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BRICS Summit Finale | PM Modi To Meet 4 Global Leaders In India


नई दिल्ली55 मिनट पहले

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ब्रिक्स समिट के दौरान शनिवार को PM मोदी, पुतिन और जिनपिंग का हाथ थामे नजर आए। - Dainik Bhaskar

ब्रिक्स समिट के दौरान शनिवार को PM मोदी, पुतिन और जिनपिंग का हाथ थामे नजर आए।

BRICS समिट का आज आखिरी दिन है। आज ओपन मीटिंग होगी, जिसमें सदस्य देशों के नेता और दूसरे आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे।

बैठक में BRICS से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद PM मोदी 4 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।

समिट के पहले दिन भारत ने साफ कर दिया कि फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है।

हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS में स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जरूर चल रही है। इसका मकसद देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है।

BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी

BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई मुद्दों पर साझा बयान जारी किया गया।

डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी।

BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं।

ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें

  • अगले 20 साल का नया एजेंडा बनाएं: BRICS के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव।
  • ग्लोबल साउथ नियम बनाने में हिस्सा ले: AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी पर जोर।
  • युवाओं को तैयार करें: युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून की ट्रेनिंग देने का सुझाव।
  • नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बने: मुसीबत में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकालने के लिए देशों के बीच नेटवर्क बनाने की बात।
  • भविष्य सबका, फैसला भी सबका: मोदी ने कहा- दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।
PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट 2026 के औपचारिक शुरुआत की घोषणा की।

PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट 2026 के औपचारिक शुरुआत की घोषणा की।

तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की।

दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं।

हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है।

पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती

BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं।

साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है।

इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए।

इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है।

एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम

BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया।

तब BRIC कोई संगठन नहीं था। 2006 में चारों देश साथ आए और BRIC समूह बना। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई।

2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने।

आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है।

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