छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बुधवार को 11 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत के बाद गुरुवार को नगर निगम की टीम कार्रवाई करने पहुंची। टीम हाईटेंशन लाइन के पास बने अवैध निर्माण को तोड़ने पहुंची, इस दौरान मकान मालिक और निगम अधिकारियों
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मकान मालिक ने आरोप लगाया कि निगम ने नक्शा पास करने के बाद अवैध निर्माण को लेकर कोई नोटिस नहीं दिया और अचानक तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी। वहीं, विवाद के बाद निगम की टीम ने बुलडोजर की मदद से अवैध मकान को जमींदोज कर दिया।
निगम का दावा है कि स्वीकृत नक्शे के खिलाफ निर्माण किया जा रहा था। इस लेकर दो बार नोटिस भी गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
देखिए पहले ये तस्वीरें-



जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, वार्ड नंबर-19 के कस्तूरबा नगर स्थित स्वर्ण जयंती नगर कॉलोनी में अनूप सिंह का निर्माणाधीन मकान है। बुधवार को यहां काम कर रहे भूपेंद्र साहू और रवि बंजारे की 11 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
हादसे के बाद नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठे। इसके बाद निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए। पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए एसएसपी को पत्र भी भेजा गया।
निगम की टीम पहुंची तो मकान मालिक से विवाद
गुरुवार को निगम का अमला बुलडोजर लेकर निर्माण हटाने पहुंचा। कार्रवाई शुरू होते ही मकान मालिक ने अधिकारियों से विवाद शुरू कर दिया। मकान मालिक का आरोप था कि निगम ने नक्शा पास किया था।
निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने कोई आपत्ति नहीं की और अवैध निर्माण को लेकर उसे कोई नोटिस भी नहीं दिया गया। इसी बात को लेकर मौके पर कई बार विवाद हुआ और मामला गाली-गलौज तक पहुंच गया।
निगम बोला- स्वीकृत नक्शे के खिलाफ किया निर्माण
नगर निगम के भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि मकान मालिक ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत हाईटेंशन लाइन के नजदीक निर्माण किया था। इसी अवैध हिस्से को हटाने की कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि निगम के बुलडोजर से मकान के सामने करीब 9 फीट के अवैध हिस्से को हटाया गया है।

नक्शे में खुली जगह छोड़ना था, मौके पर अतिरिक्त निर्माण
सब इंजीनियर जुगल सिंह के अनुसार, स्वीकृत नक्शे में मकान के सामने 3 मीटर, सड़क की तरफ 3 मीटर और दूसरी तरफ 1.50 मीटर खुली जगह छोड़नी थी। पीछे की तरफ भी खुली जगह का प्रावधान था, लेकिन मौके पर तय जगह नहीं छोड़ी गई।
सामने करीब 3 फीट अतिरिक्त निर्माण मिला। यह हिस्सा 11 केवी हाईटेंशन लाइन के काफी करीब था।
ऊपरी दबाव का आरोप, निगम अमला मौके पर डटा
कार्रवाई के दौरान यह भी चर्चा रही कि पार्षद और महापौर की ओर से निगम अधिकारियों से कार्रवाई रोकने को कहा जा रहा है। बताया गया कि मकान मालिक बाकी निर्माण खुद हटाने की बात कह रहा है।
हालांकि निगम का अमला मौके से नहीं हटा। अधिकारियों का कहना है कि जब तक मकान मालिक लिखित में यह नहीं देता कि बाकी अवैध निर्माण वह खुद हटाएगा, तब तक टीम मौके पर रहेगी।

दो बार नोटिस देने का दावा
नगर निगम जोन-3 के अनुसार, भवन मालिक अनुप सिंह ठाकुर को निर्माण रोकने के लिए 9 अप्रैल 2026 और 13 मई 2026 को नोटिस जारी किया गया था। जांच में सामने आया था कि स्वीकृत नक्शे के अनुसार भवन के चारों तरफ खुली जगह छोड़नी थी, लेकिन मौके पर अतिरिक्त निर्माण किया गया।
नोटिस के बाद भी निर्माण नहीं रुका
कॉलोनी के लोगों का आरोप है कि अवैध निर्माण को लेकर निगम में शिकायत की गई थी। निगम ने नोटिस तो जारी किया, लेकिन निर्माण रुकवाने के लिए मौके पर सख्ती नहीं दिखाई। अगर समय रहते निर्माण रुकवा दिया जाता तो शायद दोनों मजदूरों की जान बच सकती थी।
निगम बोला- फाइल की जांच के बाद होगी कार्रवाई
नगर निगम भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि मामले की फाइल मंगाई गई है। स्वीकृत नक्शे और मौके पर हुए निर्माण की जांच की जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस कर रही मकान मालिक और ठेकेदार की भूमिका की जांच
थाना प्रभारी किशोर केंवट ने बताया कि दोनों मजदूर पहले भी ठेकेदार के साथ काम कर चुके थे। मंगलवार को वे काम मांगने पहुंचे थे। पुलिस यह पता लगा रही है कि दोनों मजदूर छत पर किस काम से पहुंचे थे। पुलिस मकान मालिक, ठेकेदार और निर्माण से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, मृतकों के शरीर और कपड़ों पर सीमेंट के दाग नहीं मिले हैं। हादसे के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर दोनों शव परिजनों को सौंप दिए गए। इसके बाद परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार किया।
भाजपा नेता के करीबी होने का आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि मकान मालिक अनुप सिंह एक स्थानीय भाजपा नेता का करीबी है। लोगों का दावा है कि अवैध निर्माण और सीमांकन की कार्रवाई के दौरान उक्त नेता की सक्रियता रही। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लोगों का यह भी कहना है कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों से संपर्क कर निर्माण पर कार्रवाई रोकने का प्रयास किया गया।

अधिकारी बोले- जोन बदलने के बाद आगे की कार्रवाई की जानकारी नहीं
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री प्रवीण शुक्ला ने बताया कि कॉलोनीवासियों की शिकायत पर अनुप सिंह को नोटिस जारी किया गया था। सीमांकन के लिए तहसीलदार को पत्र भी भेजा गया था।
उन्होंने कहा, “इसके बाद मेरा जोन बदल गया। आगे कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।”
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