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Ethanol Petrol; India EBP E20 Fuel Policy Benefits, Risk And Impact Explained


कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली ह

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आखिर पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है सरकार, क्या हैं इसके फायदे-नुकसान और आगे का रास्ता; आज के एक्सप्लेनर में पूरी कहानी…

सवाल-1: सरकार एथेनॉल को लेकर क्या एक्सपेरिमेंट कर रही है? जवाबः एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो गन्ना, मक्का और चावल वगैरह से बनता है। ये ज्वलनशील होता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन की तरह इस्तेमाल करने पर कई स्टडी हुईं और सरकार के मुताबिक इसके अच्छे नतीजे आए।

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है। जबकि एथेनॉल बनाने के लिए जरूरी गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलें देश में ही पैदा होती हैं। इसलिए 2001 में भारत सरकार ने एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ पेट्रोल पंपों पर 5% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सप्लाई की। ये सफल रहा। इसके बाद 2003 में शुरू हुआ एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम…

  • शुरुआत में 9 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में 5% एथेनॉल ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल बेचने का टारगेट रखा गया। लेकिन 2013-14 तक पेट्रोल में सिर्फ 0.1% से 1.5% एथेनॉल मिला होता था।
  • मई 2014 में मोदी सरकार आई। नितिन गडकरी परिवहन मंत्री बने। उन्होंने बायोफ्यूल और एथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर दिया।
  • सरकार बनने के महीनेभर में एथेनॉल ब्लेंडिंग का टारगेट 5% से 10% कर दिया। जून 2022 में लक्ष्य पूरा भी कर लिया गया।
  • 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए सरकार ने 2030 तक का टारगेट तय किया था, लेकिन इसे भी 2025 में हासिल कर लिया। 1 अप्रैल 2026 तक देशभर में E20 पेट्रोल रोलआउट हो चुका है।

इसके अलावा देश के 48 पेट्रोल पंपों पर E85 पेट्रोल भी रोलआउट हो चुका है। यानी 85% एथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल। दिसंबर 2026 तक इसे 500 पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। 10 जून को नितिन गडकरी ने कहा कि उनकी सरकार ने 100% एथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को भी मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में 'इंडिया एनर्जी वीक 2023' के दौरान E20 फ्यूल लॉन्च किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में ‘इंडिया एनर्जी वीक 2023’ के दौरान E20 फ्यूल लॉन्च किया था।

सवाल-2: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के फायदे क्या हैं? जवाबः सरकार 3 बड़े फायदे गिना रही है… 1. 1.84 लाख करोड़ विदेशी मुद्रा की बचत: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से भारत को 302 लाख मीट्रिक टन कम तेल आयात करना पड़ा। इससे पिछले 12 सालों में 1.84 लाख करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

2. किसानों की आय में 1.58 लाख करोड़ की बढ़ोतरी: एथेनॉल बनाने में तीन फसलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है- मक्का, गन्ना और चावल। 2025-26 में 91.89 लाख हेक्टेयर जमीन पर मक्के की खेती हुई है, जो पिछले साल से 10.5% ज्यादा है। इसी तरह गन्ना और चावल की बुआई भी बढ़ी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक पिछले १२ साल में एथेनॉल प्रोजेक्ट से किसानों को 1.58 लाख करोड़ रूपए की कमाई हुई है।

3. प्रदूषण में 65% तक की कमीः NITI आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल की तुलना में गन्ने और मक्के से बनने वाले एथेनॉल के इस्तेमाल करने से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 60% से 65% तक कम होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक १२ साल में एथेनॉल प्रोजेक्ट से 909 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कटौती हुई है। सवाल-3: सरकार इतने फायदे गिना रही, तो फिर इसमें दिक्कत क्या है? जवाबः भारत के एथेनॉल प्रोजेक्ट में मोटेतौर पर 5 दिक्कतें हैं…

1. कम माइलेज और इंजन में खराबी की शिकायत

  • दिल्ली के पालिका भवन में 20 साल से कार रिपेयरिंग कर रहे दीपक राज बताते हैं, ‘जब से पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ी है, तब से फ्यूल से जुड़े पार्ट्स फ्यूल सेंसर, पंप और फिल्टर तीनों में दिक्कते आ रही है। फ्यूल टैंक में काई जमने की शिकायतें भी आई हैं।’
  • ऑटोमोटिव एक्सपर्ट टूटू धवन कहते हैं, ‘एथेनॉल से लोग गाड़ियों का माइलेज कम होने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन इसकी सही तरीके से टेस्टिंग नहीं हो रही है। सरकार और एजेंसी को माइलेज की टेस्टिंग करके डेटा पेश करना चाहिए।’
  • 2023 से पहले के कार मॉडल्स के मैनुअल में कंपनियों ने साफतौर पर लिखा है कि उनमें ज्यादा से ज्यादा E10 फ्यूल इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसलिए कम माइलेज और इंजन में खराबी की शिकायतें थोक में आ रही हैं।
  • पिछले महीने मारुति सुजुकी ने फ्लेक्स इंजन कार लॉन्च की है, लेकिन पहले 4 हफ्तों में ऐसी सिर्फ 3 कारें बिकीं। फ्लेक्स फ्यूल इंजन, जो 100% पेट्रोल, 100% एथेनॉल या दोनों के किसी भी ब्लेंड से चले।
मैकेनिक दीपक राज कार की फ्यूल रेल और पंप खोलकर अंदर जमी परत दिखाते हुए।

