वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज राष्ट्र के नाम संबोधन करेंगे। ट्रम्प इस दौरान चुनाव सुरक्षा पर अपनी सरकार का पक्ष रखेंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, वे अमेरिकी चुनावों में विदेशी दखल की कोशिशों पर विस्तार से बोलेंगे। साथ ही ईरान और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र कर सकते हैं।
यह संबोधन ऐसे समय हो रहा है, जब ट्रम्प लंबे समय से 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली का दावा करते रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों, राज्यों की ऑडिट रिपोर्ट और अदालतों को अब तक मतदान या वोटों की गिनती में विदेशी छेड़छाड़ का कोई सबूत नहीं मिला है।
ट्रम्प के इस संबोधन पर इसलिए भी नजर रहेगी क्योंकि हाल के दिनों में उन्होंने चुनावी सुरक्षा, ईरान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार आक्रामक रुख अपनाया है।

विदेशी दखल की कोशिश हुई, वोटों में छेड़छाड़ का सबूत नहीं
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस, ईरान समेत कई देशों ने सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार, साइबर हमलों और हैक-लीक अभियानों के जरिए अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि, किसी भी जांच में यह साबित नहीं हुआ कि इन कोशिशों से वोटिंग, मतगणना या चुनावी नतीजों में कोई छेड़छाड़ हुई।
अमेरिकी अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी नेटवर्क लंबे समय से सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन इन अभियानों का मतदाताओं के फैसलों पर कितना असर पड़ा, इसका कोई ठोस आकलन अब तक सामने नहीं आया है।
2016 और 2020 के चुनावों में क्या हुआ?
2016 चुनाव: हैकिंग हुई, वोटों में छेड़छाड़ नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 के अमेरिकी चुनाव में रूसी हैकरों ने सभी 50 राज्यों के चुनावी सिस्टम को निशाना बनाया था। उन्होंने सिस्टम की कमजोरियां तलाशने की कोशिश की, लेकिन वोटिंग या मतगणना में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई।
इसी दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी के ईमेल हैक कर लीक किए गए और इलिनॉय के वोटर डेटाबेस में सेंध लगी, लेकिन किसी मतदाता का रिकॉर्ड बदले जाने का सबूत नहीं मिला।
फ्लोरिडा के दो काउंटी में भी ऐसी घटनाएं हुई थीं। इसके बाद अमेरिका ने चुनावी सुरक्षा कड़ी की, ज्यादातर वोटिंग मशीनों को इंटरनेट से अलग किया और लगभग हर वोट का पेपर बैकअप अनिवार्य कर दिया।
2020 चुनाव: रूस और ईरान ने चलाया ऑनलाइन कैंपेन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, 2020 के चुनाव में रूस ने जो बाइडेन के खिलाफ, जबकि ईरान ने डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ ऑनलाइन प्रचार और दुष्प्रचार कैंपेन चलाया।
ईरान अलास्का के वोटर डेटाबेस तक भी पहुंचा, लेकिन वोटर रिकॉर्ड बदलने या चुनावी नतीजों से छेड़छाड़ का कोई सबूत नहीं मिला। बाद में अमेरिका ने इस मामले में दो ईरानी नागरिकों पर आरोप तय किए।
वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने वोटिंग सिस्टम या मतगणना में दखल नहीं दिया, हालांकि उस पर अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप लगते रहे हैं।

