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Bhadrapad Amavasya 2026: Dhoop Dhyan Rituals for Pitra Puja


32 मिनट पहले

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आज (10 सितंबर) और कल (11 सितंबर) भाद्रपद मास की अमावस्या है। यह तिथि आज सुबह 10.33 बजे से शुरू होकर और कल सुबह 8.56 बजे तक रहेगी। इसलिए जो लोग इस तिथि पर पितरों के लिए धूप-ध्यान करना चाहते हैं, वे 10 तारीख की दोपहर में कर सकते हैं। 11 तारीख की सुबह अमावस्या से जुड़े स्नान-दान जैसे धर्म-कर्म किए जा सकते हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पितरों के लिए धूप-ध्यान दोपहर में करीब 12 बजे करना चाहिए। इस समय को कुतुप काल कहते हैं। सुबह और शाम को देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। आज दोपहर में भाद्रपद अमावस्या रहेगी, लेकिन कल दोपहर में भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा तिथि रहेगी, इसलिए पितरों के लिए धूप-ध्यान आज ही करेंगे, तो ज्यादा शुभ रहेगा।

भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। कुशग्रहणी अमावस्या पर कुशा घास इकट्ठा करने की परंपरा है। पूजा और श्राद्ध-तर्पण आदि धर्म-कर्म के लिए कुश घास का विशेष महत्व माना गया है।

कुशा घास के बिना पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म अधूरे ही माने जाते हैं। पुराने समय में भक्त पूरे साल पूजा-पाठ और श्राद्ध आदि धर्म-कर्म में इस्तेमाल करने के लिए कुशा घास भाद्रपद अमावस्या पर ही इकट्ठा करते थे। इसी वजह से इसे कुशग्रहणी अमावस्या कहा जाने लगा।

ऐसे कर सकते हैं पितरों के लिए धूप-ध्यान

अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और उपयोगी चीजों का दान करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति आती है।

धूप-ध्यान के लिए जरूरी चीजें

गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन।

अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।

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