मैकेनिक दीपक राज कार की फ्यूल रेल और पंप खोलकर अंदर जमी परत दिखाते हुए।

2. एथेनॉल सस्ता, लेकिन जनता को पेट्रोल के रेट पर मिल रहा

  • 2018 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया था कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से डीजल 50 रुपए लीटर और पेट्रोल 55 रुपए लीटर तक मिलने लगेगा।
  • अप्रैल 2026 से सरकार ने पूरे देश में E20 फ्यूल अनिवार्य कर दिया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम ज्यों के त्यों बने हुए हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग के बावजूद भी उनके दामों में कोई कमी नहीं आई है।
  • एक लीटर एथेनॉल करीब 58 रुपए का है। हिसाब लगाएं, तो भोपाल में E20 पेट्रोल की अनुमानित कीमत 102 रुपए होनी चाहिए, जो फिलहाल 114 रुपए है।
  • ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट अमित खरे के मुताबिक, एथेनॉल के दाम अभी सरकार तय कर रही है। अगर सरकार ऐसा बंद कर दे तो एथेनॉल सस्ते दाम पर भी बिक सकता है, जिससे एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के दाम और घट सकते हैं।

3. एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर तक पानी खर्च

  • 2024 में दिल्ली में हुए कार्यक्रम में देश के फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने डेटा दिए थे कि चावल से एक लीटर एथेनॉल बनाने के लिए करीब 10,790 लीटर पानी लगता है। वहीं मक्के में ये आंकड़ा 4670 लीटर और गन्ने में 3636 लीटर है।
  • भारत के लिए ये चिंता की बात है। बीते कुछ सालों से दिल्ली, बेंगलुरू, चेन्नई जैसे शहर Day Zero के करीब पहुंच जाते हैं, यानी पानी के सभी सोर्स से सप्लाई बंद होने का खतरा।

4. मक्का-गन्ने की खपत बढ़ी, तो दाल-तिलहन पर संकट

  • भारत में हर साल करीब 50 करोड़ टन गन्ना, करीब 5 करोड़ टन मक्का और करीब 15 करोड़ टन चावल होता है। यहीं तीनों फसलें भारत में बनने वाले एथेनॉल का कच्चा माल हैं।
  • इनका भोजन के रूप में भी इस्तेमाल होता है। एथेनॉल बनाने में इनकी खपत से बाजार में फसलों की सप्लाई प्रभावित होगी और महंगाई बढ़ेगी।
  • 2024-25 में एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए सरकार ने 52 लाख टन चावल आवंटित किया था और अब 2025-26 में 90 लाख टन का लक्ष्य रखा है।
  • एथेनॉल प्रोडक्शन बढ़ने से गन्ना, मक्का और चावल की मांग बढ़ रही है। किसान इन्हें ज्यादा उगाना पसंद कर सकते हैं, जिससे दालों और तिलहन की पैदावार घट सकती है। जबकि भारत पहले से ही दल और तिलहन विदेशों से खरीद रहा है।

