नई दिल्ली15 मिनट पहले
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भारत में SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इस मामले को दुनियाभर के मीडिया संस्थानों को प्रमुखता से कवर किया गया है। NYT – सरकार के लिए सत्ता बनाए रखने के तरीके कमजोर पड़े
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि भारत में एक समय कमजोर पड़ चुका विपक्ष अब फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल युवाओं के आंदोलन से बनी राजनीतिक जगह का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी एक किले में तब्दील हो गई। भारतीय अधिकारियों ने जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया, तो देश के युवाओं ने भी उतने ताकतवर तरीके से इसका विरोध किया।
मोदी समर्थक पहले विरोधियों के प्रदर्शन को कमजोर बताकर या ‘देशद्रोही’ कहकर उनका विरोध कम करने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन इस आंदोलन में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हैं। इससे प्रदर्शनकारियों को उसी तरीके से निशाना बनाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है।

वॉशिंगटन पोस्ट – मोदी और चुनाव आयोग के खिलाफ गुस्सा बढ़ा
अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि भारत में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है।
वोटर लिस्ट में बदलाव के विरोध में आंदोलन कर रहे युवाओं ने दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही कई नेताओं, विपक्षी सांसदों और छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई, जगह-जगह बैरिकेडिंग की और वाहनों की जांच की। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है, जब इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर हुए युवा प्रदर्शनों के बाद जुलाई में शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।

CNN- सरकार ही नहीं CJP के लिए भी बड़ी परीक्षा
अमेरिकी अखबार CNN लिखता है कि कई हफ्तों तक धरने और मार्च चलने के बाद जुलाई में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। यह मोदी सरकार के लिए एक राजनीतिक झटका था।
विपक्षी दल भी सरकार को इस तरह का झटका नहीं दे पाए थे।अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन CJP के लिए एक परीक्षा है।
पार्टी यह देखना चाहती है कि क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए अपनाई गई उसकी सफल रणनीति को देश की चुनाव व्यवस्था जैसे बड़े मुद्दे पर भी दोहराया जा सकता है।

साउथ चाइना पोस्ट- भारत में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
हॉन्गकॉन्ग के अखबार साउथ चाइना पोस्ट ने लिखा वोटर लिस्ट में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की खबर के बाद विरोध तेज हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव से भाजपा को फायदा पहुंच सकता है।
शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए हजारों पुलिस और पैरामिलिट्री जवान तैनात किए गए, कई मेट्रो स्टेशन और बाजार बंद रहे और 2,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट ने इस विरोध को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अब तक की गंभीर राजनीतिक चुनौतियों में से एक बताया है।

अल जजीरा – PM मोदी के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौती
अल जजीरा ने विरोध प्रदर्शन को लेकर लिखा है कि ये PM मोदी और उनकी सरकार के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक हैं। पिछले हफ्ते इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विरोध और तेज हो गया।
रिपोर्ट में बताया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए थे। इन बदलावों के चलते वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए थे।
भाजपा का कहना है कि चुनावों में उसकी सफलता मोदी की लोकप्रियता और भारत की आर्थिक तरक्की को दिखाती है। पार्टी ने विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है।

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