ब्यावर में MKSS ने SIR रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) ने ब्यावर के चांग गेट पर आयोजित जनसुनवाई में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए। संगठन ने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों की निष्पक्ष जां
.
MKSS के अनुसार, ब्यावर विधानसभा क्षेत्र की भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों के मिलान में 23,395 नामों का अंतर सामने आया है। संगठन का दावा है कि SIR के दौरान हटाए गए 24,085 नामों में से 19,037 नाम स्थानीय निकाय की मतदाता सूची में अब भी दर्ज हैं।
जनसुनवाई में संगठन के संस्थापक सदस्य निखिल डे ने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र का आधार है। किसी भी पात्र नागरिक को मतदान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने और नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने तथा सामने आई विसंगतियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
दोनों सरकारी सूचियों में 23,395 नामों का अंतर
MKSS के अनुसार, ब्यावर विधानसभा क्षेत्र संख्या 103 में SIR के बाद भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अंतिम मतदाता सूची और राज्य निर्वाचन आयोग की पंचायत एवं नगरपालिका मतदाता सूची का मिलान किया गया। इसमें नगर परिषद के 60 वार्ड और जवाजा व नरबदखेड़ा क्षेत्र की 48 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। नगर परिषद की सूची 31 अगस्त 2026 तक की है।
संगठन का कहना है कि फरवरी 2026 की SIR प्रक्रिया के बाद भारत निर्वाचन आयोग की अंतिम मतदाता सूची में 2,55,312 नाम हैं, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग की पंचायत एवं नगरपालिका मतदाता सूची में 2,78,707 नाम दर्ज हैं। इस तरह दोनों सूचियों के कुल आंकड़ों में 23,395 नामों का अंतर है। MKSS के मुताबिक, स्थानीय निकाय की सूची में विधानसभा मतदाता सूची की तुलना में लगभग 9.2 प्रतिशत अधिक नाम हैं।
स्थानीय निकाय की सूची में 31,871 नाम SIR सूची में नहीं मिले
संगठन ने दावा किया कि स्थानीय निकाय की मतदाता सूची में दर्ज 31,871 नाम भारत निर्वाचन आयोग की SIR सूची में नहीं मिले। इनमें शहरी क्षेत्र के 60 वार्डों के 22,120 और ग्रामीण क्षेत्र की 48 ग्राम पंचायतों के 9,751 नाम शामिल बताए गए हैं।
MKSS ने स्पष्ट किया कि दोनों सूचियों के कुल नामों में अंतर और एक सूची में दर्ज, लेकिन दूसरी में नहीं मिले नाम अलग-अलग आंकड़े हैं। संगठन ने इन आंकड़ों का स्वतंत्र सत्यापन कराने की जरूरत बताई। उसका कहना है कि केवल एक सूची में नाम दर्ज होने या नहीं होने के आधार पर किसी व्यक्ति की मतदाता पात्रता का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है।
हटाए गए 24,085 नामों में से 19,037 स्थानीय सूची में दर्ज होने का दावा
MKSS के अनुसार, SIR के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि (ASDD) की श्रेणी में 24,085 नाम हटाए गए थे। संगठन का दावा है कि इनमें से 19,037 नाम स्थानीय निकाय की मतदाता सूची में अब भी दर्ज हैं।
संगठन ने बताया कि मृत घोषित किए गए 4,673 लोगों में से 2,133 के नाम स्थानीय निकाय की सूची में मौजूद हैं। इसी तरह स्थानांतरित बताए गए 14,779 लोगों में से 12,927 और अनुपस्थित बताए गए 2,620 लोगों में से 2,301 नाम स्थानीय निकाय की सूची में दर्ज होने का दावा किया गया।
MKSS के मुताबिक, स्थानीय निकाय की सूची से मृत, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टि के आधार पर हटाए गए 1,627 नाम भारत निर्वाचन आयोग की सूची में अब भी दर्ज हैं। संगठन ने नाम हटाने के आधार और सत्यापन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की।

संगठन के संस्थापक सदस्य निखिल डे बोले—मताधिकार से किसी पात्र नागरिक को वंचित नहीं किया जाना चाहिए
चार मांगें रखीं, मतदाता सूचियों के सामाजिक अंकेक्षण पर जोर
जनसुनवाई में MKSS ने चार प्रमुख मांगें उठाईं। इनमें SIR प्रक्रिया रद्द कर प्रभावित मतदाताओं के नामों की निष्पक्ष जांच कराने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा लेने, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की पुरानी व्यवस्था बहाल करने और ग्राम सभा, वार्ड सभा, बूथ तथा मोहल्ला स्तर पर मतदाता सूचियों का सामाजिक अंकेक्षण कराने की मांग शामिल है।
निखिल डे ने कहा कि मतदाता सूचियों को सार्वजनिक रूप से पढ़ा जाना चाहिए, ताकि नागरिक अपने नामों की जांच कर सकें और जरूरत पड़ने पर दावे व आपत्तियां दर्ज करा सकें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल मतदान के दिन वोट डालने तक सीमित नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और उसे बिना बाधा अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिले।
पूजा भाट और मीरा देवी के नाम हटाने पर भी सवाल
जनसुनवाई में सुहावा ग्राम पंचायत क्षेत्र की पूजा भाट और मीरा देवी के मामले भी उठाए गए। संगठन के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान दोनों महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। MKSS ने सवाल किया कि नाम हटाने का आधार क्या था, किस तरह का सत्यापन किया गया और क्या संबंधित मतदाताओं को सूचना देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
संगठन ने दोनों मामलों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और नाम गलत तरीके से हटाए जाने की पुष्टि होने पर नियमानुसार बहाली की मांग की।
12 अक्टूबर के मेले में उपलब्ध कराने की तैयारी
MKSS ने नागरिकों से अपील की कि वे SIR में हटाए गए नामों की सूची में अपने और परिजनों के नाम की जांच करें। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो संबंधित दस्तावेजों के साथ नियमानुसार दावा प्रस्तुत करें।
संगठन ने बताया कि उसके पास भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की दोनों मतदाता सूचियां उपलब्ध हैं। लोगों को अपने नाम की स्थिति जांचने में मदद देने के लिए 12 अक्टूबर को आयोजित मेले में दोनों सूचियां उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