5. नितिन गडकरी पर सवाल

  • एथेनॉल ब्लेंडिंग को प्रमोट करने में नितिन गडकरी सबसे आगे रहे हैं। उन पर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट के आरोप भी लगते हैं।
  • दरअसल, उनके बेटे सारंग गडकरी और निखिल गडकरी पूर्ति ग्रुप के जरिए चीनी और एथेनॉल प्रोडक्शन करते हैं।
  • ग्रुप की मानस एग्रो इंडस्ट्रीज 2022 में सालाना करीब 2 करोड़ लीटर एथेनॉल बना रहा था। वहीं CIAN एग्रो इंडस्ट्रीज ने कार्बन डाइऑक्साइड से एथेनॉल बनाने का एग्रीमेंट किया है।
  • जुलाई 2021 में CIAN एग्रो के एक शेयर की कीमत 36.4 रुपए थी, जो अभी 1659.8 रुपए पर पहुंच गई है। यानी 5 साल में करीब 4460% की बढ़त। इस बीच अक्टूबर 2025 में ये अपने रिकॉर्ड हाई लेवल 3122 रुपए पर पहुंचा।
  • अप्रैल 2026 में जब देश में E85 फ्यूल की चर्चा थी, तब इस कंपनी के शेयरों पर रोज अपर सर्किट लग रहा था। यानी शेयर का दाम हर रोज 5% बढ़ रहा था।
  • कांग्रेस ने नितिन गडकरी पर आरोप लगाते हुए कहा कि E20 को बढ़ावा देना क्या लोगों की भलाई के लिए है या फिर गडकरी के बेटों और उनकी कंपनियों के लिए कथित मुनाफे के लिए?
  • अक्टूबर 2025 में गडकरी ने कहा था कि सरकार हर साल 1400 करोड़ टन एथेनॉल खरीदती है। मेरे बेटों की कंपनी का देश के कुल एथेनॉल सप्लाई में 0.5% से भी कम हिस्सा है।
नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी (दाएं से दूसरे) CIAN के मैनेजिंग डायरेक्टर है। सारंग गडकरी (बाएं से दूसरे) मानस एग्रो के डायरेक्टर हैं।

नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी (दाएं से दूसरे) CIAN के मैनेजिंग डायरेक्टर है। सारंग गडकरी (बाएं से दूसरे) मानस एग्रो के डायरेक्टर हैं।

सवाल-5: सरकार क्या कदम उठाए, तो चीजें ठीक हो सकती हैं? जवाबः एक्सपर्ट्स 5 रास्ते बताते हैं… 1. फ्लेक्स इंजन गाड़ियों की बिक्री बढ़ाएं और ब्लेंडिंग की रफ्तार धीमी करें

  • एथेनॉल ब्लेंडिंग के सबसे पुराने और कारगर मॉडल ब्राजील की तरह भारत में भी फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  • ब्राजील ने ऐसी गाड़ियों पर कम टैक्स लिया, जिससे लोगों को सस्ते दाम पर गाड़ियां मिलीं। आज वहां बिकने वाली करीब 85% कारें फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली हैं।

2. एथेनॉल अनिवार्य न किया जाए, लोगों को विकल्प मिले

  • ब्राजील के पेट्रोल पंपों पर लोगों को E27, E100 जैसे फ्यूल ऑप्शन मिलते हैं। यानी वो जो पेट्रोल चाहे खरीद सकते हैं। इसे भारत की तरह अनिवार्य नहीं किया गया है।
  • टूटू धवन के मुताबिक, ग्राहकों को सार्वजनिक टेस्टिंग के जरिए एथेनॉल के फायदों के साथ-साथ नुकसान के बारे में भी बताया जाना चाहिए था। लोगों को यह चुनने का मौका देना चाहिए कि वो एथेनॉल इस्तेमाल करना चाहते हैं या नहीं। जो एथेनॉल चुने, उन्हें प्रोत्साहन देना चाहिए।
ब्राजील के पेट्रोल पंपों में इस तरह से पेट्रोल के अलग-अलग नोजल होते हैं।

ब्राजील के पेट्रोल पंपों में इस तरह से पेट्रोल के अलग-अलग नोजल होते हैं।

3. पारदर्शिता लाई जानी चाहिए

  • भारत की गाड़ियों पर एथेनॉल के असर पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने स्टडी की थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। सरकार इसे गोपनीय बताती है।
  • ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट अमित खरे के मुताबिक, जो सच है वह पब्लिक को बताना चाहिए। जैसे ऐवरेज में कमी आएगी, इंजन में खराबी आएगी, पुरानी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू घटेगी। लोगों को बताना चाहिए कि क्या टेस्ट हुए थे और उसकी क्या रिपोर्ट आई थी।

4. ईंधन की कीमत घटाई जाए

  • 2021 में नीति आयोग ने सिफारिश की थी कि एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल सस्ते दाम पर बेचा जाना चाहिए। लेकिन E20 रोलआउट होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में कोई कमी नहीं आई है।

5. गन्ने-मक्के का विकल्प ढूंढना

  • भारत में अभी ज्यादातर एथेनॉल सीधे गन्ने या अनाज से बन रहा है, जो फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल है। इससे पानी और खाने की कमी हो सकती है।
  • सरकार को सेकेंड जनरेशन एथेनॉल पर फोकस करना चाहिए, जो गन्ने की खोई, पराली, बांस, धान की भूसी और अन्य कचरे से बनाया जाता है।
  • भारत में हर साल 16 करोड़ टन धान की पराली होती है। इसका इस्तेमाल एथेनॉल में करने से प्रदूषण भी कम होगा और फसल में लगने वाले ज्यादा पानी की भी बचत होगी।

अब आखिर में एथेनॉल से जुड़ा एक नॉलेज कैप्सूल…

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