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Chandigarh AI Surveillance | 4200 CCTV Cameras to Boost City Security


यूटी सलाहकार स्थायी समिति की बैठक राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई।

चंडीगढ़ में अपराध पर लगाम लगाने और कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए शहर की निगरानी व्यवस्था को एआई तकनीक से और मजबूत किया जाएगा। इसके तहत शहर में 2 हजार से ज्यादा अतिरिक्त एआई सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है।

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इससे शहर में कैमरों की संख्या मौजूदा 2130 से बढ़कर करीब 4200 हो जाएगी। यह कैमरे शहर के बाकी 68 एटीसी स्थानों को भी कवर करेंगे। इनमें वाहनों और लोगों की स्वचालित पहचान के साथ प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि पुलिस अपराध होने से पहले संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सके और किसी घटना पर तेजी से कार्रवाई कर सके।

इसे लेकर सेक्टर-9 स्थित पुलिस मुख्यालय में यूटी सलाहकार स्थायी समिति की बैठक हुई। राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसएसपी कंवरदीप कौर, एसपी सिटी अनुराग द्विवेदी, डीएसपी रामगोपाल, डीएसपी ऑपरेशन अभिनंदन समेत पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

चंडीगढ़ ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, पूर्व मेयर कुलदीप कुमार और होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन मनमोहन सिंह भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में पिछली बैठक की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा के साथ तकनीक आधारित पुलिसिंग, अपराध रोकथाम, सड़क सुरक्षा, साइबर अपराध और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

राज्यसभा सांसद सतनाम संधू 4200 कैमरों को लेकर बात करते हुए।

राज्यसभा सांसद सतनाम संधू 4200 कैमरों को लेकर बात करते हुए।

जानिए एआई कैमरों क्या होंगे फायदे …

4200 कैमरों से होगी निगरानी: शहर में 2 हजार से अधिक नए एआई सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। इससे मौजूदा 2130 कैमरों का नेटवर्क बढ़कर करीब 4200 कैमरों का हो जाएगा। इसके जरिए शहर के प्रमुख स्थानों पर निगरानी और मजबूत की जाएगी।

68 एटीसी स्थान भी होंगे कवर: नए कैमरों का नेटवर्क शहर के बाकी 68 एटीसी स्थानों को कवर करेगा। इससे यातायात और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ेगी। पुलिस को किसी घटना के बाद संबंधित स्थान की गतिविधियों की जानकारी जुटाने में भी मदद मिलेगी।

वाहन और लोगों की होगी स्वचालित पहचान: प्रस्तावित एआई व्यवस्था में वाहनों और व्यक्तियों की स्वचालित पहचान जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे संदिग्ध वाहनों और लोगों को ट्रैक करने तथा पुलिस की जांच को तेज करने में मदद मिलेगी।

अपराध होने से पहले रोकने पर जोर: समिति ने कहा कि कैमरों की संख्या बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए। एआई, प्रिडिक्टिव टूल्स और रीयल टाइम डेटा का इस्तेमाल अपराध रोकने, पुलिस की प्रतिक्रिया का समय कम करने और नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

पीयू के साथ बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: समिति ने पुलिसिंग और सुरक्षा के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की अपनी पुरानी सिफारिश दोहराई। इसके लिए पंजाब यूनिवर्सिटी के सहयोग की संभावना तलाशने का सुझाव दिया गया। केंद्र में एआई आधारित पुलिसिंग, साइबर अपराध, फोरेंसिक, कानूनी शोध, यातायात प्रबंधन और नई सुरक्षा चुनौतियों पर शोध किया जा सकेगा।

600 से ज्यादा लोग 3 से अधिक अपराधों में शामिल: एसएसपी ने समिति को बताया कि 600 से अधिक लोग ऐसे हैं, जो तीन से ज्यादा बार आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। वहीं पुलिस के व्यापक डेटाबेस में 8 हजार से अधिक ऐसे लोग हैं, जो एक या उससे ज्यादा आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे हैं।

बार-बार अपराध करने वालों पर अध्ययन होगा: समिति ने सुझाव दिया कि केवल कार्रवाई करने के बजाय बार-बार अपराध करने वालों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कारणों का भी अध्ययन किया जाए। इसके लिए सामाजिक विज्ञान और शैक्षणिक विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव दिया गया।

सड़क हादसे रोकने के लिए बनेगी रणनीति: बैठक में सड़क सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई। दुर्घटना संभावित सड़कों, हादसों के कारणों और उनके पैटर्न का विस्तृत अध्ययन करने को कहा गया। इसके बाद तकनीक, यातायात पुलिस और सड़क इंजीनियरिंग से जुड़े उपाय लागू करने पर जोर दिया गया।

साइबर अपराध जागरूकता के 553 सत्र: एसएसपी ने बताया कि वर्ष 2025 से अब तक साइबर अपराध को लेकर जागरूकता के 553 सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। समिति ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और धमकी भरे ई-मेल से निपटने के लिए पुलिस की साइबर प्रतिक्रिया व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।

स्कूलों को धमकी मिलने पर एसओपी तैयार: बैठक में बताया गया कि स्कूलों को मिलने वाली धमकियों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर ली गई है। समिति ने महिलाओं के साथ वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थियों और व्यापारियों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

नशा तस्करी पर जीरो टॉलरेंस: चंडीगढ़ पुलिस नशा तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रखेगी। इसके साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। समिति ने कमजोर वर्ग के किशोरों और भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के लिए पुलिस, महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।

देश के लिए मॉडल बने चंडीगढ़: सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि चंडीगढ़ के पास स्मार्ट, सुरक्षित और नागरिक केंद्रित पुलिसिंग का राष्ट्रीय मॉडल बनने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि तकनीक अपराध रोकने में मदद करे, डेटा पुलिस के फैसलों को बेहतर बनाए और सामाजिक हस्तक्षेप के जरिए लोगों को सुरक्षा मिले। लक्ष्य एक अधिक सुरक्षित चंडीगढ़ बनाना होना चाहिए।



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