक पहुंच जाए तो इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं। ग्राफिक में सभी वॉर्निंग साइन देखिए-

सवाल- फंगल इन्फेक्शन की पहचान (डायग्नोसिस) कैसे की जाती है?

जवाब- सबसे पहले डॉक्टर लक्षणों और प्रभावित हिस्से को जांंचते हैं। जरूरत पड़ने पर स्किन, नाखून, बलगम या अन्य सैंपल के लैब टेस्ट (जैसे माइक्रोस्कोपी, कल्चर या अन्य टेस्ट) से फंगल इन्फेक्शन की पुष्टि की जाती है।

सवाल- फंगल इन्फेक्शन का इलाज क्या है?

जवाब- इसका इलाज इन्फेक्शन की गंभीरता पर निर्भर करता है। हल्के संक्रमण में एंटीफंगल क्रीम दी जाती है। जबकि गंभीर मामलों में एंटीफंगल टैबलेट या इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।

सवाल- फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- फंगल इन्फेक्शन से बचाव के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

सवाल- एंटीफंगल रेजिस्टेंस से बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए ग्राफिक में दी गई डॉक्टर ये 10 सलाह फॉलो करें-

फंगल इन्फेक्शन से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब

सवाल- क्या हर फंगस नुकसान पहुंचाता है?

जवाब- नहीं, ज्यादातर फंगस नुकसान नहीं पहुंचाते। कई फंगस नेचर और फूड प्रोडक्शन के लिए उपयोगी होते हैं। केवल कुछ फंगस ही इंसानों में संक्रमण और बीमारी का कारण बनते हैं।

सवाल- दाद, खुजली और फंगल इन्फेक्शन में क्या अंतर है?

जवाब- पॉइंटर्स में देखिए-

  • फंगल इन्फेक्शन फंगस की वजह से होने वाला संक्रमण है। दाद इसका एक कॉमन टाइप है।
  • दाद में स्किन पर गोल या छल्ले जैसे लाल चकत्ते बनते हैं। इनमें खुजली भी हो सकती है।
  • खुजली कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है। यह फंगल इन्फेक्शन के अलावा एलर्जी, एक्जिमा, स्केबीज या स्किन की दूसरी समस्याओं में भी हो सकती है। यानी हर खुजली फंगल इन्फेक्शन नहीं होती।

सवाल- बार-बार होने वाला फंगल इन्फेक्शन किस बात का संकेत है?

जवाब- ये कमजोर इम्यूनिटी, अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, दवा का अधूरा कोर्स या दोबारा संक्रमण का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

सवाल- क्या परिवार के एक सदस्य को फंगल इन्फेक्शन हो तो बाकी लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब- हां, कुछ फंगल इन्फेक्शन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं। इसलिए तौलिया, कपड़े, कंघी और अन्य निजी सामान शेयर न करें। साथ ही संक्रमित व्यक्ति का समय पर इलाज कराएं।

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